नेपाल के सुनसरी में बोलबम यात्रा के दौरान हिंसा, पुलिस फायरिंग में युवक की मौत; कई घायल, जांच समिति गठित
काठमांडू: नेपाल के सुनसरी जिले के देवानगंज (कप्तानगंज) में सावन के बोलबम यात्रा के दौरान धार्मिक जुलूस से जुड़े विवाद के बाद दो समुदायों के बीच हिंसक झड़प हो गई। अधिकारियों के अनुसार, हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस और सशस्त्र सुरक्षा बल ने फायरिंग की, जिसमें 24 वर्षीय ओम प्रकाश मेहता की मौत हो गई। घटना में कई पुलिसकर्मियों और स्थानीय लोगों समेत अनेक लोग घायल हुए हैं। प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों में कर्फ्यू लागू कर अतिरिक्त सुरक्षा बल और सेना की तैनाती की है।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
पुलिस के अनुसार, घटना से पहले इलाके में धार्मिक झंडे को लेकर तनाव पैदा हो गया था। आरोप है कि स्थानीय बिजली के खंभे पर लगा एक समुदाय का झंडा हटाकर दूसरे समुदाय का धार्मिक झंडा लगा दिया गया, जिससे दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया। रात करीब 10:30 बजे मंदिर के पास बोलबम यात्रा के दौरान तेज आवाज में बज रहे डीजे को लेकर कहासुनी हुई। देखते ही देखते विवाद हिंसक झड़प में बदल गया और दोनों पक्षों के बीच पत्थरबाजी शुरू हो गई।
पुलिस फायरिंग में युवक की मौत
स्थिति बिगड़ने पर नेपाल पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पहले चेतावनी दी और बाद में फायरिंग की। सशस्त्र पुलिस बल ने भी भीड़ को तितर-बितर करने के लिए गोली चलाई। इसी दौरान 24 वर्षीय ओम प्रकाश मेहता को गोली लगी, जिससे उनकी मौत हो गई। अधिकारियों ने कहा है कि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि घातक गोली किस सुरक्षा बल के हथियार से चली थी। इसकी जांच जारी है।
कई लोग घायल
पुलिस के अनुसार, हिंसा में नेपाल पुलिस के 10 जवान, सशस्त्र पुलिस बल के 5 जवान, एक पुलिस इंस्पेक्टर, कई स्थानीय नागरिक घायल हुए हैं। कुछ नागरिकों को गोली लगने की भी सूचना है। घायलों का इलाज बिराटनगर और सुनसरी के अस्पतालों में चल रहा है। अलग-अलग शुरुआती रिपोर्टों में घायलों की संख्या 16 से 24 के बीच बताई गई है। अधिकारियों की ओर से अंतिम आधिकारिक आंकड़े का इंतजार है।
सेना तैनात, कर्फ्यू लागू
घटना के बाद विरोध प्रदर्शन आसपास के इलाकों तक फैल गया। कई स्थानों पर टायर जलाए गए, दुकानों में तोड़फोड़ की गई और सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाया गया। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में कर्फ्यू लागू किया तथा नेपाल सेना की टुकड़ियां और बख्तरबंद वाहन तैनात किए। अधिकारियों के अनुसार, अतिरिक्त सुरक्षा बल पहुंचने के बाद हालात धीरे-धीरे सामान्य होने लगे।
विपक्ष ने उठाए सवाल
घटना के बाद विपक्षी नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए।
- राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के सांसद लाल विक्रम थापा ने कहा कि भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पहले गैर-घातक उपाय अपनाए जाने चाहिए थे।
- राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी की मुख्य सचेतक खुशबू ओली ने प्रशासनिक विफलता को घटना के लिए जिम्मेदार बताया।
हालांकि प्रशासन ने कहा है कि हिंसा को रोकने के लिए आवश्यक कदम उठाए गए।
गृह मंत्रालय ने गठित की जांच समिति
नेपाल के गृह मंत्री सुधन गुरूंग ने घटना के बाद केंद्रीय सुरक्षा समिति की आपात बैठक बुलाई। बैठक में सीमा क्षेत्रों की सुरक्षा, पुलिस कार्रवाई और खुफिया व्यवस्था की समीक्षा की गई। गृह मंत्रालय ने संयुक्त सचिव भूपेंद्र थापा की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय जांच समिति गठित की है। समिति को सात दिनों के भीतर रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है।
संवेदनशील माना जाता है कप्तानगंज
कप्तानगंज, सुनसरी जिले के देवानगंज ग्रामीण नगरपालिका में भारत-नेपाल सीमा के निकट स्थित है। यहां हिंदू और मुस्लिम समुदायों की उल्लेखनीय आबादी रहती है तथा भारत के बिहार और उत्तर प्रदेश से सामाजिक एवं व्यापारिक संबंध भी हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, धार्मिक जुलूस, झंडे या सार्वजनिक आयोजनों से जुड़े विवाद यहां पहले भी तनाव का कारण बनते रहे हैं।
पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं
नेपाल का तराई क्षेत्र अतीत में भी कई हिंसक घटनाओं का गवाह रहा है। वर्ष 2007 का गौर कांड, कपिलवस्तु हिंसा और 2015 की टीकापुर घटना क्षेत्र की प्रमुख घटनाओं में शामिल हैं। हालांकि इन सभी घटनाओं की परिस्थितियां अलग-अलग थीं।
नेपाल में मुस्लिम आबादी
नेपाल की 2021 की जनगणना के अनुसार, देश की कुल आबादी में मुस्लिम समुदाय की हिस्सेदारी लगभग 5 प्रतिशत है। तराई और मधेश के कई सीमावर्ती जिलों में यह अनुपात राष्ट्रीय औसत से अधिक है।






