बांग्लादेश को मिला नया राष्ट्रपति, BNP के मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर की बड़ी जीत
ढाका: बांग्लादेश को नया राष्ट्रपति मिल गया है। बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के वरिष्ठ नेता मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर देश के 23वें राष्ट्रपति निर्वाचित हुए हैं। संसद में हुए राष्ट्रपति चुनाव में फखरुल ने विपक्षी गठबंधन के उम्मीदवार कर्नल (रिटायर्ड) ओली अहमद को 167 वोटों के अंतर से हराया। फखरुल को 255 वोट मिले, जबकि ओली अहमद के खाते में 88 वोट आए।यह चुनाव बांग्लादेश के राजनीतिक इतिहास में खास माना जा रहा है, क्योंकि यह 1991 के बाद पहली प्रतिस्पर्धी राष्ट्रपति चुनाव प्रक्रिया थी। राष्ट्रपति चुनाव संसद में हुआ, जहां BNP और उसके सहयोगी दलों के पास मजबूत बहुमत है।
मिर्जा फखरुल बने बांग्लादेश के 23वें राष्ट्रपति
राष्ट्रपति चुनाव के लिए संसद में मतदान कराया गया। चुनाव परिणाम की घोषणा मुख्य निर्वाचन आयुक्त और रिटर्निंग ऑफिसर एएमएम नासिर उद्दीन ने की। फखरुल इस्लाम आलमगीर ने 255 वोट हासिल कर स्पष्ट जीत दर्ज की। उनके प्रतिद्वंद्वी ओली अहमद को 88 वोट मिले। दोनों के बीच जीत का अंतर 167 वोट रहा। मिर्जा फखरुल BNP के लंबे समय से वरिष्ठ नेता रहे हैं और पार्टी के महासचिव के तौर पर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा चुके हैं। राष्ट्रपति पद पर उनका निर्वाचन BNP के लिए भी बड़ी राजनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री ने लाल गुलाब देकर दी बधाई
राष्ट्रपति चुने जाने के बाद प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर को बधाई दी। प्रधानमंत्री ने नए राष्ट्रपति को लाल गुलाब भेंट कर उनका अभिवादन किया। इस दौरान दोनों नेताओं की मुलाकात की तस्वीरें भी सामने आई हैं। मिर्जा फखरुल के राष्ट्रपति चुने जाने के बाद अब उनके शपथ ग्रहण की तैयारी शुरू हो गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, वह 21 अगस्त 2026 की शाम बंगभवन में राष्ट्रपति पद की शपथ लेंगे।
बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा बदलाव
मिर्जा फखरुल का राष्ट्रपति बनना बांग्लादेश की हालिया राजनीतिक उथल-पुथल के बाद सत्ता के नए समीकरणों को भी दर्शाता है। फरवरी 2026 में हुए आम चुनाव में BNP ने बड़ी जीत हासिल की थी और तारिक रहमान के नेतृत्व में सरकार बनी। अब पार्टी के वरिष्ठ नेता का राष्ट्रपति पद पर पहुंचना देश की नई राजनीतिक व्यवस्था में BNP की मजबूत स्थिति को दिखाता है। हालांकि बांग्लादेश में राष्ट्रपति का पद मुख्य रूप से संवैधानिक और औपचारिक है, लेकिन राष्ट्रपति देश के राष्ट्राध्यक्ष और सशस्त्र बलों के सर्वोच्च कमांडर होते हैं। ऐसे में मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों में मिर्जा फखरुल की नई भूमिका को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


