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मिडिल ईस्ट संकट की आड़ में साइबर ठगी का नया खेल, LPG सब्सिडी और बुकिंग के नाम पर खाली हो रहे बैंक खाते

LPG Cyber __Fraud

अंतरराष्ट्रीय संकट को बना रहे हथियार, फर्जी लिंक और QR कोड से लोगों को बना रहे शिकार

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और ऊर्जा संकट की आशंकाओं के बीच साइबर अपराधियों ने ठगी का नया तरीका खोज निकाला है। एलपीजी बुकिंग, गैस सब्सिडी, आपातकालीन ईंधन आपूर्ति और प्रायोरिटी डिलीवरी जैसे झूठे दावों के जरिए लोगों को फंसाया जा रहा है। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) ने इस तरह के मामलों में तेजी आने के बाद देशभर के नागरिकों के लिए विशेष चेतावनी जारी की है।

साइबर सुरक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि अपराधी लोगों के मन में पैदा हो रही आशंकाओं और घबराहट का फायदा उठा रहे हैं। वे ऐसे संदेश भेज रहे हैं जिनमें दावा किया जाता है कि मिडिल ईस्ट संकट के कारण गैस की कमी हो सकती है, इसलिए तत्काल बुकिंग करें या विशेष सरकारी सब्सिडी का लाभ उठाएं।

फर्जी LPG ऑफर बन रहे जाल
जांच एजेंसियों के अनुसार ठग एसएमएस, व्हाट्सएप, टेलीग्राम और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के जरिए लाखों लोगों तक पहुंच रहे हैं। इन संदेशों में ऐसे लिंक और QR कोड दिए जाते हैं जो देखने में असली गैस एजेंसियों की वेबसाइट जैसे लगते हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति लिंक पर क्लिक करता है, उससे बैंक डिटेल, आधार नंबर, मोबाइल नंबर, ओटीपी या अन्य संवेदनशील जानकारी मांगी जाती है। कई मामलों में लोगों से मात्र कुछ रुपये का “वेरिफिकेशन चार्ज” जमा करने को कहा जाता है। इसके बाद साइबर अपराधी बैंक खातों तक पहुंच बनाकर रकम निकाल लेते हैं।

नकली सब्सिडी और फर्जी राहत योजना
साइबर ठग यह दावा भी कर रहे हैं कि सरकार पश्चिम एशिया संकट के कारण बढ़ती गैस कीमतों से राहत देने के लिए विशेष सब्सिडी दे रही है। इसके लिए लोगों से ऑनलाइन फॉर्म भरवाए जाते हैं और बैंकिंग जानकारी मांगी जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार या गैस कंपनियां कभी भी फोन, व्हाट्सएप या किसी लिंक के जरिए बैंकिंग विवरण नहीं मांगती हैं। ऐसे संदेशों पर भरोसा करना भारी नुकसान का कारण बन सकता है।

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‘मनी म्यूल’ बनाकर चला रहे काले धन का खेल
साइबर अपराध का दूसरा खतरनाक ट्रेंड “मनी म्यूल” नेटवर्क है। जांच एजेंसियों के मुताबिक अपराधी अब अपनी अवैध कमाई को छिपाने के लिए आम लोगों के क्रेडिट कार्ड और बैंक खातों का इस्तेमाल कर रहे हैं। ठग ऐसे लोगों को निशाना बनाते हैं जिनके क्रेडिट कार्ड पर ज्यादा बकाया होता है। उन्हें ऑफर दिया जाता है कि उनका कार्ड बिल चुकाया जाएगा और बदले में कुछ कमीशन मिलेगा। कई लोग इसे आसान कमाई समझकर स्वीकार कर लेते हैं।

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असल में यह पैसा साइबर फ्रॉड, फिशिंग, निवेश घोटालों और अन्य डिजिटल अपराधों से कमाया गया होता है। इस प्रक्रिया में शामिल व्यक्ति अनजाने में मनी लॉन्ड्रिंग नेटवर्क का हिस्सा बन जाता है और कानूनी कार्रवाई का सामना भी कर सकता है।

I4C ने जारी की अहम सलाह
भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र ने लोगों से अपील की है कि वे केवल अधिकृत वेबसाइट और मोबाइल ऐप के माध्यम से ही एलपीजी बुकिंग करें। किसी भी अनजान लिंक, एपीके फाइल या क्यूआर कोड को स्कैन करने से बचें। साथ ही अपना ओटीपी, यूपीआई पिन, बैंक पासवर्ड या अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा न करें। यदि कोई व्यक्ति आपके क्रेडिट कार्ड से भुगतान करने या बिल चुकाने के बदले कमीशन देने की बात करता है, तो तुरंत सतर्क हो जाएं।

ठगी का शिकार होने पर क्या करें?
यदि किसी व्यक्ति को साइबर ठगी का संदेह हो या वह ऐसी किसी घटना का शिकार हो जाए, तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करनी चाहिए। इसके अलावा साइबर क्राइम पोर्टल पर भी शिकायत की जा सकती है। साइबर विशेषज्ञों का कहना है कि डिजिटल युग में जागरूकता ही सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है। किसी भी ऑफर, सब्सिडी या वित्तीय लाभ के नाम पर जल्दबाजी में निर्णय लेने से पहले उसकी सत्यता अवश्य जांच लें।

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