राज्यसभा चुनाव में बड़ा उलटफेर! बैद्यनाथ राम और परिमल नाथवानी विजयी, कांग्रेस को झटका
रांची: झारखंड की दो राज्यसभा सीटों के लिए हुए चुनाव में बड़ा राजनीतिक उलटफेर देखने को मिला है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के उम्मीदवार बैद्यनाथ राम और एनडीए समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी ने जीत दर्ज कर ली है। वहीं इंडिया गठबंधन के दूसरे उम्मीदवार और कांग्रेस प्रत्याशी प्रणव झा को हार का सामना करना पड़ा। चुनाव परिणाम ने झारखंड की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है।
परिणाम में दिखा बड़ा उलटफेर, कांग्रेस उम्मीदवार को झटका
राज्यसभा चुनाव के नतीजों में सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश वोटों के आंकड़ों से सामने आया। झामुमो उम्मीदवार बैद्यनाथ राम को कुल 31 वोट मिले, जबकि भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी के पक्ष में 28 वोट पड़े। हालांकि नाथवानी के समर्थन में पड़े 2 वोट अमान्य (इनवैलिड) घोषित कर दिए गए। वहीं कांग्रेस उम्मीदवार प्रणव झा को 21 वोट मिले, जबकि उनके पक्ष में पड़ा 1 वोट रद्द कर दिया गया।
56 विधायकों के बावजूद कांग्रेस उम्मीदवार की हार
राज्यसभा चुनाव से पहले विधानसभा के आंकड़े इंडिया गठबंधन के पक्ष में दिखाई दे रहे थे। झामुमो, कांग्रेस, राजद और भाकपा माले को मिलाकर गठबंधन के पास 56 विधायक थे, जबकि एनडीए के पास 24 विधायक ही थे। ऐसे में माना जा रहा था कि गठबंधन के दोनों उम्मीदवार आसानी से जीत जाएंगे। लेकिन नतीजों ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए और परिमल नाथवानी ने कांग्रेस उम्मीदवार को पीछे छोड़ते हुए जीत दर्ज कर ली।
परिमल नाथवानी की रणनीति रही सफल
निर्दलीय उम्मीदवार परिमल नाथवानी को भाजपा और एनडीए का समर्थन प्राप्त था। चुनाव से पहले उन्होंने लगभग सभी विधायकों से व्यक्तिगत संपर्क साधा था और लगातार दावा कर रहे थे कि उन्हें दलगत सीमाओं से ऊपर उठकर समर्थन मिलेगा। नतीजों ने उनके दावे को सही साबित कर दिया।
क्रॉस वोटिंग की चर्चा तेज
परिणाम सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में क्रॉस वोटिंग की चर्चा तेज हो गई है। चूंकि विधानसभा का गणित कांग्रेस उम्मीदवार के पक्ष में माना जा रहा था, ऐसे में परिमल नाथवानी की जीत ने यह संकेत दिया है कि कुछ वोट अपेक्षित लाइन से अलग पड़े हैं। हालांकि आधिकारिक तौर पर किस दल के विधायकों ने क्रॉस वोटिंग की, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है।
बैद्यनाथ राम की जीत पहले से मानी जा रही थी तय
झामुमो उम्मीदवार बैद्यनाथ राम की जीत लगभग तय मानी जा रही थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना था कि गठबंधन के पास मौजूद संख्या बल उन्हें आसानी से राज्यसभा पहुंचा देगा। चुनाव परिणाम में भी यह अनुमान सही साबित हुआ और उन्होंने जीत हासिल कर ली।
झारखंड की राजनीति में बढ़ेगा असर
परिमल नाथवानी की जीत को केवल राज्यसभा चुनाव की जीत नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे झारखंड की राजनीति में एनडीए के लिए एक बड़ी मनोवैज्ञानिक बढ़त के रूप में देखा जा रहा है। वहीं कांग्रेस के लिए यह परिणाम आत्ममंथन का विषय बन सकता है। आने वाले दिनों में क्रॉस वोटिंग और राजनीतिक रणनीति को लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज होने की संभावना है।
अब राज्यसभा चुनाव के इस परिणाम के बाद झारखंड की राजनीति में नए समीकरणों और संभावित बदलावों पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।






