दवा बिक्री के नियमों में बड़ा बदलाव: सिरप को मिली छूट खत्म, केंद्र सरकार का नया आदेश लागू
ड्रग्स रूल्स 1945 में संशोधन, 9 जून से प्रभावी हुआ नया नियम
नई दिल्ली: केंद्र सरकार ने दवाओं की बिक्री और वितरण से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने ड्रग्स रूल्स, 1945 में संशोधन करते हुए Schedule K से “Syrups” शब्द को हटा दिया है। इस संबंध में जारी अधिसूचना 9 जून 2026 से प्रभावी हो गई है। सरकार के इस फैसले का असर दवा उद्योग, मेडिकल स्टोर संचालकों और दवा वितरण प्रणाली पर पड़ सकता है। अब तक Schedule K के तहत मिलने वाली कुछ विशेष छूटों का लाभ सिरप श्रेणी की दवाओं को मिलता था, लेकिन संशोधन के बाद यह स्थिति बदल जाएगी।
क्या है Schedule K?
ड्रग्स रूल्स, 1945 के तहत Schedule K उन दवाओं और औषधीय उत्पादों की सूची है जिन्हें कुछ विशेष परिस्थितियों में नियमों से आंशिक छूट प्रदान की जाती है। इस सूची में शामिल दवाओं पर लाइसेंस, पैकेजिंग, भंडारण या बिक्री से संबंधित कुछ नियमों में राहत दी जाती रही है। लेकिन अब “Syrups” शब्द हटाए जाने के बाद संबंधित सिरप उत्पादों पर सामान्य दवा नियम लागू हो सकते हैं।
सरकार ने क्यों किया बदलाव?
स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इस संशोधन से पहले दिसंबर 2025 में ड्राफ्ट नियम जारी कर जनता, उद्योग जगत और अन्य हितधारकों से सुझाव एवं आपत्तियां मांगी गई थीं। मंत्रालय ने बताया कि प्राप्त सुझावों की समीक्षा करने और Drugs Technical Advisory Board (DTAB) से विस्तृत विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया गया। इसके बाद संशोधित अधिसूचना जारी कर नियम लागू कर दिए गए।
क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव के बाद सिरप आधारित दवाओं की बिक्री और वितरण पर अधिक नियामकीय निगरानी संभव हो सकती है। हालांकि सरकार ने अपने आदेश में यह स्पष्ट नहीं किया है कि किन उत्पादों पर तत्काल प्रभाव पड़ेगा और किन मामलों में अतिरिक्त दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। फार्मा उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि नए नियमों के व्यावहारिक प्रभाव को समझने के लिए विस्तृत दिशानिर्देशों का इंतजार किया जाएगा।
स्वास्थ्य मंत्रालय का उद्देश्य
सरकार का कहना है कि दवाओं की गुणवत्ता, सुरक्षा और नियमन को और मजबूत बनाने के उद्देश्य से समय-समय पर नियमों में बदलाव किए जाते हैं। Schedule K में किया गया यह संशोधन भी उसी प्रक्रिया का हिस्सा है। फिलहाल 9 जून 2026 से लागू इस नए नियम पर फार्मा कंपनियों, वितरकों और मेडिकल स्टोर संचालकों की नजर बनी हुई है।




