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मिडिल ईस्ट में बढ़ा तनाव: ईरान ने फिर बंद किया स्ट्रेट ऑफ होर्मुज, दुनिया की तेल सप्लाई पर असर की आशंका

Strait of Hormuz Closed Again

तेहरान: मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव बढ़ गया है। ईरान ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा बंद करने का फैसला लिया है। ईरानी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह कदम लेबनान में इजरायली हमलों और अमेरिका-इजरायल पर युद्धविराम समझौते के उल्लंघन के आरोपों के विरोध में उठाया गया है।

ईरान की संयुक्त सैन्य कमान खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर ने बयान जारी कर इस फैसले की पुष्टि की है।

ईरान बोला- यह सिर्फ पहला कदम
ईरानी सैन्य कमान ने अपने बयान में कहा है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद करना केवल पहला कदम है। यदि अमेरिका और इजरायल की ओर से आक्रामक कार्रवाई जारी रहती है तो ईरान और भी कड़े कदम उठा सकता है। बयान में कहा गया कि क्षेत्रीय सुरक्षा और संप्रभुता से जुड़े मुद्दों पर ईरान किसी भी तरह का समझौता नहीं करेगा।

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हाल ही में खोला गया था समुद्री मार्ग
इसी सप्ताह अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम समझौते के बाद जहाजों की आवाजाही के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को खोला गया था। माना जा रहा था कि इससे क्षेत्र में तनाव कम होगा और वैश्विक तेल बाजार को राहत मिलेगी। हालांकि, समझौते के कुछ ही दिनों बाद दक्षिणी लेबनान में हुए इजरायली हमलों ने हालात फिर बदल दिए।

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लेबनान पर हमले के बाद भड़का ईरान
रिपोर्ट्स के अनुसार, शनिवार को दक्षिणी लेबनान पर हुए इजरायली हमलों में कम से कम 16 लोगों की मौत हो गई, जिनमें दो बच्चे भी शामिल थे। ईरान लंबे समय से लेबनान के संगठन हिज्बुल्लाह का समर्थन करता रहा है। तेहरान ने पहले भी चेतावनी दी थी कि यदि लेबनान पर हमले जारी रहे तो वह समझौतों पर पुनर्विचार करेगा।

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अमेरिका-ईरान वार्ता पर पड़ सकता है असर
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच तकनीकी स्तर की वार्ता 21 जून को स्विट्जरलैंड के बर्गनस्टॉक में प्रस्तावित है। बताया जा रहा है कि इस बातचीत में अमेरिका, ईरान, पाकिस्तान और कतर के प्रतिनिधि शामिल हो सकते हैं। ऐसे में स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को फिर से बंद करने का फैसला वार्ता प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है।

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दुनिया की तेल सप्लाई के लिए बेहद अहम है होर्मुज
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा गलियारों में गिना जाता है। वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग से होकर गुजरता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समुद्री मार्ग लंबे समय तक बंद रहता है, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है और कई देशों की अर्थव्यवस्था प्रभावित हो सकती है।

फरवरी से बढ़ा था संघर्ष
रिपोर्ट्स के मुताबिक, 28 फरवरी से क्षेत्र में सैन्य तनाव बढ़ा था, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ कार्रवाई शुरू की थी। इसके जवाब में ईरान ने भी कई कदम उठाए और क्षेत्र में अमेरिका समर्थित ठिकानों को निशाना बनाया। हालांकि बाद में अमेरिका और ईरान के बीच शांति समझौते की खबरें सामने आईं, लेकिन लेबनान को लेकर इजरायल के रुख ने एक बार फिर हालात को तनावपूर्ण बना दिया है।

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