झारखंड आंदोलनकारियों को बड़ा सम्मान: 8659 को पेंशन व आश्रितों को सरकारी लाभ

Andolankari Samman

Ranchi: झारखंड राज्य निर्माण आंदोलन में अहम भूमिका निभाने वाले आंदोलनकारियों के लिए हेमंत सोरेन सरकार ने एक ऐतिहासिक और सम्मानजनक फैसला लिया है। गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने 38वीं संपुष्ट सूची जारी करते हुए राज्यभर के 8659 आंदोलनकारियों को औपचारिक रूप से चिन्हित कर लिया है। इस सूची में झारखंड के सभी 24 जिलों के आंदोलनकारी शामिल हैं।

सरकार की ओर से जारी संकल्प के तहत अब इन आंदोलनकारियों और उनके आश्रितों को सम्मान पेंशन, सामाजिक मान्यता और सरकारी नौकरी में विशेष लाभ मिलेगा। यह निर्णय झारखंड आंदोलन के इतिहास में पहली बार इतने बड़े स्तर पर आंदोलनकारियों को संस्थागत सम्मान देने वाला माना जा रहा है।

जीवनभर मिलेगी सम्मान पेंशन, आश्रितों को भी सुरक्षा
सरकारी संकल्प के अनुसार, चिन्हित किए गए सभी आंदोलनकारियों को उनके पूरे जीवनकाल तक सम्मान पेंशन दी जाएगी। यदि किसी आंदोलनकारी का निधन हो जाता है, तो उसके बाद उनके एक आश्रित को भी आजीवन पेंशन देने का प्रावधान किया गया है। सरकार का कहना है कि यह योजना केवल आर्थिक सहायता नहीं, बल्कि आंदोलनकारियों के बलिदान को स्थायी पहचान देने का प्रयास है।

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कारावास की अवधि से तय होगी पेंशन राशि
सम्मान पेंशन की राशि आंदोलन के दौरान जेल में बिताई गई अवधि के आधार पर निर्धारित की गई है। जिन आंदोलनकारियों को तीन माह से कम समय तक कारावास हुआ था, उन्हें प्रतिमाह 3500 रुपये की पेंशन मिलेगी। जिनका कारावास तीन से छह माह तक रहा, उन्हें 5000 रुपये प्रतिमाह दिए जाएंगे। वहीं छह माह से अधिक समय तक जेल में रहे आंदोलनकारियों को 7000 रुपये प्रतिमाह की सम्मान पेंशन मिलेगी।

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आश्रितों को सरकारी नौकरी में विशेष लाभ
राज्य सरकार ने आंदोलनकारियों के परिवारों के लिए भी बड़ी राहत का फैसला किया है। संकल्प के अनुसार, पुलिस फायरिंग या कारावास के दौरान जिन आंदोलनकारियों की मृत्यु हुई या जो 40 प्रतिशत से अधिक दिव्यांग हो गए, उनके परिवार के एक सदस्य को उसकी शैक्षणिक योग्यता के अनुरूप तृतीय या चतुर्थ वर्गीय सरकारी पद पर सीधी नियुक्ति दी जाएगी।

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इसके अलावा, अन्य चिन्हित आंदोलनकारियों के आश्रितों को राज्य सरकार की भर्तियों में तृतीय और चतुर्थ वर्गीय पदों पर 5 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण का लाभ भी मिलेगा। इससे हजारों परिवारों को रोजगार की स्थायी सुरक्षा मिलने की उम्मीद है।

आंदोलनकारियों के सम्मान की दिशा में ऐतिहासिक कदम
सरकार के इस फैसले को झारखंड आंदोलनकारियों के लिए ऐतिहासिक न्याय और सम्मान के रूप में देखा जा रहा है। लंबे समय से आंदोलनकारी संगठन सरकार से पेंशन और मान्यता की मांग कर रहे थे। अब 38वीं संपुष्ट सूची जारी होने के बाद यह उम्मीद जताई जा रही है कि शेष आंदोलनकारियों की पहचान की प्रक्रिया भी तेज होगी।

राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इस फैसले को झारखंड की पहचान और आंदोलन की विरासत को संरक्षित करने वाला कदम माना जा रहा है।

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