JAC ने प्रमाण पत्र संशोधन प्रक्रिया में किया बड़ा बदलाव, सांसद डॉ. प्रदीप वर्मा की पहल से छात्रों को मिली राहत
रांची: झारखंड अधिविद्य परिषद (JAC) ने प्रमाण-पत्रों में संशोधन (Certificate Correction) की प्रक्रिया को लेकर जारी अपनी अधिसूचना में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। यह बदलाव राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा द्वारा छात्रहित में उठाई गई मांगों के बाद किया गया है। परिषद ने नई विज्ञप्ति जारी करते हुए न केवल संशोधन प्रक्रिया को आसान बनाया है, बल्कि आवेदन की अंतिम तिथि भी तीन महीने बढ़ाकर 30 सितंबर 2026 कर दी है।
इस फैसले से राज्यभर के हजारों विद्यार्थियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है, जो प्रक्रियागत जटिलताओं के कारण अब तक संशोधन के लिए आवेदन नहीं कर पा रहे थे।
सांसद ने परिषद अध्यक्ष को लिखा था पत्र
राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने झारखंड अधिविद्य परिषद के अध्यक्ष को पत्र लिखकर प्रमाण-पत्र संशोधन प्रक्रिया में आ रही व्यावहारिक कठिनाइयों की ओर ध्यान आकर्षित किया था। उन्होंने अपने पत्र में छात्रहित को ध्यान में रखते हुए तीन महत्वपूर्ण सुझाव दिए थे।
उनकी प्रमुख मांगों में यह शामिल था कि यदि किसी विद्यार्थी का मैट्रिक प्रमाण-पत्र संशोधन आवेदन लंबित है, तो उसे केवल इसी कारण इंटरमीडिएट प्रमाण-पत्र में संशोधन के आवेदन से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने परिषद से इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी करने का अनुरोध किया था। इसके अलावा उन्होंने विज्ञप्ति संख्या 48/2025 में आवश्यक संशोधन या स्पष्टीकरण जारी कर स्थायी समाधान सुनिश्चित करने की भी मांग की थी।
JAC ने नई विज्ञप्ति में किए महत्वपूर्ण बदलाव
सांसद की मांगों पर विचार करने के बाद झारखंड अधिविद्य परिषद ने विज्ञप्ति संख्या 44/2026 जारी कर कई अहम संशोधन किए हैं। नई व्यवस्था के अनुसार, प्रमाण-पत्रों में संशोधन के लिए आवेदन करने वाले विद्यार्थियों को अब न्यायिक दंडाधिकारी (Judicial Magistrate) से सत्यापित शपथ-पत्र (Affidavit) प्रस्तुत करना होगा। परिषद ने संशोधन प्रक्रिया से जुड़े अन्य दिशा-निर्देशों में भी आवश्यक बदलाव किए हैं ताकि पहले सामने आ रही व्यावहारिक समस्याओं का समाधान किया जा सके।
आवेदन की अंतिम तिथि बढ़ी
छात्रों को राहत देते हुए JAC ने प्रमाण-पत्र संशोधन के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 30 जून 2026 से बढ़ाकर 30 सितंबर 2026 कर दी है। परिषद का मानना है कि समय सीमा बढ़ने से वे विद्यार्थी भी आवेदन कर सकेंगे, जो किसी कारणवश निर्धारित समय तक प्रक्रिया पूरी नहीं कर पाए थे।
इंटरमीडिएट संशोधन के लिए भी मिली राहत
नई व्यवस्था के तहत जिन विद्यार्थियों ने पहले ही मैट्रिक प्रमाण-पत्र में संशोधन के लिए आवेदन कर दिया है, वे अब चालान रसीद (Challan Receipt) के आधार पर इंटरमीडिएट प्रमाण-पत्र में संशोधन के लिए भी आवेदन कर सकेंगे। इस संबंध में परिषद अध्यक्ष ने परिषद के सचिव को आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने का निर्देश दिया है। इससे उन विद्यार्थियों की बड़ी समस्या का समाधान होगा, जिनका मैट्रिक संशोधन लंबित रहने के कारण इंटरमीडिएट प्रमाण-पत्र में भी सुधार नहीं हो पा रहा था।
सांसद बोले- कोई छात्र प्रक्रियागत जटिलता का शिकार न हो
डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने अपने पत्र में कहा था कि वर्तमान व्यवस्था के कारण बड़ी संख्या में विद्यार्थी केवल तकनीकी और प्रक्रियागत कारणों से प्रमाण-पत्र संशोधन के अवसर से वंचित हो सकते हैं। उन्होंने परिषद से आग्रह किया था कि छात्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए ऐसी व्यवस्था बनाई जाए, जिससे किसी भी पात्र छात्र का भविष्य प्रभावित न हो और प्रमाण-पत्रों में आवश्यक संशोधन समय पर हो सके।
छात्रों के लिए राहत भरा फैसला
शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का मानना है कि परिषद द्वारा जारी संशोधित दिशा-निर्देश विद्यार्थियों के हित में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। आवेदन की समय सीमा बढ़ाने, संशोधन प्रक्रिया को व्यावहारिक बनाने और लंबित मैट्रिक संशोधन के बावजूद इंटरमीडिएट आवेदन स्वीकार करने जैसे फैसलों से हजारों विद्यार्थियों को सीधा लाभ मिलेगा। इस पूरे घटनाक्रम को राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा की पहल का सकारात्मक परिणाम माना जा रहा है। शिक्षा क्षेत्र से जुड़े लोगों का कहना है कि इस निर्णय से छात्र-छात्राओं की लंबे समय से चली आ रही समस्याओं का समाधान होगा और प्रमाण-पत्र संशोधन की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक सरल और पारदर्शी बनेगी।






