रिम्स निदेशक डॉ. राजकुमार के इस्तीफे पर सियासत तेज, बीजेपी ने सरकार को घेरा तो बचाव में उतरे झामुमो और कांग्रेस

RIMS Director Dr Rajkumar Resignation
dipika pandey sing
दीपक कुमार थाना प्रभारी रामगढ़ घाटों
द हॉप मल्टीस्पेशलिस्ट हॉस्पिटल रांची रोड मरार रामगढ़
बिहार फाऊंडरी एंड कास्टिंग लिमिटेड इंडस्ट्रीज एरिया मरार रामगढ़
मां तारा सेवा समिति
मां सेवा यतन हॉस्पिटल
रजरप्पा थाना प्रभारी श्री कृष्ण कुमार
रमेश रविदास
रमेश सिंह
राधा गोविंद यूनिवर्सिटी लाल की घाटी रामगढ़
रोटरी रामगढ़ सिटी के पूर्व अध्यक्ष श्री आदर्श चौधरी
रोटेरियन हरीश चौधरी
होटल सम्राट गोला रोड
होटल तेजस
होटल ट्रीट थाना चौक रामगढ़

रांची: झारखंड के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) के निदेशक डॉ. राजकुमार के इस्तीफे ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। एक ओर जहां भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इसे राज्य सरकार और स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली का परिणाम बताते हुए सरकार पर गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और कांग्रेस ने विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि इस्तीफा डॉ. राजकुमार का व्यक्तिगत निर्णय था।

डॉ. राजकुमार का इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब रिम्स में कथित एमबीबीएस प्रवेश अनियमितताओं और सैनिटेशन टेंडर आवंटन को लेकर सीआईडी जांच चल रही है। जांच के दौरान सीआईडी ने रिम्स में दस्तावेज जब्त किए और कई अधिकारियों से पूछताछ भी की। इस्तीफे के बाद सरकार ने डॉ. दीपेंद्र कुमार सिन्हा को कार्यवाहक निदेशक की जिम्मेदारी सौंपी है।

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Cambrian public school
RKDF University
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Vedanta iron steel
आशुतोष सिंह कुज्जू थाना प्रभारी
झारखंड हॉस्पिटल
डीड राइटर रामगढ़
डॉ इरफान अंसारी
थेरेपी वर्ल्ड स्पा
बागड़िया ब्रदर श्याम कंपलेक्स
प्रो केयर डेंटल क्लिनिक
पॉली डॉग हॉस्पिटल रांची
न्यू रामगढ़ टेंट हाउस
निवेदक श्री सदानंद कुमार
निवेदक नवीन प्रकाश पांडे थाना प्रभारी रामगढ़ थाना

क्या है पूरा मामला?
सीआईडी ने हाल ही में रिम्स में दो अलग-अलग मामलों की जांच शुरू की है। पहला मामला वर्ष 2025 के एमबीबीएस और बीडीएस दाखिलों में कथित फर्जी दस्तावेजों के आधार पर प्रवेश से जुड़ा है। दूसरा मामला सैनिटेशन सेवाओं के टेंडर में कथित अनियमितताओं का है। जांच के दौरान सीआईडी अधिकारियों ने रिम्स प्रशासन से कई महत्वपूर्ण दस्तावेज अपने कब्जे में लिए और संबंधित अधिकारियों से पूछताछ की। इन्हीं घटनाक्रमों के बीच डॉ. राजकुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया, जिसके बाद पूरे मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ लिया।

सेंट्रल हार्डवेयर
सतीश गुप्ता
श्री शंकर मिश्रा
श्री पंकज कुशवाहा
श्री कृष्ण विद्या मंदिर
श्री आजाद सिंह

बीजेपी का हमला- इस्तीफा स्वास्थ्य मंत्री को देना चाहिए था
बीजेपी प्रवक्ता रविनाथ किशोर ने कहा कि इस्तीफा रिम्स निदेशक का नहीं बल्कि स्वास्थ्य मंत्री का होना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों द्वारा लगातार रिम्स निदेशक पर दबाव बनाया जा रहा था और उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा था। बीजेपी का दावा है कि सीआईडी जांच केवल एक औपचारिक कारण था, जबकि वास्तविकता यह है कि विभागीय दबाव और सरकार के रवैये से परेशान होकर डॉ. राजकुमार ने पद छोड़ने का फैसला लिया।

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रविनाथ किशोर ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में पारदर्शिता चाहती थी तो पहले स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली की समीक्षा करनी चाहिए थी।

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झामुमो का जवाब- यह पूरी तरह व्यक्तिगत फैसला
बीजेपी के आरोपों पर पलटवार करते हुए झामुमो के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडे ने कहा कि डॉ. राजकुमार का इस्तीफा उनका निजी निर्णय है। उन्होंने साफ किया कि सरकार ने किसी भी स्तर पर उन पर इस्तीफा देने का दबाव नहीं बनाया। उन्होंने कहा कि यदि किसी संस्था या अधिकारी के खिलाफ शिकायत आती है तो उसकी जांच होना सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया है। जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है।

मनोज पांडे ने कहा कि यदि डॉ. राजकुमार को लगता था कि उन्होंने कोई गलती नहीं की है तो उन्हें जांच का सामना करना चाहिए था। जांच पूरी होने के बाद ही किसी प्रकार की कार्रवाई होती।

कांग्रेस ने कहा- सरकार जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करती है
प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग के प्रभारी राकेश सिन्हा ने भी बीजेपी के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि महागठबंधन सरकार भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम करती है। उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिकारी के खिलाफ शिकायत मिलती है तो उसकी जांच कराना सरकार का दायित्व है। यदि जांच के दौरान कोई अधिकारी स्वयं इस्तीफा देता है तो इसे सरकार की प्रताड़ना नहीं कहा जा सकता।

कांग्रेस का कहना है कि कानून के अनुसार जांच आगे बढ़ रही है और दोषी पाए जाने पर ही किसी के खिलाफ कार्रवाई होगी।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर फिर उठे सवाल
रिम्स झारखंड का सबसे बड़ा सरकारी मेडिकल संस्थान है, जहां हर दिन हजारों मरीज इलाज के लिए पहुंचते हैं। ऐसे संस्थान के निदेशक के इस्तीफे और उसके पीछे चल रही जांच ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी कई सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि कथित अनियमितताओं में किस स्तर तक जिम्मेदारी तय होती है। वहीं राजनीतिक दल इस मुद्दे को अपने-अपने तरीके से जनता के बीच रखने में जुट गए हैं।

आगे क्या?
फिलहाल सीआईडी की जांच जारी है और सरकार ने अंतरिम व्यवस्था के तहत नए कार्यवाहक निदेशक की नियुक्ति कर दी है।अब सभी की नजर जांच रिपोर्ट पर टिकी है। यदि जांच में अनियमितताओं की पुष्टि होती है तो आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े प्रशासनिक तथा कानूनी कदम उठाए जा सकते हैं। दूसरी ओर, बीजेपी इस मुद्दे को सरकार की जवाबदेही से जोड़कर लगातार हमलावर है, जबकि सत्ता पक्ष इसे सामान्य प्रशासनिक प्रक्रिया और व्यक्तिगत निर्णय बता रहा है। ऐसे में रिम्स निदेशक का इस्तीफा अब केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि झारखंड की राजनीति का भी बड़ा मुद्दा बन गया है।

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