परिमल नाथवाणी का झारखंड से जुड़ाव: 2008 से कर्मभूमि, इस्लामनगर की खास यादें

Jharkhand Political Journey
dipika pandey sing
दीपक कुमार थाना प्रभारी रामगढ़ घाटों
द हॉप मल्टीस्पेशलिस्ट हॉस्पिटल रांची रोड मरार रामगढ़
बिहार फाऊंडरी एंड कास्टिंग लिमिटेड इंडस्ट्रीज एरिया मरार रामगढ़
मां तारा सेवा समिति
मां सेवा यतन हॉस्पिटल
रजरप्पा थाना प्रभारी श्री कृष्ण कुमार
रमेश रविदास
रमेश सिंह
राधा गोविंद यूनिवर्सिटी लाल की घाटी रामगढ़
रोटरी रामगढ़ सिटी के पूर्व अध्यक्ष श्री आदर्श चौधरी
रोटेरियन हरीश चौधरी
होटल सम्राट गोला रोड
होटल तेजस
होटल ट्रीट थाना चौक रामगढ़

रांची: राज्यसभा सांसद परिमल नथवाणी ने बताया कि वर्ष 2008 मेरे सार्वजनिक और राजनीतिक जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा। पहली बार राज्यसभा चुनाव जीतने के बाद झारखंड से मेरा रिश्ता केवल राजनीतिक जिम्मेदारी तक सीमित नहीं रहा। उन्हीं दिनों यह एहसास मजबूत होने लगा कि झारखंड अब मेरी कर्मभूमि है। झारखंड के लोगों के साथ संवाद, उनकी समस्याओं को समझना और अपनी क्षमता के अनुसार उनके लिए काम करने की कोशिश इसी भावना का हिस्सा रही।

इस्लामनगर से शुरू हुआ एक खास जुड़ाव
उन्हीं दिनों इस्लामनगर के लोगों के साथ भी मेरा जुड़ाव मजबूत हुआ। वहां के लोगों के लिए अपनी प्रतिबद्धता के तहत जो कुछ भी संभव हुआ, उसे करने का प्रयास किया। भले ही किए गए प्रयास छोटे रहे हों, लेकिन उनके पीछे की भावना और लोगों के साथ बना संबंध मेरे लिए हमेशा महत्वपूर्ण रहा है।

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Cambrian public school
RKDF University
Sarla Birla school
Vedanta iron steel
आशुतोष सिंह कुज्जू थाना प्रभारी
झारखंड हॉस्पिटल
डीड राइटर रामगढ़
डॉ इरफान अंसारी
थेरेपी वर्ल्ड स्पा
बागड़िया ब्रदर श्याम कंपलेक्स
प्रो केयर डेंटल क्लिनिक
पॉली डॉग हॉस्पिटल रांची
न्यू रामगढ़ टेंट हाउस
निवेदक श्री सदानंद कुमार
निवेदक नवीन प्रकाश पांडे थाना प्रभारी रामगढ़ थाना

लोगों का विश्वास बना सबसे बड़ी ताकत
राजनीति में पद और जिम्मेदारियां बदलती रहती हैं, लेकिन लोगों के साथ बना विश्वास लंबे समय तक कायम रहता है। इस्लामनगर के लोगों के साथ बिताए समय और उनके लिए किए गए प्रयासों ने झारखंड के प्रति मेरे जुड़ाव को और मजबूत किया। यही वजह है कि आज भी उन दिनों की तस्वीरें और वीडियो सामने आते हैं तो पुरानी यादें ताजा हो जाती हैं।

सेंट्रल हार्डवेयर
सतीश गुप्ता
श्री शंकर मिश्रा
श्री पंकज कुशवाहा
श्री कृष्ण विद्या मंदिर
श्री आजाद सिंह

वीडियो में उस दौर की खास झलक
प्रस्तुत वीडियो उसी दौर की कुछ यादों को सामने लाता है। इसमें इस्लामनगर के लोगों के साथ जुड़ाव और उस समय किए गए प्रयासों की एक झलक देखने को मिलती है। यह सिर्फ एक पुराना वीडियो नहीं, बल्कि झारखंड को कर्मभूमि मानने की उस भावना की याद है, जो 2008 के बाद लगातार मजबूत होती गई।

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झारखंड से रिश्ता सिर्फ राजनीति का नहीं
झारखंड से जुड़ाव को केवल राजनीतिक सफर के रूप में देखना अधूरा होगा। यहां के लोगों का अपनापन, विश्वास और स्नेह इस रिश्ते की सबसे बड़ी वजह रहा है। इस्लामनगर की ये यादें उसी लंबे सफर का एक हिस्सा हैं, जहां लोगों के साथ जुड़ाव ने झारखंड को कर्मभूमि मानने के भाव को और सार्थक बनाया

एक वीडियो, कई यादें
वर्ष 2008 से शुरू हुआ यह सफर आज भी उन रिश्तों और यादों के साथ आगे बढ़ रहा है। इस्लामनगर के लोगों के लिए किए गए प्रयासों की यह झलक उस समय की प्रतिबद्धता को याद करने का एक अवसर है। झारखंड मेरी कर्मभूमि है और इस्लामनगर से जुड़ी ये यादें उस रिश्ते की एक खास कहानी हैं।

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