ट्रम्प का तेल कंपनियों पर बड़ा हमला, बोले- कच्चा तेल सस्ता हो गया, अब तुरंत घटाएं पेट्रोल के दाम

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वॉशिंगटन: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पेट्रोल की कीमतों को लेकर तेल कंपनियों पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में गिरावट आ चुकी है, इसके बावजूद पेट्रोल बेचने वाली कंपनियां ग्राहकों से अब भी अधिक कीमत वसूल रही हैं। ट्रम्प ने कंपनियों से तत्काल पेट्रोल की कीमतों में कटौती करने की मांग करते हुए कहा कि अब उपभोक्ताओं को राहत देने का समय आ गया है।

“अब ग्राहकों को राहत मिलनी चाहिए”
अपने बयान में ट्रम्प ने कहा कि जब कच्चे तेल की कीमतें कम हो गई हैं, तो इसका फायदा सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि तेल कंपनियां कीमतें कम करने में देरी कर रही हैं और इससे आम लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है।

ट्रम्प ने कहा कि ईंधन कंपनियों को तुरंत पेट्रोल के दाम घटाने चाहिए।

कच्चे तेल की कीमतों में आई है गिरावट
हाल के दिनों में वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखने को मिला है। कई अंतरराष्ट्रीय कारणों से कीमतों में कमी आई है। ऐसे में उम्मीद की जा रही थी कि पेट्रोल और अन्य ईंधनों की खुदरा कीमतों पर भी इसका असर दिखाई देगा। इसी मुद्दे को लेकर ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से तेल कंपनियों से सवाल उठाए हैं।

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तेल कंपनियों पर बढ़ सकता है दबाव
विश्लेषकों का मानना है कि ट्रम्प के इस बयान के बाद अमेरिका में तेल कंपनियों पर पेट्रोल की कीमतों में कटौती का दबाव बढ़ सकता है। हालांकि, कंपनियां खुदरा कीमतें तय करते समय कच्चे तेल के अलावा रिफाइनिंग लागत, परिवहन, कर और अन्य खर्चों को भी ध्यान में रखती हैं। इसलिए कीमतों में संभावित बदलाव का फैसला संबंधित कंपनियां और बाजार परिस्थितियां तय करेंगी।

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वैश्विक बाजार पर रहेगी नजर
ऊर्जा क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक मांग-आपूर्ति की स्थिति के आधार पर पेट्रोल की कीमतों में बदलाव देखने को मिल सकता है।

डोनाल्ड ट्रम्प के बयान ने एक बार फिर पेट्रोल की कीमतों और तेल कंपनियों की मूल्य निर्धारण नीति को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। ट्रम्प का कहना है कि जब कच्चा तेल सस्ता हो चुका है, तो उसका लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचना चाहिए। अब बाजार की नजर इस बात पर रहेगी कि तेल कंपनियां इस मांग पर क्या प्रतिक्रिया देती हैं।

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