झारखंड हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, पेंशन में जुड़ेगी पारा शिक्षक की सेवा अवधि; 2500 से ज्यादा शिक्षकों को मिलेगा लाभ

Para-teacher pension

रांची: झारखंड हाई कोर्ट ने राज्य के पारा शिक्षकों और सेवानिवृत्त शिक्षकों के हित में एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि जिन शिक्षकों ने पहले पारा शिक्षक के रूप में सेवा दी और बाद में नियमित इंटरमीडिएट प्रशिक्षित शिक्षक के रूप में नियुक्त हुए, उनकी पेंशन की गणना करते समय पारा शिक्षक के रूप में दी गई सेवा अवधि को भी जोड़ा जाएगा। इस फैसले से न केवल याचिकाकर्ताओं को राहत मिलेगी, बल्कि भविष्य में नियमित होकर सेवानिवृत्त होने वाले करीब 2,500 पारा शिक्षकों को भी इसका लाभ मिलने की उम्मीद है।

हाई कोर्ट ने क्या कहा?
जस्टिस दीपक रोशन की एकल पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि यदि राज्य सरकार ने नियमित शिक्षक की नियुक्ति के लिए पारा शिक्षक के रूप में अर्जित अनुभव को पात्रता का आधार माना है, तो उसी सेवा अवधि को पेंशन निर्धारण के समय नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सेवा के एक हिस्से को नियुक्ति के लिए मान्य मानना और पेंशन के समय उसे अस्वीकार करना न्यायसंगत नहीं है।

ccl.psd
Cambrian public school
RKDF University
Sarla Birla school

पांच सेवानिवृत्त शिक्षकों ने दायर की थी याचिका
यह मामला धनबाद, गिरिडीह, रामगढ़ और पाकुड़ जिले के पांच सेवानिवृत्त शिक्षकों द्वारा दायर याचिका से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं ने हाई कोर्ट से आग्रह किया था कि उनकी पारा शिक्षक के रूप में दी गई सेवा को भी पेंशन के लिए मान्य माना जाए। याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता मनोज टंडन और सिद्धार्थ रंजन ने अदालत में पक्ष रखते हुए बताया कि सभी शिक्षकों ने नियमित नियुक्ति से पहले 8 से 12 वर्षों तक पारा शिक्षक के रूप में कार्य किया था।

Vedanta iron steel
dipika pandey sing
15 Aug 2026 poat Ads Ramgarh
रमेश सिंह
Dulari Son

10 वर्ष की शर्त बनी थी बाधा
अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि चयन प्रक्रिया पूरी करने के बाद ये सभी शिक्षक नियमित इंटरमीडिएट प्रशिक्षित शिक्षक बने, लेकिन नियमित सेवा के दौरान पेंशन के लिए आवश्यक 10 वर्ष की सेवा अवधि से कुछ दिन या कुछ महीने कम रह जाने के कारण उन्हें पेंशन का लाभ नहीं मिल रहा था। ऐसी स्थिति में शिक्षकों की लंबी सेवा के बावजूद वे सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन से वंचित रह गए थे।

munadi live whattsapp banne.jpg

हजारों शिक्षकों को मिलेगा लाभ
हाई कोर्ट के इस फैसले का प्रभाव केवल पांच याचिकाकर्ताओं तक सीमित नहीं रहेगा। शिक्षा विभाग से जुड़े जानकारों का मानना है कि राज्य में वर्तमान में कार्यरत ऐसे करीब 2,500 पारा शिक्षक, जो भविष्य में नियमित नियुक्ति के बाद सेवानिवृत्त होंगे, उन्हें भी इस निर्णय का सीधा लाभ मिल सकता है। यदि सरकार अदालत के आदेश के अनुरूप कार्रवाई करती है, तो इन शिक्षकों की पेंशन पात्रता तय करने में पारा शिक्षक के रूप में दी गई सेवा अवधि को भी शामिल किया जाएगा।

resizone elanza

Telegram channel

शिक्षा जगत में फैसले का स्वागत
हाई कोर्ट के इस फैसले को पारा शिक्षकों के लंबे समय से चले आ रहे संघर्ष की बड़ी सफलता माना जा रहा है। वर्षों से शिक्षक संगठन यह मांग उठाते रहे हैं कि नियमित नियुक्ति से पहले दी गई सेवा को भी पेंशन और अन्य सेवानिवृत्ति लाभों में शामिल किया जाए। अदालत के इस निर्णय के बाद बड़ी संख्या में शिक्षकों को आर्थिक सुरक्षा मिलने का रास्ता साफ होता दिखाई दे रहा है। अब सभी की नजर राज्य सरकार पर है कि वह हाई कोर्ट के आदेश के अनुरूप आवश्यक प्रशासनिक कार्रवाई कब तक पूरी करती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *