क्या TMC में होने वाली है बड़ी बगावत? बागी सांसदों का चुनाव आयोग पहुंचना ममता बनर्जी के लिए खतरे की घंटी!

TMC Rebel Group

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की सियासत में एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) में कथित अंदरूनी खींचतान के बीच पार्टी के एक बागी गुट ने चुनाव आयोग का दरवाजा खटखटाया है। बागी नेताओं का दावा है कि उन्हें पार्टी के दो-तिहाई विधायकों का समर्थन प्राप्त है। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। सूत्रों के अनुसार, बागी गुट ने चुनाव आयोग के समक्ष अपना पक्ष रखते हुए कहा है कि पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर असंतोष बढ़ रहा है। इसी आधार पर उन्होंने संगठन और चुनाव चिह्न से जुड़े अपने दावों पर आयोग से विचार करने का अनुरोध किया है।

दो-तिहाई विधायकों के समर्थन का दावा
बागी गुट का कहना है कि उनके साथ पार्टी के दो-तिहाई विधायक हैं। यदि यह दावा सही साबित होता है, तो इसका असर पार्टी के संगठनात्मक ढांचे और भविष्य की राजनीतिक रणनीति पर पड़ सकता है। हालांकि, अब तक TMC की ओर से इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।

चुनाव आयोग करेगा दावों की जांच
चुनाव आयोग के समक्ष किसी भी राजनीतिक दल से जुड़े विवाद की स्थिति में संबंधित पक्षों द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों, विधायकों और सांसदों के समर्थन, पार्टी के संविधान तथा अन्य कानूनी पहलुओं की जांच की जाती है। इसके बाद ही आयोग किसी निष्कर्ष पर पहुंचता है। ऐसे मामलों में केवल किसी गुट का दावा ही अंतिम आधार नहीं होता, बल्कि उपलब्ध साक्ष्यों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर फैसला लिया जाता है।

TMC की प्रतिक्रिया का इंतजार
इस घटनाक्रम के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि, समाचार लिखे जाने तक मुख्यमंत्री ममता बनर्जी या तृणमूल कांग्रेस की ओर से इस कथित दावे पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया था। यदि पार्टी की ओर से प्रतिक्रिया आती है या चुनाव आयोग इस मामले में कोई आधिकारिक निर्णय लेता है, तो तस्वीर और स्पष्ट होगी।

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आयोग के फैसले पर टिकी निगाहें
फिलहाल यह मामला राजनीतिक दावों और कानूनी प्रक्रिया के शुरुआती चरण में है। ऐसे में सभी की नजर चुनाव आयोग की आगामी कार्रवाई और दोनों पक्षों द्वारा पेश किए जाने वाले दस्तावेजों पर टिकी हुई है। आयोग की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बागी गुट का दावा कितना मजबूत है और आगे इस मामले में क्या निर्णय लिया जाता है।

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