विकेन्द्रित उत्पादन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलती है मजबूती” — कल्पना सोरेन
लिज्जत पापड़ और मुंबई डब्बावाला मॉडल से प्रेरित होकर विधायक ने महिला सशक्तिकरण और कुटीर उद्योगों पर दिया जोर
रांची: Kalpana Soren ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए विकेन्द्रित उत्पादन प्रणाली और कुटीर उद्योगों को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक विचारोत्तेजक पोस्ट साझा करते हुए “संघे शक्ति कलियुगे” की अवधारणा को रेखांकित किया। उन्होंने अपने संदेश में Shri Mahila Griha Udyog Lijjat Papad का उदाहरण देते हुए इसे महिलाओं की सामूहिक शक्ति, आत्मविश्वास और सहयोग का जीवंत प्रतीक बताया।
मुंबई डब्बावाला मॉडल से हुईं प्रभावित
कल्पना सोरेन ने बताया कि झारखंड विधानसभा की महिला एवं बाल विकास समिति के महाराष्ट्र एक्सपोजर विजिट के दौरान उन्हें मुंबई स्थित डब्बावाला इंटरनेशनल एक्सपीरियंस सेंटर जाने का अवसर मिला। उन्होंने कहा कि लगभग 135 वर्षों से अनुशासन, समयबद्धता और सेवा के लिए विश्वभर में पहचान बना चुके मुंबई डब्बावालों की कार्यप्रणाली बेहद प्रेरणादायक है।
महिला सशक्तिकरण का मजबूत मॉडल
विधायक ने कहा कि लिज्जत पापड़ केवल एक उद्योग नहीं, बल्कि महिला सशक्तिकरण का बड़ा आंदोलन है, जिसने लाखों महिलाओं को आत्मनिर्भरता और सम्मानजनक आजीविका से जोड़ा है। उन्होंने कहा कि ऐसे सहकारी मॉडल समाज में आर्थिक और सामाजिक बदलाव लाने की बड़ी क्षमता रखते हैं।
“डिस्ट्रिब्यूटेड प्रोडक्शन” मॉडल की सराहना
कल्पना सोरेन ने “डिस्ट्रिब्यूटेड प्रोडक्शन” यानी विकेन्द्रित उत्पादन प्रणाली को ग्रामीण विकास के लिए बेहद प्रभावी बताया। उनके अनुसार, यह मॉडल महिलाओं को अपने घर या स्थानीय स्तर पर रहकर काम करने की सुविधा देता है, जिससे वे पारिवारिक जिम्मेदारियों के साथ आर्थिक रूप से भी सशक्त बन पाती हैं।
उन्होंने कहा कि इससे स्थानीय संसाधनों और पारंपरिक कौशल को भी बढ़ावा मिलता है।
अन्य क्षेत्रों में भी लागू करने की मांग
विधायक ने सुझाव दिया कि लिज्जत पापड़ जैसे सफल मॉडलों को हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण और लघु उद्योग जैसे क्षेत्रों में भी लागू किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में महिलाओं को आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से मजबूत बनाया जा सकता है।
सरकार और निजी क्षेत्र से अपील
कल्पना सोरेन ने सरकार, स्वयंसेवी संस्थाओं और निजी क्षेत्र से समन्वित प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यदि सभी मिलकर कार्य करें तो ग्रामीण परिवारों को स्थायी और सम्मानजनक आजीविका उपलब्ध कराई जा सकती है।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ संदेश
विधायक का यह संदेश सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। महिला सशक्तिकरण, कुटीर उद्योग और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को लेकर उनके विचारों की व्यापक चर्चा हो रही है। गौरतलब है कि Kalpana Soren वर्तमान में झारखंड विधानसभा की महिला एवं बाल विकास समिति की सभापति भी हैं।






