JSSC CGL समेत CDPO, FRO और FSO परीक्षा रद्द करने के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक, 15 सितंबर को अगली सुनवाई
रांची: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच JSSC CGL, CDPO, FRO और FSO परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर झारखंड हाईकोर्ट में महत्वपूर्ण सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने सरकार के फैसले पर फिलहाल रोक लगा दी और राज्य सरकार को मामले में अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि इस मामले में भी पहले पारित आदेश ही लागू होगा। अब मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को निर्धारित की गई है। हाईकोर्ट के इस आदेश के बाद इन परीक्षाओं से जुड़े अभ्यर्थियों और नियुक्त उम्मीदवारों को फिलहाल बड़ी राहत मिली है।
सरकार के फैसले पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक
राज्य सरकार की ओर से इन परीक्षाओं को रद्द किए जाने के बाद प्रभावित अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। गुरुवार को हुई सुनवाई में अदालत ने मामले की सुनवाई करते हुए सरकार के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी। अदालत ने राज्य सरकार को अपना पक्ष और संबंधित रिकॉर्ड पेश करने का निर्देश दिया है। अब सरकार को यह स्पष्ट करना होगा कि संबंधित परीक्षाओं को रद्द करने का आधार क्या है और जांच में सामने आए तथ्यों का इन परीक्षाओं तथा नियुक्तियों पर क्या प्रभाव पड़ा है।
15 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 15 सितंबर की तारीख तय की है। तब तक सरकार को अपना जवाब दाखिल करना होगा। अदालत के इस आदेश के बाद फिलहाल नियुक्त अभ्यर्थियों पर तत्काल कार्रवाई का रास्ता रुक गया है। हालांकि, इसे अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता। मामले में आगे की सुनवाई और सरकार के जवाब के बाद ही अदालत इस विवाद पर आगे का निर्णय लेगी।
सुनवाई में कौन-कौन हुए शामिल?
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से एडवोकेट जनरल (महाधिवक्ता) ने सरकार का पक्ष रखा। वहीं, याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता इंद्रजीत सिन्हा, अमृतांश वत्स और अन्य अधिवक्ताओं ने अपना पक्ष रखा। मामले में इंटरवेनर की ओर से अधिवक्ता अपराजिता भारद्वाज अदालत में उपस्थित रहीं। इसके अलावा JSSC की ओर से अधिवक्ता संजय पिपरवाल ने आयोग का पक्ष रखा।
अभ्यर्थियों की नजर अब 15 सितंबर पर
JSSC और JPSC से जुड़ी भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की जांच के बीच सरकार ने कई परीक्षाओं को रद्द करने का निर्णय लिया था। इस फैसले का एक बड़ा असर उन अभ्यर्थियों पर पड़ा, जिन्होंने परीक्षा प्रक्रिया में सफलता हासिल करने के बाद नियुक्ति पाई या नियुक्ति की प्रक्रिया में आगे बढ़े थे। अब हाईकोर्ट की अंतरिम रोक के बाद प्रभावित अभ्यर्थियों को तत्काल राहत मिली है। हालांकि, पूरे मामले का अंतिम समाधान जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा। 15 सितंबर की सुनवाई इसलिए महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि उस समय सरकार की ओर से दाखिल जवाब और संबंधित दस्तावेजों के आधार पर अदालत मामले की अगली दिशा तय कर सकती है।




