4 दिन सड़क पर संघर्ष, फिर हाईकोर्ट से राहत! JSSC CGL अभ्यर्थियों ने चूमा जमीन, गाया राष्ट्रगान
रांची: JSSC CGL समेत कई भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले के बीच चयनित अभ्यर्थियों को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC CGL और संबंधित नियुक्तियों को रद्द करने के फैसले पर रोक लगा दी है। अदालत के आदेश के बाद पिछले चार दिनों से प्रोजेक्ट भवन के बाहर अपनी सेवा सुरक्षा की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों में खुशी की लहर दौड़ गई। अदालत के फैसले के बाद प्रोजेक्ट भवन के बाहर का माहौल अचानक बदल गया। लंबे समय से नौकरी बचाने की मांग को लेकर धरने पर बैठे कई नवनियुक्त कर्मी भावुक हो गए। अभ्यर्थियों ने जमीन को चूमकर न्यायपालिका के प्रति आभार जताया। इसके बाद सभी ने एक साथ राष्ट्रगान गाया और एक-दूसरे को गले लगाकर खुशी साझा की।
चार दिन से सड़क पर था प्रदर्शन
JSSC CGL के जरिए चयनित अभ्यर्थी पिछले कई दिनों से प्रोजेक्ट भवन के मुख्य द्वार के सामने प्रदर्शन कर रहे थे। कई अभ्यर्थियों ने रात भी सड़क पर बिताई थी। उनका कहना था कि उन्होंने प्रतियोगी परीक्षा में सफलता हासिल करने के बाद निर्धारित प्रक्रिया के तहत नियुक्ति पाई है और विभिन्न विभागों में अपनी जिम्मेदारी निभा रहे हैं। सरकार के फैसले के बाद इन अभ्यर्थियों के सामने सेवा समाप्त होने का खतरा पैदा हो गया था। इसी को लेकर वे लगातार सरकार से अपने भविष्य को सुरक्षित रखने की मांग कर रहे थे। अब हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश के बाद प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों को तत्काल राहत मिली है।
‘मेहनत और न्याय की जीत’
अभ्यर्थियों ने अदालत के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी मेहनत और योग्यता के आधार पर परीक्षा पास की थी। उनका कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में यदि किसी स्तर पर अनियमितता की जांच हो रही है तो दोषियों की पहचान कर कार्रवाई की जानी चाहिए, लेकिन सभी चयनित अभ्यर्थियों को एक साथ प्रभावित नहीं किया जाना चाहिए। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि हाईकोर्ट के आदेश से उनके परिवारों और भविष्य को लेकर बनी अनिश्चितता फिलहाल कम हुई है। उन्होंने न्यायपालिका के प्रति भरोसा जताते हुए कहा कि आगे की कानूनी प्रक्रिया में भी उन्हें न्याय मिलने की उम्मीद है।
सरकार के फैसले के बाद शुरू हुआ था विवाद
दरअसल, राज्य सरकार ने 18 अगस्त की देर रात जारी अधिसूचना के जरिए भर्ती परीक्षाओं को लेकर बड़ा फैसला लिया था। सरकार की ओर से 22 परीक्षाओं को रद्द करने, छह परीक्षाओं की प्रक्रिया स्थगित करने और 17 परीक्षाओं में संभावित अनियमितताओं की जांच कराने की बात कही गई थी। सरकार का पक्ष रहा है कि भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया में सामने आए तथ्यों और जांच के आधार पर व्यापक स्तर पर सुधारात्मक कदम जरूरी हैं। वहीं, नियुक्त अभ्यर्थियों का तर्क है कि पूरी भर्ती प्रक्रिया को प्रभावित करने से पहले उन अभ्यर्थियों की व्यक्तिगत भूमिका और वास्तविक स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए, जिन्होंने अपनी योग्यता के आधार पर परीक्षा पास की है। इसी विवाद के बीच मामला झारखंड हाईकोर्ट पहुंचा।
अब 15 सितंबर को होगी अगली सुनवाई
हाईकोर्ट के आदेश के बाद फिलहाल चयनित अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है। हालांकि, यह मामला अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। अदालत ने मामले में राज्य सरकार समेत संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है और अगली सुनवाई के लिए 15 सितंबर की तारीख तय की है। यानी आने वाले दिनों में सरकार की ओर से अदालत के सामने जांच, भर्ती प्रक्रिया और नियुक्तियों को रद्द करने के आधार से जुड़े तथ्य रखे जाएंगे। इसके बाद मामले की आगे की दिशा तय होगी।
फिलहाल प्रोजेक्ट भवन के बाहर प्रदर्शन कर रहे अभ्यर्थियों के लिए हाईकोर्ट का आदेश बड़ी राहत लेकर आया है। जिन चेहरों पर पिछले चार दिनों से चिंता और अनिश्चितता नजर आ रही थी, वहां अब खुशी दिखाई दे रही है। राष्ट्रगान के साथ अभ्यर्थियों ने यह संदेश भी दिया कि वे अपनी नियुक्ति और भविष्य को लेकर कानूनी लड़ाई जारी रखने के लिए तैयार हैं।





