सखी मंडल की बहनों की राखियों को खरीदें, हुनर और आत्मनिर्भरता को दें सम्मान
रक्षाबंधन पर राज्यवासियों से अपील- आपकी एक राखी की खरीद किसी बहन के हुनर और आत्मविश्वास को देगी मजबूती
रांची: रक्षाबंधन के पर्व को लेकर झारखंड की सखी मंडल की महिलाओं ने इस बार भी अपनी मेहनत, हुनर और स्नेह से खूबसूरत राखियां तैयार की हैं। राज्यवासियों से इन राखियों की खरीदारी करने की अपील की गई है, ताकि महिलाओं के हुनर और स्वावलंबन को बढ़ावा मिल सके। अपील में कहा गया है कि हर वर्ष की तरह इस बार भी सखी मंडल की माताओं-बहनों ने अपने हाथों से राखियां तैयार की हैं। इन राखियों में उनकी मेहनत के साथ-साथ आत्मनिर्भर बनने की कोशिश और अपने परिवार को आर्थिक रूप से मजबूत करने का संकल्प भी जुड़ा है।
एक राखी की खरीद, बहन के हुनर का सम्मान
राज्यवासियों से आग्रह किया गया है कि इस रक्षाबंधन बाजार में उपलब्ध सखी मंडल की महिलाओं द्वारा तैयार राखियों को प्राथमिकता दें। कहा गया कि आपकी खरीदी केवल एक राखी खरीदना नहीं है, बल्कि किसी महिला की मेहनत, हुनर और आत्मविश्वास को सम्मान देना भी है। महिलाओं द्वारा तैयार की गई इन राखियों के जरिए उन्हें स्वरोजगार और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर मिलता है। ऐसे में त्योहार के साथ महिलाओं के सशक्तीकरण से जुड़ने का यह एक महत्वपूर्ण माध्यम भी बन सकता है।
मेहनत और स्वावलंबन को मिलेगी मजबूती
सखी मंडल से जुड़ी महिलाओं की ओर से तैयार राखियां स्थानीय हुनर और ग्रामीण महिला उद्यमिता को बढ़ावा देने का माध्यम बन रही हैं। इनकी खरीदारी से महिलाओं को अपने उत्पादों के लिए बाजार मिलता है और उनकी मेहनत को आर्थिक मूल्य भी प्राप्त होता है। अपील में कहा गया है कि रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का त्योहार है। ऐसे में यदि इस पर्व पर खरीदी गई राखी किसी बहन के आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता को भी मजबूत करे, तो त्योहार की खुशी और बढ़ जाती है।

राज्यवासियों से की गई खास अपील
राज्यवासियों से अपील की गई है कि वे इस रक्षाबंधन सखी मंडल की बहनों द्वारा तैयार राखियों की खरीदारी करें और उनके हुनर को अपना समर्थन दें। “आपकी खरीदी सिर्फ एक राखी नहीं, किसी बहन की मेहनत, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता का सम्मान है।” इस पहल का उद्देश्य त्योहार की खुशियों को महिला सशक्तीकरण और स्वावलंबन से जोड़ना है, ताकि सखी मंडल की महिलाएं अपने हुनर के दम पर आगे बढ़ सकें और आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ा सकें।



