JSSC CGL जांच में नया मोड़: तीनों से रिमांड पर पूछताछ, 18 लोगों तक पहुंची CID की पड़ताल
भाई और पत्नी की गिरफ्तारी के बाद बढ़ा जांच का दायरा
अब किस दिशा में जाएगी CID की जांच?
रांची: झारखंड में JSSC CGL परीक्षा को लेकर चल रहा विवाद अब जांच के अहम चरण में पहुंच गया है। परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही CID की SIT ने मामले से जुड़े अभय कुमार तिवारी, अक्षय कुमार तिवारी और सुषमा कुमारी को रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। जांच एजेंसी अब इन तीनों से मिली जानकारी को पहले पूछताछ किए गए लोगों के बयानों और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े दस्तावेजों के साथ जोड़कर कथित अनियमितता की पूरी कड़ी तलाश रही है। CID की पड़ताल का दायरा अब 18 संदिग्धों और मामले से जुड़े लोगों तक पहुंचने की जानकारी सामने आई है। इन लोगों को नोटिस जारी कर पूछताछ की गई है। हालांकि, जांच एजेंसी ने सभी नाम और पूछताछ में सामने आई पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की है।
तीनों आरोपियों से रिमांड में पूछताछ
SIT के लिए अभय कुमार तिवारी को मामले की महत्वपूर्ण कड़ी माना जा रहा है। CID ने उसे 22 जुलाई को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के समय वह गोड्डा जिले के पोड़ैयाहाट में ब्लॉक सप्लाई ऑफिसर के पद पर कार्यरत था। जांच में सामने आया कि इससे पहले अभय तिवारी परीक्षा संचालन से जुड़ी निजी एजेंसी TDPL में मार्केटिंग मैनेजर के तौर पर काम कर चुका था। यही वजह है कि SIT उसके पुराने कार्य अनुभव, परीक्षा संचालन से जुड़ी जानकारी और कथित संपर्कों की पड़ताल कर रही है। जांच एजेंसी उसके पुराने परीक्षा रिकॉर्ड को भी खंगाल रही है। अधिकारियों के अनुसार, करीब 13 वर्षों के दौरान अभय तिवारी ने लगभग 12 प्रतियोगी परीक्षाएं पास की थीं। पूछताछ के दौरान अभ्यर्थियों को कथित तौर पर परीक्षा में सफल कराने के लिए रकम से जुड़ी जानकारी सामने आने की बात कही गई है। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि और कानूनी निष्कर्ष अभी बाकी है।
भाई और पत्नी की गिरफ्तारी के बाद बढ़ा जांच का दायरा
मामले में जांच का दायरा उस समय और बढ़ गया जब अभय तिवारी के भाई अक्षय कुमार तिवारी और पत्नी सुषमा कुमारी को 18 अगस्त को गिरफ्तार किया गया। दोनों के JSSC CGL परीक्षा में सफल होने की जानकारी सामने आने के बाद SIT उनके चयन और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े पहलुओं की भी जांच कर रही है। अब तीनों को रिमांड पर लेकर पूछताछ के दौरान जांच एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उनके बीच परीक्षा से संबंधित कोई ऐसी जानकारी, संपर्क या गतिविधि थी या नहीं, जिसका कथित अनियमितता से संबंध हो सकता है।

18 लोगों से पूछताछ, बयानों का हो रहा मिलान
CID की जांच में अब तक 18 संदिग्धों और मामले से जुड़े लोगों को नोटिस जारी कर पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है। SIT अब इन पूछताछ से मिली जानकारी का मिलान रिमांड पर लिए गए तीनों लोगों के बयानों से कर रही है। जांच का मुख्य फोकस इस बात पर है कि कथित अनियमितता की शुरुआत किस स्तर पर हुई और यदि गड़बड़ी हुई तो उसमें कौन-कौन लोग शामिल थे। इसके अलावा परीक्षा से पहले, परीक्षा के दौरान और परिणाम एवं चयन प्रक्रिया के दौरान किसी तरह की अनधिकृत गतिविधि हुई थी या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है।
JSSC कार्यालय भी जांच के दायरे में
यह मामला केवल गिरफ्तार आरोपियों और अभ्यर्थियों तक सीमित नहीं है। CID ने JSSC कार्यालय में भी जांच की है। आयोग के सचिव सुधीर कुमार गुप्ता से पूछताछ किए जाने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा चयनित अभ्यर्थियों के दस्तावेज, परीक्षा से जुड़े रिकॉर्ड और परीक्षा संचालन की पूरी प्रक्रिया को भी जांच के दायरे में लिया गया है। SIT यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि परीक्षा आयोजित कराने वाली एजेंसी, आयोग से जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों, अभ्यर्थियों और परीक्षा प्रक्रिया के बीच किसी स्तर पर ऐसी खामी थी या नहीं, जिसका कथित रूप से दुरुपयोग किया जा सकता था।
अभय तिवारी का पुराना परीक्षा रिकॉर्ड भी जांच में अहम
करीब 13 वर्षों में कई प्रतियोगी परीक्षाएं पास करने का अभय तिवारी का रिकॉर्ड भी SIT की जांच में महत्वपूर्ण बिंदु बन गया है। जांच एजेंसी अब अलग-अलग परीक्षाओं में उसकी सफलता के पैटर्न और उसके पुराने संपर्कों की भी पड़ताल कर रही है। हालांकि, किसी व्यक्ति का कई प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होना अपने आप में किसी अनियमितता का प्रमाण नहीं है। जांच एजेंसी को यदि कोई आपराधिक कड़ी मिलती है, तभी उसकी भूमिका का कानूनी मूल्यांकन किया जाएगा।
सरकार के फैसले के बाद और बढ़ा विवाद
JSSC CGL विवाद के बीच झारखंड सरकार ने 18 अगस्त 2026 को कई भर्ती प्रक्रियाओं को रद्द करने तथा पुरानी परीक्षाओं की जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद चयनित अभ्यर्थियों में नाराजगी देखी गई, जबकि कथित गड़बड़ी की जांच और कार्रवाई की मांग कर रहे छात्र संगठनों की ओर से भी दबाव बना रहा। इस पूरे मामले ने झारखंड की भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता, परीक्षा संचालन की व्यवस्था और चयनित अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। एक तरफ जांच एजेंसी कथित अनियमितताओं की तह तक पहुंचने में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ परीक्षा में सफल अभ्यर्थी अपने चयन और भविष्य को लेकर चिंतित हैं।
अब किस दिशा में जाएगी CID की जांच?
फिलहाल SIT के सामने सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग स्तर से मिली सूचनाओं को जोड़कर पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने लाना है। एक ओर तीनों गिरफ्तार लोगों से रिमांड के दौरान पूछताछ जारी है। दूसरी ओर पहले पूछताछ किए गए 18 लोगों के बयान, दस्तावेज और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। आने वाले दिनों में रिमांड पूछताछ और दस्तावेजी जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि JSSC CGL में कथित अनियमितता का दायरा कितना बड़ा था और परीक्षा प्रक्रिया के किस स्तर पर सवाल उठते हैं।
JSSC CGL मामला क्यों अहम है?
JSSC CGL विवाद अब केवल एक भर्ती परीक्षा की कथित गड़बड़ी तक सीमित नहीं रह गया है। तीन गिरफ्तारियों, रिमांड पूछताछ, 18 लोगों से पूछताछ, JSSC कार्यालय में जांच और सरकार के भर्ती परीक्षाओं को लेकर लिए गए फैसलों ने इसे झारखंड की भर्ती व्यवस्था से जुड़ा बड़ा मुद्दा बना दिया है।
अब निगाहें CID की SIT की अगली कार्रवाई पर हैं। सवाल यही है—क्या रिमांड पूछताछ से परीक्षा में कथित अनियमितता की पूरी कड़ी सामने आएगी और जांच किस स्तर तक पहुंचेगी?








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