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अफीम तस्करी नेटवर्क का खुलासा: यूपी एसटीएफ के राडार पर रांची का सुदेश यादव

Opium Trafficking

दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और यूपी में सप्लाई करने वाले तस्करों से जुड़े तार झारखंड के सुदेश यादव तक पहुंचे, छह आरोपी गिरफ्तार

लखनऊ/रांची: उत्तर प्रदेश स्पेशल टास्क फोर्स (यूपी एसटीएफ) ने एक अंतरराज्यीय अफीम तस्करी गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जिसमें झारखंड के रांची निवासी सुदेश यादव का नाम प्रमुख रूप से सामने आया है। एसटीएफ को मिली जानकारी के मुताबिक, सुदेश यादव नशीले पदार्थों का सप्लायर है, जो रांची से अफीम तस्करों को माल उपलब्ध कराता है। ये तस्कर फिर दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में इसकी सप्लाई करते हैं।

25 अक्टूबर की रात चली बड़ी कार्रवाई
यूपी एसटीएफ की इस कार्रवाई ने नशा तस्करी नेटवर्क की जड़ें हिला दी हैं। 25 अक्टूबर की देर रात एसटीएफ की टीम ने एक अंतरराज्यीय अफीम तस्कर गिरोह को धर दबोचा, जिसमें छह लोगों को गिरफ्तार किया गया। पकड़े गए आरोपियों के पास से 4.131 किलोग्राम अफीम बरामद की गई, जिसकी कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग 20 लाख रुपये आंकी गई है।

एसटीएफ ने बताया कि पूछताछ में गिरफ्तार तस्करों ने स्वीकार किया कि उन्हें यह अफीम रांची के सुदेश यादव से मिलती थी। वह स्थानीय स्तर पर इसे संग्रहित कर तस्करों को बेचता है, जो इसे उत्तर भारत के राज्यों में सप्लाई करते हैं।

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छह आरोपी गिरफ्तार, दो झारखंड से
गिरफ्तार किए गए छह आरोपियों की पहचान राजकुमार, तेजराम, अंकित सिंह और शेर सिंह (सभी बरेली निवासी) के अलावा, चंदन यादव (इटखोरी, झारखंड) और मंटू कुमार (चौपारण, झारखंड) के रूप में हुई है। झारखंड से जुड़े इन दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पूरे नेटवर्क की डोर सुदेश यादव तक जा पहुंची है।

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एसटीएफ के अनुसार, सुदेश यादव इस गिरोह का मुख्य सप्लायर और फाइनेंसर है, जो खुद पर्दे के पीछे रहकर तस्करों को नशे का माल मुहैया कराता है। अब उसकी गिरफ्तारी के लिए झारखंड पुलिस और एसटीएफ की टीमें संयुक्त अभियान की तैयारी कर रही हैं।

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झारखंड में अफीम खेती पर चला था सबसे बड़ा अभियान
यह मामला ऐसे वक्त में सामने आया है जब झारखंड पुलिस ने हाल ही में राज्यभर में अवैध अफीम की खेती नष्ट करने के लिए एक बड़ा अभियान चलाया था। नवंबर 2024 से जनवरी 2025 तक चले इस अभियान के दौरान 19,086 एकड़ जमीन पर लगी अफीम की फसल को नष्ट किया गया।

सबसे अधिक कार्रवाई खूंटी जिले में की गई, जहां 10,520 एकड़ में लगी फसल नष्ट की गई। इसके बाद राजधानी रांची दूसरे स्थान पर रही, जहां 4,624 एकड़ में अवैध खेती को खत्म किया गया।इस दौरान 283 मामले दर्ज किए गए और 190 लोगों को गिरफ्तार किया गया। पिछले वर्ष जनवरी 2024 तक यह आंकड़ा केवल 3,974 एकड़ था, यानी एक साल में यह अभियान साढ़े चार गुना तेज हुआ।

नशा नेटवर्क पर सख्त हुई जांच एजेंसियां
झारखंड और यूपी पुलिस की साझा कार्रवाई से अब यह स्पष्ट हो गया है कि पूर्वी भारत से लेकर उत्तरी राज्यों तक अफीम की एक लंबी सप्लाई चेन सक्रिय है। एसटीएफ अधिकारियों के मुताबिक, “यह नेटवर्क छोटे किसानों और बिचौलियों के माध्यम से काम करता है। झारखंड में तैयार अफीम को छिपाकर ट्रांजिट प्वाइंट्स के जरिए उत्तर भारत भेजा जाता है।”

जानकारी के अनुसार, रांची और खूंटी के ग्रामीण इलाकों में कई गिरोह किसानों को अवैध खेती के लिए उकसाते हैं, और फिर उस फसल को सुदेश यादव जैसे सप्लायरों के जरिए आगे बेच देते हैं।

सुदेश यादव की तलाश तेज
यूपी एसटीएफ ने सुदेश यादव की तलाश के लिए राज्य पुलिस और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) से संपर्क किया है।
उसके खिलाफ मादक पदार्थ अधिनियम (NDPS Act) के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। सूत्रों के अनुसार, सुदेश यादव ने हाल ही में रांची और गुमला के बीच कई ठिकाने बदले हैं, जिससे उसकी लोकेशन ट्रेस करना मुश्किल हो गया है।

पुलिस की चेतावनी
एसटीएफ अधिकारियों ने कहा है कि इस नेटवर्क में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

“हमने नशे के इस अंतरराज्यीय सिंडिकेट को खत्म करने की दिशा में पहला बड़ा कदम उठा लिया है। अब मुख्य सप्लायर सुदेश यादव को पकड़ना हमारी प्राथमिकता है।”

यूपी एसटीएफ की इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि झारखंड नशा तस्करी नेटवर्क का अहम केंद्र बन चुका है। राज्य पुलिस अब इस नेटवर्क को खत्म करने के लिए इंटर-स्टेट ऑपरेशन की तैयारी कर रही है। सुदेश यादव की गिरफ्तारी से इस कड़ी का बड़ा हिस्सा उजागर होने की उम्मीद है।

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