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मेहुल चोकसी को झटका, प्रत्यर्पण प्रक्रिया आगे बढ़ने का रास्ता साफ

Mehul Choksi

मुनादी लाइव डेस्क : पंजाब नेशनल बैंक (PNB) के 13,000 करोड़ रुपये से अधिक के बहुचर्चित घोटाले के मुख्य आरोपी और भगोड़े हीरा व्यापारी मेहुल चोकसी को बेल्जियम की सर्वोच्च अदालत से बड़ा झटका लगा है। बेल्जियम की सुप्रीम कोर्ट ऑफ कैसेशन ने चोकसी द्वारा गिरफ्तारी और भारत प्रत्यर्पण के खिलाफ दायर अपील को खारिज कर दिया है। इस फैसले को चोकसी के भारत लाए जाने की दिशा में एक अहम कानूनी पड़ाव के रूप में देखा जा रहा है।

अधिकारियों ने मंगलवार को इस निर्णय की पुष्टि करते हुए बताया कि बेल्जियम की शीर्ष अदालत ने एंटवर्प कोर्ट ऑफ अपील के 17 अक्टूबर 2024 के आदेश को बरकरार रखा है। इस फैसले के बाद अब मेहुल चोकसी के भारत प्रत्यर्पण की औपचारिक प्रक्रिया बेल्जियम में आगे बढ़ सकती है और भारतीय जांच एजेंसियों के लिए यह एक बड़ी कानूनी सफलता मानी जा रही है।

यातना की आशंका वाली दलील खारिज
सुनवाई के दौरान मेहुल चोकसी ने यह तर्क दिया था कि यदि उसे भारत प्रत्यर्पित किया जाता है तो उसे वहां यातना और अमानवीय व्यवहार का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि बेल्जियम की सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्पष्ट रूप से निराधार करार दिया। ब्रसेल्स के महाधिवक्ता हेनरी वेंडरलिंडेन ने ईमेल के माध्यम से जानकारी दी कि कोर्ट ऑफ कैसेशन को चोकसी की अपील में कोई कानूनी आधार नजर नहीं आया, जिस कारण इसे खारिज कर दिया गया।

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आदालत ने यह भी कहा कि एंटवर्प कोर्ट ऑफ अपील द्वारा 29 नवंबर 2024 को जिला अदालत के प्री-ट्रायल चैंबर के आदेशों को सही ठहराया जाना पूरी तरह कानूनसम्मत है। इसलिए भारत द्वारा भेजे गए प्रत्यर्पण अनुरोध में कोई कानूनी खामी नहीं पाई गई।

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एंटवर्प कोर्ट के फैसले पर भी लगी मुहर
इससे पहले एंटवर्प की अपीलीय अदालत ने भारत सरकार के प्रत्यर्पण अनुरोध को वैध और उचित ठहराया था। चार सदस्यीय अभियोग कक्ष ने अपने फैसले में कहा था कि मुंबई की विशेष अदालत द्वारा मई 2018 और जून 2021 में जारी गिरफ्तारी वारंट कानून के अनुरूप हैं। बेल्जियम की जिला अदालत ने भी इन वारंटों को मान्यता देते हुए मेहुल चोकसी के प्रत्यर्पण की अनुमति दी थी।

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एंटवर्प कोर्ट ने यह भी माना था कि भारत में चोकसी को न्यायिक प्रक्रिया के तहत निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार मिलेगा, और उसे अमानवीय व्यवहार का कोई वास्तविक खतरा नहीं है।

PNB घोटाले का मुख्य आरोपी
मेहुल चोकसी पंजाब नेशनल बैंक के 13,000 करोड़ रुपये के घोटाले के मुख्य आरोपियों में से एक है। उस पर आरोप है कि उसने अपने भांजे नीरव मोदी के साथ मिलकर लेटर ऑफ अंडरटेकिंग (LoU) के जरिये बैंकों से फर्जी तरीके से बड़े पैमाने पर कर्ज लिया और उसे विदेश भेज दिया। वर्ष 2018 में घोटाले के खुलासे के बाद चोकसी भारत छोड़कर फरार हो गया था।

भारत सरकार और प्रवर्तन निदेशालय (ED) तथा केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) लंबे समय से चोकसी के प्रत्यर्पण की कोशिश में जुटे हुए हैं। इससे पहले उसे डोमिनिका में भी गिरफ्तार किया गया था, हालांकि कानूनी पेचीदगियों के चलते वह वहां से बेल्जियम पहुंच गया था।

प्रत्यर्पण की राह में अब क्या?
कानूनी जानकारों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ऑफ कैसेशन का फैसला आने के बाद अब प्रत्यर्पण प्रक्रिया प्रशासनिक चरण में प्रवेश कर सकती है। हालांकि चोकसी के पास अब भी कुछ सीमित कानूनी विकल्प शेष हो सकते हैं, लेकिन उसके पास समय और गुंजाइश दोनों बेहद कम मानी जा रही हैं।

भारतीय एजेंसियां इस फैसले को कानून के शासन की जीत बता रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि यदि प्रत्यर्पण सफल होता है, तो यह देश से फरार आर्थिक अपराधियों के खिलाफ एक मजबूत संदेश देगा कि कानून से बच पाना लंबे समय तक संभव नहीं है।

भारत के लिए बड़ी कानूनी और नैतिक जीत
मेहुल चोकसी मामले में बेल्जियम सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला भारत के लिए न केवल कानूनी बल्कि नैतिक जीत भी माना जा रहा है। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि अंतरराष्ट्रीय न्यायिक मंचों पर भारत के प्रत्यर्पण अनुरोधों को गंभीरता से लिया जा रहा है। अब नजरें इस बात पर टिकी हैं कि चोकसी को आखिरकार कब और किन औपचारिकताओं के तहत भारत लाया जाएगा।

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