झारखंड में पहली बार बच्चेदानी और निचले मलाशय के कैंसर की रोबोटिक सर्जरी सफल
36 घंटे में पहली मरीज को मिली छुट्टी; दूसरी मरीज चौथे दिन डिस्चार्ज
पारस एचईसी हॉस्पिटल में लगातार दो जटिल कैंसर सर्जरी
रांची: झारखंड के चिकित्सा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। पारस एचईसी हॉस्पिटल, रांची में लगातार दो जटिल रोबोटिक कैंसर सर्जरी सफलतापूर्वक की गई हैं। अस्पताल के मुताबिक, झारखंड में पहली बार बच्चेदानी और निचले मलाशय के कैंसर की इस तरह की जटिल रोबोटिक सर्जरी सफलतापूर्वक पूरी की गई। दोनों सर्जरी का नेतृत्व सर्जिकल ऑन्कोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. अभिनव शेखर ने किया। वहीं, जीआई सर्जन कंसल्टेंट डॉ. नवीन कुमार ने सर्जरी में महत्वपूर्ण सहयोग दिया।
बच्चेदानी के कैंसर की पहली सर्जरी
पहली सर्जरी बच्चेदानी के कैंसर से पीड़ित महिला मरीज की की गई। अस्पताल के अनुसार, रोबोटिक तकनीक की मदद से कम चीरा लगाकर जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा किया गया। सर्जरी के बाद मरीज का रिकवरी प्रोसेस तेज रहा। अस्पताल की ओर से दी गई जानकारी के मुताबिक, महज 36 घंटे के भीतर मरीज स्वयं चलने-फिरने की स्थिति में आ गईं और उन्हें स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। अस्पताल के विशेषज्ञों के अनुसार, रोबोटिक सर्जरी में अत्याधुनिक तकनीक की मदद से सर्जन को जटिल हिस्सों में बेहतर दृश्यता और अधिक सटीकता के साथ काम करने में मदद मिलती है।
निचले मलाशय के कैंसर की चुनौतीपूर्ण सर्जरी
पहली सर्जरी की सफलता के बाद निचले मलाशय के कैंसर से पीड़ित एक अन्य महिला मरीज की भी जटिल रोबोटिक सर्जरी की गई। अस्पताल के मुताबिक, मरीज पहले ही कीमोथेरेपी और विकिरण चिकित्सा प्राप्त कर चुकी थीं। इन उपचारों के बाद निचले मलाशय के कैंसर की सर्जरी तकनीकी रूप से काफी चुनौतीपूर्ण मानी जाती है। इस जटिल प्रक्रिया को भी डॉ. अभिनव शेखर और उनकी विशेषज्ञ रोबोटिक सर्जरी टीम ने सफलतापूर्वक पूरा किया। अस्पताल के अनुसार, सर्जरी के बाद मरीज की रिकवरी भी अच्छी रही और उन्हें चौथे दिन स्वस्थ अवस्था में अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।

झारखंड में आधुनिक कैंसर सर्जरी की नई शुरुआत
सर्जिकल ऑन्कोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. अभिनव शेखर ने कहा कि झारखंड में लगातार दो जटिल रोबोटिक कैंसर सर्जरी का सफल होना महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने कहा कि रोबोटिक तकनीक जटिल सर्जरी के दौरान बेहतर विजिबिलिटी और अधिक सटीकता के साथ काम करने में मदद करती है। उनका कहना है कि अस्पताल का प्रयास है कि झारखंड के मरीजों को अत्याधुनिक कैंसर सर्जरी की सुविधा राज्य में ही उपलब्ध हो, ताकि इलाज के लिए उन्हें दूसरे शहरों का रुख कम करना पड़े।
कीमो और रेडिएशन के बाद सर्जरी चुनौतीपूर्ण
जीआई सर्जन कंसल्टेंट डॉ. नवीन कुमार ने कहा कि कीमोथेरेपी और विकिरण चिकित्सा के बाद निचले मलाशय के कैंसर की सर्जरी काफी चुनौतीपूर्ण होती है। उन्होंने बताया कि ऐसे मामलों में विशेषज्ञों की समन्वित टीम और आधुनिक सर्जिकल तकनीक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इस जटिल प्रक्रिया को सफलतापूर्वक पूरा करना पूरी टीम के लिए संतोष की बात है।
मरीजों को राज्य में मिलेंगे आधुनिक इलाज के विकल्प
पारस एचईसी हॉस्पिटल के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. नीतेश कुमार ने कहा कि दो जटिल रोबोटिक कैंसर सर्जरी की सफलता झारखंड में आधुनिक रोबोटिक कैंसर सर्जरी के क्षेत्र में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में अत्याधुनिक सुविधा उपलब्ध होने से कैंसर मरीजों को बेहतर उपचार के विकल्प अब अपने ही राज्य में मिल रहे हैं। इससे मरीजों को इलाज के लिए दूसरे राज्यों में जाने की जरूरत कम हो सकती है। अस्पताल की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, इन दोनों सफल सर्जरी से झारखंड में रोबोटिक कैंसर सर्जरी के क्षेत्र में नई संभावनाएं खुली हैं।






