Durga Puja
tulsyan

कहां जा रहा है दुनिया का काला धन? CJI सूर्यकांत बोले- 100 में सिर्फ 1 रुपया होता है रिकवर

cji-surya-kant-black-money

अपराध की कमाई को वापस लाना सबसे बड़ी चुनौती

नई दिल्ली: भारत के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने दुनिया में बढ़ते आर्थिक अपराध और मनी लॉन्ड्रिंग को लेकर बेहद गंभीर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि वैश्विक स्तर पर हर साल इतनी बड़ी मात्रा में अवैध धन की लॉन्ड्रिंग होती है कि उससे दुनिया की करीब 8 अरब आबादी में हर व्यक्ति के लिए एक सामान्य लैपटॉप खरीदा जा सकता है, और इसके बाद भी पैसा बच जाएगा।

सीजेआई सूर्यकांत ने यह टिप्पणी कैम्ब्रिज में आयोजित 43वें अंतरराष्ट्रीय आर्थिक अपराध संगोष्ठी के समापन सत्र में की। उन्होंने आर्थिक अपराध से निपटने के लिए केवल अपराधियों को सजा देने के बजाय अवैध संपत्ति का पता लगाने, उसे फ्रीज करने और वापस हासिल करने की व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर दिया।

100 रुपये में 1 रुपये से भी कम की रिकवरी
सीजेआई ने मनी लॉन्ड्रिंग के खिलाफ वैश्विक कार्रवाई की सबसे बड़ी कमजोरी बताते हुए कहा कि अवैध संपत्ति की विशाल मात्रा के मुकाबले उसकी रिकवरी बेहद कम है। उन्होंने कहा कि हर 100 हिस्से की अवैध संपत्ति में से सबसे उदार अनुमान के मुताबिक भी एक हिस्से से कम ही वास्तव में वापस हासिल किया जा पाता है। यानी आसान भाषा में कहें तो 100 रुपये की अवैध कमाई में से करीब 1 रुपये या उससे भी कम रकम ही रिकवर हो पाती है। सीजेआई ने इस अंतर को आर्थिक अपराध से निपटने वाली मौजूदा व्यवस्था की बड़ी चुनौती बताया।

shrawani mela

अपराध की कमाई को वापस लाना सबसे बड़ी चुनौती
जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि आर्थिक अपराध का असली मकसद अपराध से होने वाले मुनाफे को सुरक्षित रखना होता है। इसलिए कानून लागू करने वाली एजेंसियों और न्यायिक व्यवस्था का ध्यान केवल अपराधी तक पहुंचने पर नहीं, बल्कि अवैध कमाई को ट्रेस करने, फ्रीज करने और वापस लाने पर भी होना चाहिए। उन्होंने कहा कि अवैध धन अक्सर उस देश में नहीं रहता जहां अपराध किया गया है। अपराध से हासिल पैसा दूसरे देशों में भेज दिया जाता है, जिससे उसकी बरामदगी और भी मुश्किल हो जाती है।

happy Teacher Day

अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बताया जरूरी
CJI सूर्यकांत ने आर्थिक अपराधों से निपटने के लिए देशों के बीच बेहतर सहयोग की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि मनी लॉन्ड्रिंग और आर्थिक अपराध की सीमा किसी एक देश तक सीमित नहीं रहती। ऐसे मामलों में म्यूचुअल लीगल असिस्टेंस ट्रीटी (MLAT), वित्तीय खुफिया जानकारी साझा करना, बेनिफिशियल ओनरशिप रजिस्ट्रियां और संपत्ति जब्ती के प्रभावी तंत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि अलग-अलग देशों को उपलब्ध कानूनी और वित्तीय तंत्रों का इस्तेमाल अलग-अलग करने के बजाय मिलकर करना होगा।

resizone-elanza
rlifecare

भारत के कानूनी ढांचे का भी किया जिक्र
सीजेआई सूर्यकांत ने भारत में आर्थिक अपराधों से निपटने के लिए बनाए गए कानूनी ढांचे का भी उल्लेख किया। उन्होंने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 और फ्यूजिटिव इकोनॉमिक ऑफेंडर्स एक्ट, 2018 समेत विभिन्न कानूनी और संस्थागत व्यवस्थाओं का जिक्र किया। हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ये व्यवस्थाएं पूरी तरह अचूक नहीं हैं और जांच प्रक्रिया में कानूनी प्रक्रिया, अनुपातिकता और निर्दोषता की धारणा जैसे सिद्धांतों का पालन जरूरी है।

डिजिटल अरेस्ट जैसे नए अपराधों पर भी चिंता
सीजेआई ने अपने संबोधन में तेजी से बढ़ रहे ‘डिजिटल अरेस्ट’ फ्रॉड का भी जिक्र किया। उन्होंने बताया कि ठग पुलिस अधिकारी, न्यायिक अधिकारी या सरकारी अधिकारी बनकर वीडियो कॉल के जरिए लोगों को डराते हैं और उनसे पैसे ऐंठते हैं। उन्होंने कहा कि बदलती तकनीक के साथ आर्थिक अपराधों के तरीके भी बदल रहे हैं। ऐसे में कानून और संस्थाओं को भी अपराध के नए तरीकों के अनुरूप तेजी से प्रतिक्रिया देने की जरूरत है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *