रांची में मतदाता पंजीकरण और वोटर लिस्ट पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन शुरू, 58 शोध-पत्रों पर होगा मंथन
Ranchi News: झारखंड की राजधानी रांची में “Voter Registration and Voter Registers 2026” दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का बुधवार, 2 सितंबर 2026 को शुभारंभ हुआ। नेशनल यूनिवर्सिटी ऑफ स्टडी एंड रिसर्च इन लॉ (NUSRL), रांची में आयोजित इस सम्मेलन में देश-विदेश के विशेषज्ञ, शिक्षाविद, शोधकर्ता और निर्वाचन प्रबंधन से जुड़े अधिकारी मतदाता पंजीकरण, वोटर लिस्ट की शुद्धता, तकनीक, नागरिकता, जागरूकता, लैंगिक समानता और प्रवासी मतदाताओं से जुड़े मुद्दों पर मंथन कर रहे हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय, झारखंड ने केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के सहयोग से इस सम्मेलन का आयोजन किया है। आईआईएम रांची, NUSRL रांची और सेंट जेवियर्स कॉलेज, रांची सम्मेलन के नॉलेज पार्टनर हैं।
भारत निर्वाचन आयोग के प्रधान सचिव रहे मुख्य अतिथि
सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में भारत निर्वाचन आयोग के प्रधान सचिव अरविंद आनंद मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। इस दौरान मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार, केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के कुलपति प्रो. सारंग मेधेकर, NUSRL के कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक आर. पाटिल और सेंट जेवियर्स कॉलेज रांची के प्राचार्य डॉ. फादर रॉबर्ट प्रदीप कुजूर समेत कई शिक्षाविद, शोधकर्ता और विषय विशेषज्ञ उपस्थित रहे। दीप प्रज्ज्वलन के बाद अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुबोध कुमार ने स्वागत संबोधन दिया। कार्यक्रम में सम्मेलन की दो पुस्तकों और स्मारिका का भी विमोचन किया गया।

800 से ज्यादा संस्थानों से संपर्क, मिले 230 Abstracts
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के. रवि कुमार ने कहा कि सम्मेलन का उद्देश्य मौजूदा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) से आगे बढ़कर मतदाता पंजीकरण और मतदाता सूची प्रबंधन पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक विमर्श करना है। उन्होंने बताया कि सम्मेलन के लिए 800 से अधिक विश्वविद्यालयों और संस्थानों से संपर्क किया गया। इसके बाद कुल 230 शोध सार (Abstracts) प्राप्त हुए। स्वतंत्र अकादमिक विशेषज्ञ समिति ने इनमें से 80 Abstracts को शॉर्टलिस्ट किया और अंतिम रूप से 58 शोध-पत्रों को प्रकाशन एवं चर्चा के लिए चुना गया। के. रवि कुमार ने कहा कि अलग-अलग देशों में सक्रिय, स्वचालित और हाइब्रिड मतदाता पंजीकरण प्रणालियां अपनाई जा रही हैं। कई देशों में जनसंख्या डेटाबेस, सिविल रजिस्ट्री, बायोमेट्रिक्स और लगातार डेटा अपडेट जैसी तकनीकों का इस्तेमाल बढ़ रहा है।
तकनीक के साथ पारदर्शिता पर जोर
मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने कहा कि भारत भी मतदाता सूची प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए तकनीक और डेटाबेस आधारित सत्यापन का क्रमिक रूप से इस्तेमाल कर रहा है। इसका उद्देश्य मतदाता रिकॉर्ड में मौजूद विसंगतियों की पहचान करना और सूची की शुद्धता में सुधार करना है। उन्होंने कहा कि निर्वाचन प्रक्रिया में क्षेत्रीय सत्यापन, राजनीतिक दलों और अन्य हितधारकों की भागीदारी, न्यायिक समीक्षा तथा भारत निर्वाचन आयोग का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा कि लक्ष्य ऐसी शुद्ध, समावेशी और पारदर्शी मतदाता सूची तैयार करना है, जिसमें हर पात्र नागरिक शामिल हो और कोई अपात्र व्यक्ति मतदाता सूची का हिस्सा न बने।

NUSRL कुलपति बोले- वोटर लिस्ट लोकतंत्र का प्रवेश द्वार
NUSRL के कुलपति प्रो. (डॉ.) अशोक आर. पाटिल ने कहा कि मतदाता सूची लोकतांत्रिक सहभागिता का प्रवेश द्वार है। विश्वसनीय चुनाव की शुरुआत एक ऐसी मतदाता सूची से होती है, जो शुद्ध, समावेशी और नियमित रूप से अपडेट की गई हो। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची प्रबंधन में शुद्धता, समावेशन, सुगमता, पारदर्शिता और जवाबदेही को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। प्रो. पाटिल ने तकनीक के इस्तेमाल को लेकर कहा कि तकनीक कार्यकुशलता बढ़ाने का माध्यम हो सकती है, लेकिन इसे मानवीय विवेक और निर्णय का विकल्प नहीं बनाया जाना चाहिए।
युवा, प्रवासी और वंचित मतदाताओं पर भी चर्चा
सेंट जेवियर्स कॉलेज के प्राचार्य डॉ. फादर रॉबर्ट प्रदीप कुजूर ने कहा कि शुद्ध और समावेशी मतदाता सूची मजबूत लोकतंत्र की आधारशिला है। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों की भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि कॉलेज और विश्वविद्यालय मतदाता जागरूकता, कैंपस आधारित पंजीकरण अभियान और नागरिक शिक्षा के माध्यम से लोकतंत्र को मजबूत करने में योगदान दे सकते हैं। उन्होंने बढ़ते प्रवासन और शहरीकरण के बीच खासकर युवा मतदाताओं, प्रवासियों और वंचित समुदायों की चुनावी भागीदारी सुनिश्चित करने की जरूरत बताई।

AI और डेटा प्राइवेसी भी अहम मुद्दा
सम्मेलन में डेटा की शुद्धता, निजता, तकनीकी सुगमता और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के जिम्मेदार इस्तेमाल से जुड़ी चुनौतियों पर भी चर्चा हुई। डॉ. कुजूर ने कहा कि निर्वाचन प्रणाली में तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल के साथ जनता का विश्वास बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने निर्वाचन प्राधिकारों, शिक्षण संस्थानों, शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के बीच बेहतर सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।

अकादमिक शोध और निर्वाचन प्रबंधन को एक मंच
केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड के कुलपति प्रो. सारंग मेधेकर ने कहा कि सम्मेलन अकादमिक शोध और निर्वाचन प्रबंधन के व्यावहारिक अनुभवों को एक मंच पर ला रहा है। उन्होंने कहा कि भारत जैसे विशाल देश में चुनाव संचालन के लिए व्यापक लॉजिस्टिक व्यवस्था और प्रशिक्षित पेशेवरों की आवश्यकता होती है। वहीं AI और दूसरी उभरती तकनीकों से निर्वाचन प्रबंधन में नई संभावनाओं के साथ नई चुनौतियां भी सामने आ रही हैं। उन्होंने अकादमिक जगत और निर्वाचन प्रशासन के बीच सहयोग बढ़ाने की पहल की सराहना की।
SIR को लेकर भी सामने रखी गई जानकारी
अपर मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सुबोध कुमार ने कहा कि लोकतंत्र की पूरी प्रक्रिया के केंद्र में नागरिक और मतदाता हैं। इसलिए शुद्ध, समावेशी और पारदर्शी मतदाता सूची मजबूत लोकतंत्र की बुनियाद है।उन्होंने झारखंड में चल रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का उल्लेख करते हुए कहा कि मतदाता सूची को लगातार अपडेट रखने की दिशा में काम किया जा रहा है, ताकि कोई पात्र नागरिक सूची से बाहर न रहे और किसी अपात्र व्यक्ति का नाम शामिल न हो।






