पलामू में जंगली सूअर के शिकार के लिए विस्फोटक लगा रहा था ग्रामीण, ब्लास्ट में उड़ी हथेली; अस्पताल में बेड भी नहीं मिला
पलामू: जिले के रामगढ़ थाना क्षेत्र में जंगली जानवर के शिकार के दौरान हुए विस्फोट में एक ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गया। बताया जा रहा है कि ग्रामीण जंगल में जंगली सूअर के शिकार के लिए विस्फोटक लगा रहा था, इसी दौरान अचानक ब्लास्ट हो गया। विस्फोट इतना जोरदार था कि उसकी हथेली बुरी तरह क्षतिग्रस्त होकर उड़ गई। घायल ग्रामीण की पहचान रामगढ़ थाना क्षेत्र के काचन गांव निवासी शनिचरवा राम के रूप में हुई है। घटना के बाद उसे इलाज के लिए मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल पहुंचाया गया। वहीं, घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और पूरे मामले की जांच शुरू कर दी है।
शिकार के लिए पटाखा लगा रहा था ग्रामीण
पलामू एसपी कपिल चौधरी ने बताया कि शनिचरवा राम जंगल में जंगली सूअर के शिकार के लिए पटाखा लगा रहा था। इसी दौरान अचानक विस्फोट हो गया। हादसे में उसकी हथेली गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गई। एसपी के अनुसार, पुलिस पूरे मामले की छानबीन कर रही है। शुरुआती पूछताछ में घायल शनिचरवा राम ने पुलिस को बताया था कि वह जंगल में खुखड़ी चुनने के लिए गया था और इसी दौरान विस्फोट हुआ। हालांकि, बाद में पुलिस के अनुसंधान और पूछताछ में शिकार के लिए विस्फोटक लगाने की बात सामने आई।
पहले बताई खुखड़ी चुनने की बात, जांच में सामने आया शिकार का मामला
घटना के बाद पुलिस ने जब घायल ग्रामीण से पूछताछ की तो शुरुआती तौर पर उसने जंगल में खुखड़ी चुनने जाने की बात कही थी। उसके मुताबिक, जंगल में मौजूद किसी वस्तु के संपर्क में आने के बाद अचानक विस्फोट हो गया। लेकिन पुलिस की आगे की जांच और पूछताछ में यह जानकारी सामने आई कि शनिचरवा राम कथित तौर पर जंगली सूअर के शिकार के लिए पटाखा लगा रहा था। पुलिस अब यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस्तेमाल किया गया विस्फोटक किस तरह का था और इलाके में इस तरह शिकार के लिए विस्फोटक लगाने की गतिविधि कितने समय से चल रही है।
काचन इलाके में शिकार के लिए विस्फोटक लगाने की चर्चा
स्थानीय जानकारी और पुलिस के अनुसार, रामगढ़ के जिस इलाके में यह घटना हुई है, वहां ग्रामीणों द्वारा जंगली जीवों के शिकार के लिए विस्फोटक लगाने की बात सामने आती रही है। बताया जा रहा है कि शिकार के लिए विस्फोटक का इस्तेमाल बेहद खतरनाक है और इससे वन्यजीवों के साथ-साथ इंसानों की जान को भी गंभीर खतरा रहता है। पुलिस इस बात की भी जांच कर रही है कि क्या जंगल में कहीं और इस तरह के विस्फोटक लगाए गए हैं। अगर ऐसा है तो उन्हें चिह्नित कर हटाना भी पुलिस और वन विभाग के लिए चुनौती हो सकती है।
माओवादियों के प्रभाव के बाद नहीं हुई थी विस्फोट की घटना
स्थानीय स्तर पर यह भी बताया जा रहा है कि रामगढ़ क्षेत्र में वर्ष 2012-13 के बाद माओवादियों का प्रभाव काफी हद तक खत्म हो गया था। इसके बाद इलाके में किसी बड़ी विस्फोट की घटना सामने नहीं आई थी। ऐसे में शिकार के दौरान विस्फोट की यह घटना इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है। हालांकि, इस घटना का माओवादी गतिविधियों से कोई संबंध है या नहीं, इसकी कोई जानकारी सामने नहीं आई है। पुलिस की जांच फिलहाल शिकार के लिए इस्तेमाल किए गए विस्फोटक और घटना की परिस्थितियों पर केंद्रित है।
मेडिकल कॉलेज में घायल को नहीं मिला बेड
घटना का एक और गंभीर पहलू इलाज से जुड़ा है। विस्फोट में घायल शनिचरवा राम को मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में बेड नहीं मिलने की बात सामने आई है। इलाज के बाद घायल को अस्पताल में बेड के बजाय बेंच पर बैठे देखा गया। शनिचरवा राम ने बताया कि उसे अभी तक बेड नहीं मिला है और अस्पताल की ओर से बार-बार आश्वासन दिया जा रहा है। हाथ में गंभीर चोट के बावजूद अस्पताल की बेंच पर बैठे घायल की स्थिति स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करती है। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस मामले में तत्काल कोई विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पुलिस और अस्पताल दोनों स्तर पर उठे सवाल
एक तरफ जंगल में शिकार के लिए विस्फोटक इस्तेमाल करने की घटना ने सुरक्षा और वन्यजीव संरक्षण को लेकर चिंता बढ़ा दी है, तो दूसरी ओर घायल को अस्पताल में बेड नहीं मिलने की शिकायत ने स्वास्थ्य व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि विस्फोट में इस्तेमाल की गई सामग्री क्या थी, उसे किस तरीके से लगाया गया था और क्या इलाके में अन्य स्थानों पर भी ऐसे विस्फोटक मौजूद हैं। वहीं, घायल शनिचरवा राम का इलाज जारी है। उसके हाथ में गंभीर चोट आई है और फिलहाल उसकी चिकित्सा निगरानी की जा रही है।






