बरवाअड्डा थाना विवाद के बाद JLKM ने दिलीप चौधरी को पार्टी से निकाला, प्राथमिक सदस्यता खत्म
संगठनात्मक अनुशासनहीनता के आरोप में JLKM की बड़ी कार्रवाई
केंद्रीय नेतृत्व ने पार्टी के कार्यक्रमों और राजनीतिक गतिविधियों से भी किया बाहर
धनबाद: बरवाअड्डा थाना परिसर में हुए विवाद के बाद अब JLKM ने अपने ही पार्टी नेता दिलीप चौधरी के खिलाफ बड़ी संगठनात्मक कार्रवाई की है। पार्टी के केंद्रीय प्रधान महासचिव फरजान खान की ओर से जारी पत्र के अनुसार दिलीप चौधरी की प्राथमिक सदस्यता तत्काल प्रभाव से समाप्त कर उन्हें पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। पार्टी नेतृत्व ने कार्रवाई के पीछे संगठनात्मक अनुशासनहीनता और निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करने को वजह बताया है। साथ ही दिलीप चौधरी को पार्टी के किसी भी कार्यक्रम, बैठक या राजनीतिक गतिविधि में शामिल नहीं होने का निर्देश दिया गया है।
बिना जिला इकाई को सूचना दिए विधायक को थाने बुलाने का आरोप
JLKM की ओर से जारी पत्र के मुताबिक बरवाअड्डा थाना प्रकरण में दिलीप चौधरी ने जिला इकाई को सूचना दिए बिना पार्टी के विधायक जयराम महतो को थाने बुलाने की पहल की। केंद्रीय नेतृत्व ने इसे पार्टी के संगठनात्मक नियमों के विपरीत माना। पार्टी का कहना है कि थाना स्तर से जुड़े मामलों का निपटारा निर्धारित प्रक्रिया के तहत जिला इकाई के माध्यम से किया जाना चाहिए था। केंद्रीय प्रवक्ता सुशील मंडल ने भी कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि दिलीप चौधरी को फिलहाल पार्टी से निष्कासित कर दिया गया है। पार्टी नेतृत्व की ओर से इसे संगठन में अनुशासन बनाए रखने की दिशा में उठाया गया कदम बताया गया है।
बरवाअड्डा थाने में विवाद से शुरू हुआ था मामला
दरअसल, 21 अगस्त को बरवाअड्डा थाना परिसर में विवाद उस समय बढ़ गया था, जब डुमरी विधायक जयराम महतो अपने समर्थकों के साथ थाने पहुंचे थे। मामला JLKM नेता गणेश दास की गिरफ्तारी से जुड़ा था। गणेश दास की गिरफ्तारी को लेकर विधायक और उनके समर्थकों की पुलिस से कहासुनी हो गई थी। इसके बाद थाना परिसर में स्थिति बिगड़ गई और धक्का-मुक्की की स्थिति बनने की बात सामने आई थी। घटना के बाद बरवाअड्डा थाना प्रभारी रवि कुमार की शिकायत पर विधायक जयराम महतो समेत कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।
विधायक और थाना प्रभारी की कथित बातचीत का ऑडियो वायरल
विवाद के बाद विधायक जयराम महतो और बरवाअड्डा थाना प्रभारी रवि कुमार के बीच व्हाट्सऐप कॉल पर हुई कथित बातचीत का ऑडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। ऑडियो को लेकर पुलिस एसोसिएशन ने विधायक के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था। एसोसिएशन की ओर से बातचीत के कथित तरीके और पुलिस पदाधिकारी को लेकर की गई टिप्पणी पर आपत्ति जताई गई थी। हालांकि, वायरल ऑडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए उसमें कही गई बातों को फिलहाल आरोप या कथित बातचीत के तौर पर ही देखा जा रहा है।



पुलिस एसोसिएशन की नाराजगी के बीच बढ़ा विवाद
वायरल ऑडियो सामने आने के बाद मामला केवल बरवाअड्डा थाना परिसर के विवाद तक सीमित नहीं रहा। पुलिस एसोसिएशन की नाराजगी के बाद यह मामला पुलिस बनाम JLKM नेताओं के बीच बढ़ती तनातनी से भी जुड़ गया। एक तरफ पुलिस एसोसिएशन ने विधायक की कथित बातचीत को लेकर आपत्ति जताई, वहीं दूसरी तरफ बरवाअड्डा थाना प्रकरण से जुड़े लोगों पर कानूनी और संगठनात्मक कार्रवाई का सिलसिला आगे बढ़ा। अब JLKM की ओर से दिलीप चौधरी को पार्टी से बाहर किए जाने के बाद इस पूरे घटनाक्रम में संगठनात्मक अनुशासन का मुद्दा भी प्रमुख हो गया है।
कार्यकर्ताओं को अनुशासन का संदेश
दिलीप चौधरी के खिलाफ कार्रवाई के जरिए JLKM केंद्रीय नेतृत्व ने संगठन के भीतर यह संदेश देने की कोशिश की है कि पार्टी से जुड़े मामलों में निर्धारित प्रक्रिया और संगठनात्मक स्तर का पालन जरूरी है। पार्टी के अनुसार, किसी भी थाना या प्रशासनिक मामले में जिला इकाई को दरकिनार कर सीधे पार्टी के विधायक को हस्तक्षेप के लिए बुलाने की पहल संगठनात्मक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। बरवाअड्डा थाना विवाद के बाद अब दिलीप चौधरी पर हुई कार्रवाई से मामले ने नया राजनीतिक और संगठनात्मक मोड़ ले लिया है।



