‘अडानी एयरलाइंस’ की सुगबुगाहट! क्या इंडिगो का एकाधिकार तोड़ने की तैयारी में है मोदी सरकार?
नई दिल्ली: भारत के विमानन क्षेत्र में एक बड़े बदलाव की आहट सुनाई दे रही है। देश के प्रमुख एयरपोर्ट संचालकों में शामिल अडानी समूह के एयरलाइन कारोबार में उतरने की संभावना को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, समूह अपनी एयरलाइन शुरू करने या किसी मौजूदा एयरलाइन में हिस्सेदारी लेने के विकल्पों पर विचार कर रहा है। इसके लिए केंद्र सरकार से मौजूदा नियमों में बदलाव की मांग भी की गई है। यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है तो भारतीय विमानन क्षेत्र में वर्षों से कायम इंडिगो और एयर इंडिया के मजबूत दबदबे को चुनौती मिल सकती है।
क्या है मौजूदा नियम?
वर्तमान नियमों के अनुसार, दिल्ली और मुंबई जैसे प्रमुख हवाई अड्डों का संचालन करने वाले ऑपरेटर किसी अनुसूचित एयरलाइन में 10 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी नहीं रख सकते। यह प्रावधान संभावित हितों के टकराव (Conflict of Interest) को रोकने के उद्देश्य से बनाया गया था। रिपोर्टों के मुताबिक, अडानी समूह ने इसी प्रावधान में बदलाव की मांग की है, ताकि वह एयरलाइन व्यवसाय में प्रवेश कर सके। सरकार इस प्रस्ताव के कानूनी और नीतिगत पहलुओं पर विचार कर रही है। अंतिम निर्णय केंद्रीय मंत्रिमंडल और संबंधित प्रक्रियाओं के बाद ही लिया जाएगा।
क्यों हो रही है नियम बदलने पर चर्चा?
भारत का घरेलू विमानन बाजार तेजी से बढ़ रहा है, लेकिन फिलहाल यह काफी हद तक दो बड़ी कंपनियों—इंडिगो और एयर इंडिया समूह—के इर्द-गिर्द केंद्रित है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, दोनों कंपनियों की संयुक्त हिस्सेदारी लगभग 91 प्रतिशत है, जबकि अकेले इंडिगो की हिस्सेदारी करीब 64 प्रतिशत है। ऐसे में सरकार के भीतर नए खिलाड़ियों के प्रवेश को बढ़ावा देकर प्रतिस्पर्धा बढ़ाने पर चर्चा चल रही है। अधिकारियों का मानना है कि अधिक प्रतिस्पर्धा से यात्रियों को बेहतर सेवाएं, अधिक विकल्प और संभावित रूप से प्रतिस्पर्धी किराए मिल सकते हैं।
अडानी समूह की एविएशन में पहले से मजबूत मौजूदगी
अडानी समूह पहले ही भारत के विमानन क्षेत्र में बड़ा निवेश कर चुका है। समूह देश के कई प्रमुख हवाई अड्डों का संचालन करता है। इसके अलावा ग्राउंड हैंडलिंग, विमान रखरखाव (MRO), पायलट प्रशिक्षण और एयरपोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर में भी उसकी महत्वपूर्ण मौजूदगी है। नवी मुंबई एयरपोर्ट सहित कई परियोजनाओं में समूह अरबों डॉलर का निवेश कर रहा है। यदि समूह को एयरलाइन शुरू करने की अनुमति मिलती है, तो यह उसके लिए एयरपोर्ट संचालन से लेकर एयरलाइन सेवाओं तक एकीकृत (Integrated) एविएशन मॉडल बनाने की दिशा में बड़ा कदम होगा।
चुनौतियां भी कम नहीं
हालांकि एयरलाइन कारोबार को दुनिया के सबसे चुनौतीपूर्ण व्यवसायों में माना जाता है। इसमें भारी निवेश, ईंधन की ऊंची लागत, तीव्र प्रतिस्पर्धा और कम लाभ मार्जिन जैसी चुनौतियां रहती हैं। इसके अलावा, यदि एयरपोर्ट ऑपरेटरों को एयरलाइन चलाने की अनुमति दी जाती है तो हितों के टकराव को लेकर भी सवाल उठ सकते हैं। प्रतिस्पर्धी कंपनियां आशंका जता रही हैं कि एयरपोर्ट और एयरलाइन दोनों का संचालन करने वाली कंपनी को अनुचित व्यावसायिक लाभ मिल सकता है। यही वजह है कि प्रस्ताव पर व्यापक नियामकीय और कानूनी समीक्षा की जा रही है।
क्या बदल सकती है भारतीय विमानन की तस्वीर?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नियमों में बदलाव होता है और अडानी समूह एयरलाइन कारोबार में उतरता है, तो भारतीय विमानन बाजार में प्रतिस्पर्धा का नया दौर शुरू हो सकता है। हालांकि अभी तक सरकार की ओर से किसी नियम में बदलाव या अडानी समूह को एयरलाइन शुरू करने की औपचारिक मंजूरी की घोषणा नहीं की गई है। फिलहाल यह मामला नीति-निर्माण के स्तर पर विचाराधीन है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो भारतीय विमानन क्षेत्र में यह पिछले कई वर्षों का सबसे बड़ा संरचनात्मक बदलाव माना जाएगा।





