पारस HEC हॉस्पिटल में किडनी और यूरोलॉजी रोगों पर जागरूकता सेमिनार, विशेषज्ञ बोले- समय पर जांच से बच सकती है जान
रांची: पारस HEC हॉस्पिटल, रांची के रीनल साइंसेज विभाग की ओर से बुधवार को होटल रामाडा में “एशेन्शल्ज़ ऑफ़ रीनल केयर” विषय पर जन-जागरूकता एवं संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को किडनी स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना, किडनी रोगों की समय पर पहचान के महत्व को समझाना और विशेषज्ञ चिकित्सकों से सीधे संवाद का अवसर उपलब्ध कराना था। कार्यक्रम में नेफ्रोलॉजी और यूरोलॉजी विभाग के विशेषज्ञ चिकित्सकों ने किडनी एवं मूत्र संबंधी बीमारियों की रोकथाम, समय पर जांच और आधुनिक उपचार पद्धतियों पर विस्तार से जानकारी साझा की।
समय पर पहचान से रोकी जा सकती है गंभीर किडनी बीमारी
नेफ्रोलॉजी विभाग के निदेशक डॉ. अशोक कुमार बैद्य ने कहा कि वर्तमान समय में बदलती जीवनशैली, मधुमेह (डायबिटीज), उच्च रक्तचाप, मोटापा और बिना चिकित्सकीय सलाह के लंबे समय तक दर्द निवारक दवाओं का सेवन किडनी रोगों के प्रमुख कारण बनते जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि अधिकांश किडनी रोग शुरुआती चरण में बिना किसी स्पष्ट लक्षण के विकसित होते हैं। इसलिए नियमित स्वास्थ्य जांच, विशेष रूप से ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर, यूरिन टेस्ट और किडनी फंक्शन टेस्ट कराना बेहद आवश्यक है। डॉ. बैद्य ने कहा कि यदि बीमारी का समय रहते पता चल जाए तो दवाओं, संतुलित आहार और जीवनशैली में सुधार के माध्यम से किडनी को गंभीर नुकसान से बचाया जा सकता है। इससे कई मामलों में डायलिसिस या किडनी प्रत्यारोपण (ट्रांसप्लांट) जैसी गंभीर स्थिति से भी बचाव संभव है।
उन्होंने लोगों से पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, धूम्रपान और तंबाकू से दूरी बनाने, नमक का सीमित सेवन करने तथा बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा नहीं लेने की अपील की।

क्रॉनिक किडनी डिजीज को कहा ‘साइलेंट डिजीज’
कंसल्टेंट डॉ. धीरज कुमार ने “क्रॉनिक किडनी डिजीज (CKD) के प्राथमिक प्रबंधन एवं सह-प्रबंधन” विषय पर अपने व्याख्यान में बताया कि सीकेडी धीरे-धीरे बढ़ने वाली बीमारी है, जिसके शुरुआती चरण में अक्सर कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। इसी कारण इसे “साइलेंट डिजीज” भी कहा जाता है। उन्होंने कहा कि समय पर जांच और उपचार शुरू करने से बीमारी की प्रगति को काफी हद तक धीमा किया जा सकता है और मरीज को डायलिसिस या किडनी प्रत्यारोपण जैसी जटिल परिस्थितियों से बचाया जा सकता है।
यूरोलॉजिकल समस्याओं को नजरअंदाज न करें
यूरोलॉजी विभाग के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. सौमिक चटर्जी ने बताया कि किडनी, मूत्राशय, प्रोस्टेट और मूत्र मार्ग से जुड़ी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। लेकिन जागरूकता की कमी के कारण अधिकांश मरीज शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं और देर से अस्पताल पहुंचते हैं। उन्होंने कहा कि समय पर विशेषज्ञ से परामर्श लेने पर अधिकांश यूरोलॉजिकल समस्याओं का प्रभावी उपचार संभव है।
प्रोस्टेट और यूरोलॉजिकल कैंसर पर भी हुई चर्चा
सेमिनार में सीनियर कंसल्टेंट डॉ. कुणाल कुमार सिंह ने प्रोस्टेट रोगों के लक्षण, जांच और उपचार के बारे में विस्तार से जानकारी दी। वहीं कंसल्टेंट डॉ. अमित कुमार ने यूरोलॉजिकल कैंसर की समय पर पहचान और आधुनिक उपचार तकनीकों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि शुरुआती अवस्था में कैंसर का पता चलने से सफल इलाज की संभावना काफी बढ़ जाती है।
अस्पताल का लक्ष्य सिर्फ इलाज नहीं, जागरूकता भी
पारस HEC हॉस्पिटल, रांची के फैसिलिटी डायरेक्टर डॉ. नीतेश कुमार ने कहा कि अस्पताल अत्याधुनिक तकनीक, अनुभवी विशेषज्ञों और समर्पित चिकित्सा टीम के माध्यम से किडनी एवं यूरोलॉजी से जुड़ी जटिल बीमारियों का समग्र उपचार उपलब्ध करा रहा है। उन्होंने कहा कि अस्पताल का उद्देश्य केवल इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि लोगों को बीमारियों के प्रति जागरूक बनाकर स्वस्थ जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित करना भी है। इसी उद्देश्य से समय-समय पर स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम, विशेषज्ञ संवाद और जनहित से जुड़े सेमिनार आयोजित किए जाते हैं।
विशेषज्ञों से सीधे पूछे सवाल
कार्यक्रम के दौरान बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। उपस्थित प्रतिभागियों ने किडनी और यूरोलॉजी संबंधी समस्याओं पर विशेषज्ञों से सीधे सवाल पूछे और अपनी स्वास्थ्य संबंधी शंकाओं का समाधान प्राप्त किया। विशेषज्ञों ने नियमित स्वास्थ्य जांच, संतुलित आहार, पर्याप्त पानी पीने और स्वस्थ जीवनशैली अपनाने को किडनी रोगों से बचाव का सबसे प्रभावी उपाय बताया।






