सुदिव्य सोनू के बाद कौन संभालेगा गिरिडीह की कमान? श्वेता शर्मा की सियासी एंट्री पर चर्चा तेज
गिरिडीह: झारखंड के नगर विकास, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा तथा पर्यटन मंत्री और गिरिडीह विधायक सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद सोमवार को उनकी अस्थियों का बराकर नदी में विधि-विधान से विसर्जन किया गया। परिवार के सदस्यों और करीबियों की मौजूदगी में अंतिम संस्कार से जुड़ी रस्में पूरी की गईं। मंत्री के आकस्मिक निधन से परिवार, समर्थकों और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के कार्यकर्ताओं में शोक का माहौल है। सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद जहां एक ओर परिवार और समर्थक शोक में डूबे हैं, वहीं दूसरी ओर गिरिडीह विधानसभा सीट के भविष्य को लेकर राजनीतिक चर्चा भी शुरू हो गई है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आने वाले समय में गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र का राजनीतिक नेतृत्व कौन संभालेगा।
छह महीने के भीतर हो सकता है उपचुनाव
सुदिव्य कुमार सोनू गिरिडीह विधानसभा सीट से निर्वाचित विधायक थे। उनके निधन के कारण यह सीट रिक्त हो गई है। ऐसे में नियमानुसार उपचुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। सामान्य परिस्थितियों में विधानसभा सीट रिक्त होने के बाद छह महीने के भीतर उपचुनाव कराने का प्रावधान है, हालांकि संवैधानिक और चुनावी परिस्थितियों के आधार पर निर्वाचन आयोग की प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी। इसी वजह से आने वाले दिनों में गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र में संभावित उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अभी किसी भी दल या संभावित उम्मीदवार की ओर से औपचारिक तौर पर कोई घोषणा सामने नहीं आई है।
क्या राजनीति में आएंगी सुदिव्य कुमार की पत्नी श्वेता शर्मा?
सुदिव्य कुमार सोनू के परिवार की राजनीतिक भूमिका को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई हैं। उनके बेटे श्रेयस की उम्र करीब 11 वर्ष है, जबकि उनकी दो अन्य बेटियां भी अभी पढ़ाई कर रही हैं। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या उनकी पत्नी श्वेता शर्मा भविष्य में सक्रिय राजनीति में कदम रखेंगी और गिरिडीह विधानसभा सीट से परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाएंगी। हालांकि, फिलहाल यह केवल राजनीतिक गलियारों में चल रही चर्चा है। श्वेता शर्मा की ओर से सक्रिय राजनीति में आने या उपचुनाव लड़ने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। इसलिए इसे अभी संभावित राजनीतिक समीकरण के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
शोक में डूबा परिवार, फिलहाल राजनीति से दूरी
सुदिव्य कुमार सोनू के निधन के बाद उनका परिवार गहरे सदमे में है। ऐसे समय में परिवार की प्राथमिकता शोक और अंतिम संस्कार से जुड़ी परंपराओं को पूरा करना है। स्वाभाविक रूप से फिलहाल परिवार की ओर से राजनीतिक भविष्य को लेकर किसी तरह की चर्चा नहीं हो रही है। दूसरी ओर, JMM के भीतर भी गिरिडीह सीट को लेकर तत्काल कोई फैसला सामने नहीं आया है। पार्टी के लिए यह सीट महत्वपूर्ण मानी जाती है और उपचुनाव की घोषणा के बाद ही उम्मीदवार को लेकर औपचारिक स्तर पर मंथन तेज होने की संभावना है।
गिरिडीह में बदलेंगे राजनीतिक समीकरण?
सुदिव्य कुमार सोनू गिरिडीह की राजनीति में सक्रिय और प्रभावशाली चेहरा थे। उनके निधन के बाद होने वाला संभावित उपचुनाव केवल एक खाली सीट भरने की प्रक्रिया नहीं होगा, बल्कि इससे गिरिडीह के स्थानीय राजनीतिक समीकरणों पर भी असर पड़ सकता है। JMM के सामने जहां अपने मजबूत जनाधार को बनाए रखने की चुनौती होगी, वहीं विपक्षी दल भी इस सीट पर अपनी स्थिति मजबूत करने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि अभी उपचुनाव की तारीख और उम्मीदवारों को लेकर तस्वीर साफ नहीं है। फिलहाल गिरिडीह शोक में है। आने वाले दिनों में जब परिवार शोक से बाहर आएगा और चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी, तभी यह स्पष्ट होगा कि सुदिव्य कुमार सोनू की राजनीतिक विरासत को कौन आगे बढ़ाता है।




