14वीं JPSC परीक्षा गड़बड़ी मामले में बड़ा झटका, किंगपिन अभय तिवारी और उमेश कुमार की जमानत खारिज
अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत का फैसला, 20 से अधिक आरोपी अब तक गिरफ्तार
पूर्व JPSC चेयरमैन एल. ख्यांग्ते भी जेल में
रांची: 14वीं JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी और नियुक्ति घोटाले के मामले में जेल में बंद आरोपी अभय कुमार तिवारी और उमेश कुमार को अदालत से बड़ा झटका लगा है। अपर न्यायायुक्त योगेश कुमार की अदालत ने दोनों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। इससे पहले अदालत ने दोनों की जमानत याचिका पर सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। CID इस पूरे मामले की जांच कर रही है। जांच एजेंसी ने परीक्षा में कथित अनियमितताओं को लेकर कांड संख्या 16/2026 दर्ज किया है। इसी मामले की जांच के दौरान पूर्व JPSC चेयरमैन एल. ख्यांग्ते को भी गिरफ्तार किया गया था।
अभय तिवारी को बताया जा रहा किंगपिन
CID की जांच में अभय कुमार तिवारी की भूमिका को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। वह TDPL के मार्केटिंग मैनेजर के पद पर रह चुका है। जांच एजेंसी का आरोप है कि अभय तिवारी ने अपने सगे-संबंधियों के अलावा कई अन्य अभ्यर्थियों से कथित तौर पर पैसे लिए और उन्हें सरकारी नौकरी दिलाने में मदद की। अभय तिवारी को रांची पुलिस और CID की संयुक्त कार्रवाई में 22 जुलाई को गोड्डा से गिरफ्तार किया गया था। गिरफ्तारी के समय वह गोड्डा जिले में खाद्य आपूर्ति विभाग में पदस्थापित था। जांच के दौरान अभय तिवारी की भूमिका को लेकर कई गंभीर आरोप सामने आए हैं। एजेंसी का दावा है कि ब्लैकलिस्टेड कंपनी TDPL से जुड़े रहने के बावजूद उसने चार बार JPSC की परीक्षा पास की थी।
स्वीकारोक्ति बयान में ख्यांग्ते का नाम
इस मामले में CID की जांच के दौरान अभय तिवारी के कथित स्वीकारोक्ति बयान का भी उल्लेख सामने आया है। जांच एजेंसी के अनुसार, अपने बयान में अभय तिवारी ने पूर्व JPSC चेयरमैन एल. ख्यांग्ते की भूमिका का जिक्र किया है। CID के अनुसार, अभय तिवारी ने कथित तौर पर यह भी बताया कि परीक्षा आयोजित करने वाली एजेंसी के तौर पर TDPL के चयन में एल. ख्यांग्ते की अहम भूमिका थी। हालांकि, ये सभी आरोप जांच एजेंसी द्वारा जुटाई गई सामग्री और आरोपी के कथित बयान पर आधारित हैं। मामले में आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में होने वाली न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगी।
TDPL को लेकर भी जांच में सवाल
14वीं JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच के दौरान TDPL की भूमिका भी CID के रडार पर रही है। एजेंसी यह जांच कर रही है कि परीक्षा प्रक्रिया से जुड़ी जिम्मेदारियां किस तरह तय की गईं और संबंधित लोगों के बीच किस प्रकार का संपर्क था। अभय तिवारी का TDPL से जुड़ाव और इसी दौरान कई बार JPSC परीक्षा में सफल होना भी जांच का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया जा रहा है।
पूर्व चेयरमैन एल. ख्यांग्ते भी जेल में
इसी केस की जांच के दौरान CID ने पूर्व JPSC चेयरमैन एल. ख्यांग्ते को गिरफ्तार किया था। जांच एजेंसी ने उन्हें रिमांड पर लेकर पूछताछ भी की थी। रिमांड अवधि पूरी होने के बाद से वह न्यायिक हिरासत में हैं। CID का दावा है कि परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच आगे बढ़ने के साथ कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आए हैं और इसी क्रम में अलग-अलग आरोपियों की गिरफ्तारी की गई है।
20 से ज्यादा लोगों की गिरफ्तारी
14वीं JPSC नियुक्ति में कथित गड़बड़ी से जुड़े इस मामले में अब तक 20 से अधिक लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। जांच एजेंसी की कार्रवाई लगातार जारी है। अभय तिवारी और उमेश कुमार की जमानत याचिका खारिज होने के बाद अब जांच में उनकी भूमिका को लेकर CID की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी। खास तौर पर अभय तिवारी से जुड़े कथित नेटवर्क, उम्मीदवारों से लेन-देन और परीक्षा प्रक्रिया में प्रभाव के आरोप जांच के केंद्र में हैं। फिलहाल अदालत ने दोनों आरोपियों को जमानत देने से इनकार कर दिया है। ऐसे में 14वीं JPSC परीक्षा से जुड़े कथित नियुक्ति घोटाले की जांच में यह आदेश महत्वपूर्ण माना जा रहा है।





