TMC सांसद नदीमुल हक के ठिकानों पर ED की छापेमारी खत्म, 65.60 करोड़ कैश जमा और बिटकॉइन खरीद का दावा

Nadimul Haq ED Raid

अखबार-ए-मशरिक समेत तीन संस्थाओं के दिल्ली, कोलकाता और रांची परिसरों पर हुई थी कार्रवाई

डिजिटल डिवाइस सहित कई सामग्री जब्त

रांची: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राज्यसभा सांसद नदीमुल हक से जुड़े परिसरों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की छापेमारी पूरी हो गई है। ED की ओर से जारी बयान के मुताबिक, सांसद से जुड़े समाचार पत्र अखबार-ए-मशरिक के बैंक खातों की जांच में कुल 65.60 करोड़ रुपये नकद जमा किए जाने की जानकारी सामने आई है। जांच एजेंसी ने इन नकद जमा को प्रथम दृष्टया संदिग्ध बताया है। ED के अनुसार, कंपनी से जुड़े बैंक खातों की जांच के दौरान बिटकॉइन की खरीद किए जाने की जानकारी भी सामने आई है। छापेमारी के दौरान जांच एजेंसी ने डिजिटल डिवाइस समेत कई अन्य सामग्रियां जब्त की हैं।

7 सितंबर से शुरू हुई थी ED की कार्रवाई
ED ने 7 सितंबर को नदीमुल हक से जुड़े अखबार-ए-मशरिक के दिल्ली, कोलकाता और रांची स्थित परिसरों पर छापेमारी शुरू की थी। जांच के दायरे में अखबार-ए-मशरिक के अलावा मेसर्स मशरिक मीडिया प्राइवेट लिमिटेड और मेसर्स क्रायोन एडवरटाइजिंग भी शामिल थीं। जांच एजेंसी के मुताबिक, इन संस्थाओं के नाम पर कई बैंक खाते संचालित किए जा रहे हैं। इन्हीं खातों से जुड़े वित्तीय लेन-देन की जांच ED की कार्रवाई का प्रमुख हिस्सा रही।

चार बैंकों के खातों की जांच में सामने आया 65.60 करोड़ का कैश
ED के बयान के अनुसार, कर्नाटक बैंक, पंजाब नेशनल बैंक (PNB), ICICI बैंक और J&K बैंक से जुड़े खातों की जांच में कुल 65.60 करोड़ रुपये नकद जमा किए जाने का पता चला है। जांच एजेंसी ने इन नकद जमाओं को संदिग्ध बताया है। ED अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इतनी बड़ी रकम किन स्रोतों से बैंक खातों में जमा हुई और इन पैसों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया।

कंपनी के खातों से बिटकॉइन खरीदने की जानकारी
ED की जांच में कंपनी से जुड़े बैंक खातों के जरिए बिटकॉइन खरीदे जाने की बात भी सामने आई है। जांच एजेंसी अब डिजिटल एसेट से जुड़े इस लेन-देन की भी पड़ताल कर रही है। हालांकि, बिटकॉइन खरीद से संबंधित लेन-देन की पूरी जानकारी और उसका कथित स्रोत जांच के आगे बढ़ने के बाद ही स्पष्ट होगा।

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फर्जी प्रसार संख्या के इस्तेमाल का आरोप
ED के मुताबिक, जांच के दौरान यह भी सामने आया कि संबंधित कंपनी की ओर से कथित तौर पर फर्जी प्रसार संख्या का इस्तेमाल किया जाता था। जांच एजेंसी अब इस दावे से जुड़े दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की जांच कर रही है। प्रसार संख्या में कथित गड़बड़ी का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया और इससे किसी तरह का वित्तीय लाभ हासिल किया गया या नहीं, इसकी भी पड़ताल की जा रही है।

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डिजिटल डिवाइस समेत कई सामग्री जब्त
छापेमारी के दौरान ED ने डिजिटल डिवाइस और अन्य सामग्रियां जब्त की हैं। इन उपकरणों और दस्तावेजों की जांच के बाद मामले से जुड़े वित्तीय लेन-देन और अन्य गतिविधियों के संबंध में और जानकारी सामने आने की उम्मीद है। फिलहाल ED की ओर से सामने रखी गई जानकारी जांच एजेंसी के प्रारंभिक निष्कर्षों और जब्ती से संबंधित है। इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही होगी।

रांची भी रहा ED की कार्रवाई का केंद्र
नदीमुल हक से जुड़े इस मामले में ED की कार्रवाई का दायरा दिल्ली और कोलकाता के साथ रांची तक रहा। अब छापेमारी पूरी होने के बाद जब्त डिजिटल उपकरणों और दस्तावेजों की जांच पर सबकी नजर है। जांच में यदि वित्तीय अनियमितताओं के और साक्ष्य सामने आते हैं तो ED आगे भी कार्रवाई कर सकती है।

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