14वीं JPSC परीक्षा विवाद: पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते ने पहली बार तोड़ी चुप्पी, बोले- निष्पक्ष जांच होगी तो सच सामने आएगा

JPSC Chairman

रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा में कथित गड़बड़ियों की जांच जहां अपराध अनुसंधान विभाग (CID) कर रहा है, वहीं इस पूरे विवाद पर आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने पहली बार सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया में किसी भी स्तर पर अनियमितता हुई है तो उसकी निष्पक्ष और गहन जांच होनी चाहिए, जिससे सच्चाई सामने आ सके और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो।

‘PT और Mains के रिजल्ट पर सदस्यों के हस्ताक्षर जरूरी नहीं’
14वीं JPSC परीक्षा के प्रारंभिक (PT) और मुख्य परीक्षा (Mains) के परिणामों में आयोग के सदस्यों के हस्ताक्षर नहीं होने के आरोपों पर एल. खियांग्ते ने कहा कि यह पूरी तरह नियमों के अनुरूप है। उन्होंने बताया कि JPSC के वर्ष 2002 के Rules of Procedure के अनुसार PT और Mains परीक्षा के परिणाम प्रकाशित करने के लिए आयोग के सदस्यों के हस्ताक्षर आवश्यक नहीं होते। उन्होंने कहा कि अंतिम परिणाम जारी करने से पहले आयोग के सदस्य पूरी स्क्रूटनी करते हैं और उसके बाद चेयरमैन की स्वीकृति के साथ अंतिम परिणाम जारी किया जाता है।उनके मुताबिक, केवल हस्ताक्षर नहीं होने के आधार पर परीक्षा प्रक्रिया पर सवाल उठाना उचित नहीं है।

6 मार्च 2025 को संभाला था JPSC अध्यक्ष का पद
एल. खियांग्ते ने बताया कि उन्होंने 6 मार्च 2025 को JPSC अध्यक्ष के रूप में पदभार ग्रहण किया था। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के प्रस्ताव के बाद भी उनके मन में यह संशय था कि क्या वे इस जिम्मेदारी के लिए उपयुक्त व्यक्ति हैं, क्योंकि JPSC का इतिहास पहले से विवादों से जुड़ा रहा है। उन्होंने कहा कि चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने जिम्मेदारी स्वीकार की और आयोग की कार्यप्रणाली में सुधार लाने का प्रयास किया।

‘आयोग को पटरी पर लाना सबसे बड़ी चुनौती थी’
पूर्व अध्यक्ष ने कहा कि जब उन्होंने पदभार संभाला, तब आयोग परीक्षा आयोजन, परिणाम प्रकाशन और लंबित भर्ती प्रक्रियाओं के मामले में काफी पीछे था। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में नियमित भर्ती परीक्षाओं को समय पर आयोजित करने, समयबद्ध तरीके से परिणाम प्रकाशित करने और लंबित बैकलॉग भर्तियों को पूरा करने पर विशेष ध्यान दिया गया। साथ ही आयोग में प्रशासनिक सुधार लागू करने का भी प्रयास किया गया।

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‘सीट बेचने के आरोप बेहद दुखद’
एल. खियांग्ते ने कहा कि उनके कार्यकाल में “सीट बेचने” जैसे आरोप लगना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यदि भर्ती प्रक्रिया में किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो उसकी सख्ती से जांच होनी चाहिए और जांच के बाद जो भी अधिकारी, कर्मचारी या एजेंसी दोषी पाए जाएं, उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जानी चाहिए।

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‘शिकायतों को जानबूझकर नजरअंदाज नहीं किया गया’
एक अभ्यर्थी द्वारा छह महीने पहले भेजी गई शिकायत को आयोग द्वारा नजरअंदाज किए जाने के आरोपों पर एल. खियांग्ते ने कहा कि आयोग को ई-मेल और डाक के माध्यम से बड़ी संख्या में शिकायतें प्राप्त होती थीं। उन्होंने कहा कि शिकायतों पर समय-समय पर कार्रवाई की जाती थी। किसी स्तर पर चूक संभव हो सकती है, लेकिन शिकायतों को जानबूझकर नजरअंदाज करने का आरोप पूरी तरह गलत है।

‘ब्लैकलिस्टेड कंपनी को परीक्षा का जिम्मा नहीं दिया’
परीक्षा संचालन के लिए कथित ब्लैकलिस्टेड एजेंसी को जिम्मेदारी देने के आरोपों पर उन्होंने कहा कि किसी भी एजेंसी का चयन पूरी जांच-पड़ताल के बाद किया गया था। एल. खियांग्ते ने कहा कि जहां तक उन्हें जानकारी है, उनके कार्यकाल में किसी ब्लैकलिस्टेड कंपनी को परीक्षा कराने की जिम्मेदारी नहीं दी गई। यदि कोई एजेंसी बाद में ब्लैकलिस्ट हुई हो, तो वह जांच का विषय है और इसकी जांच संबंधित एजेंसियां कर रही हैं।

CID ने की पूछताछ, जांच में पूरा सहयोग
पूर्व JPSC अध्यक्ष ने यह भी स्वीकार किया कि CID ने उनसे पूछताछ की है। उन्होंने बताया कि जांच अधिकारियों ने भर्ती प्रक्रिया और परीक्षा संचालन से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर सवाल पूछे, जिनका उन्होंने पूरी पारदर्शिता के साथ जवाब दिया। उन्होंने कहा कि JPSC अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने कभी भी अपने विशेषाधिकारों का दुरुपयोग नहीं किया और न ही कोई मनमाना निर्णय लिया।

‘जांच से सच्चाई सामने आएगी’
एल. खियांग्ते ने अपने ऊपर लगाए गए सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उन्हें जांच एजेंसियों पर पूरा भरोसा है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर कोई गड़बड़ी हुई है तो जांच पूरी होने के बाद दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने दोहराया कि निष्पक्ष जांच से सच्चाई सामने आएगी और निर्दोष लोगों को अनावश्यक रूप से बदनाम नहीं किया जाना चाहिए।

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