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चक्रवाती तूफान दाना का खतरा: ओडिशा और पश्चिम बंगाल में हाई अलर्ट, बड़े पैमाने पर निकासी अभियान, 150 से अधिक ट्रेनें रद्द

चक्रवात दाना

चक्रवाती तूफान दाना के खतरे को देखते हुए ओडिशा और पश्चिम बंगाल सरकारों ने व्यापक सुरक्षा उपायों के तहत संवेदनशील इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का बड़ा अभियान शुरू कर दिया है। तटीय क्षेत्रों में रहने वाले हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है, और स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है। इस आपात स्थिति के मद्देनजर दोनों राज्यों में सभी शिक्षण संस्थानों को बंद रखने के आदेश जारी किए गए हैं, जबकि तटरक्षक बल और आपदा प्रबंधन टीमों को हाई अलर्ट पर रखा गया है।

मौसम विभाग की चेतावनी के अनुसार, चक्रवात दाना 24 अक्टूबर की रात या 25 अक्टूबर की सुबह के बीच पुरी और सागर द्वीप के तटों से टकरा सकता है। संभावित भारी बारिश, तेज हवाओं और समुद्री उफान से नुकसान की आशंका को देखते हुए प्रशासन द्वारा व्यापक तैयारी की गई है।

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तूफान की गंभीरता को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने 150 से अधिक ट्रेनों को रद्द कर दिया है, जो प्रभावित क्षेत्रों से होकर गुजरने वाली थीं। रद्द की गई प्रमुख ट्रेनों में हावड़ा-सिकंदराबाद फलकनुमा एक्सप्रेस, कामाख्या-यशवंतपुर एसी एक्सप्रेस, हावड़ा-पुरी शताब्दी एक्सप्रेस, हावड़ा-भुवनेश्वर शताब्दी एक्सप्रेस और हावड़ा-यशवंतपुर एक्सप्रेस शामिल हैं। इन ट्रेनों को 23 से 25 अक्टूबर के बीच अपने प्रस्थान बिंदु से रवाना होना था। रेलवे अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि अगर हालात और बिगड़ते हैं तो और भी ट्रेनों को निरस्त किया जा सकता है, जिससे यात्री सेवाओं में और रुकावटें आएंगी।

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तूफान के संभावित विनाशकारी प्रभाव को देखते हुए सभी जिलों में प्रशासन ने तात्कालिक आपात योजनाएं लागू कर दी हैं। प्रभावित इलाकों में बिजली आपूर्ति, जल निकासी और चिकित्सा सेवाओं को बनाए रखने के लिए विशेष टीमें तैनात की गई हैं। साथ ही, हेलीकॉप्टर और नौसेना के जहाजों को भी बचाव अभियान के लिए तैयार रखा गया है, ताकि किसी भी अप्रत्याशित स्थिति से निपटा जा सके। तटीय क्षेत्रों में मछुआरों को पहले ही समुद्र में जाने से रोक दिया गया है, और उन्हें अगले आदेश तक समुद्र से दूर रहने के निर्देश दिए गए हैं।

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ओडिशा और पश्चिम बंगाल सरकारों ने नागरिकों से अपील की है कि वे शांत रहें और प्रशासन के दिशा-निर्देशों का पालन करें। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) की टीमें भी स्थिति पर नजर रख रही हैं और जरूरत पड़ने पर तुरंत राहत एवं बचाव कार्य शुरू करने के लिए तैयार हैं।

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यह चक्रवात तटीय क्षेत्रों के लिए एक बड़ा संकट साबित हो सकता है, और प्रशासन की पूरी कोशिश है कि इस प्राकृतिक आपदा से होने वाले नुकसान को कम से कम किया जा सके। नागरिकों से आग्रह किया गया है कि वे अनावश्यक रूप से बाहर न निकलें और प्रशासन द्वारा दिए गए दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करें।

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