हाईकोर्ट से राहत, वासेपुर गैंगस्टर फहीम खान होंगे रिहा

Faheem Khan

75 वर्षीय फहीम खान की खराब तबीयत और उम्र को देखते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने दी राहत, 6 सप्ताह में रिहाई का आदेश

धनबाद: वासेपुर के कुख्यात गैंगस्टर फहीम खान को झारखंड हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। अदालत ने उनकी उम्र और खराब स्वास्थ्य स्थिति को देखते हुए रिहाई का आदेश दिया है। फहीम खान वर्तमान में जमशेदपुर के घाघीडीह जेल में बंद हैं
और सगीर हसन सिद्दीकी हत्याकांड में उम्रकैद की सजा काट रहे थे।

छह सप्ताह में होगी रिहाई का आदेश
न्यायमूर्ति अनिल कुमार चौधरी की अदालत ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि छह सप्ताह के भीतर फहीम खान को जेल से रिहा किया जाए। फहीम की ओर से अधिवक्ता शहबाज सलाम ने अदालत में पैरवी की थी। उन्होंने बताया कि 29 नवंबर 2024 को फहीम खान ने रिहाई के लिए याचिका दायर की थी, जिसमें उन्होंने बढ़ती उम्र और गंभीर बीमारियों का हवाला दिया था।

अदालत ने इन तथ्यों को ध्यान में रखते हुए यह आदेश पारित किया।

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1989 के सगीर हसन सिद्दीकी हत्याकांड का आरोपी
गौरतलब है कि 1989 में सगीर हसन सिद्दीकी की हत्या के मामले में फहीम खान को उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। वह 2009 से जेल में बंद हैं और अब झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है।

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परिवार में खुशी, मिठाई बांटकर मनाया जश्न
हाईकोर्ट के आदेश के बाद फहीम खान के परिवार में खुशी का माहौल है। उनके बेटे इकबाल खान ने पिता की रिहाई की खबर मिलते ही परिजनों और समर्थकों के साथ मिठाई बांटकर जश्न मनाया।

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इकबाल खान ने कहा —

“हमें न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था और आज हमें न्याय मिला है। हम धनबाद पुलिस और अदालत के प्रति आभार जताते हैं।”

उन्होंने युवाओं को संदेश दिया कि —

“अपराध का रास्ता कभी सही परिणाम नहीं देता। समाज की मुख्यधारा में लौटना ही सच्चा रास्ता है।”

धनबाद में फिर चर्चा में आया वासेपुर गैंग
फहीम खान की रिहाई के आदेश के बाद एक बार फिर वासेपुर गैंगवार की पुरानी कहानी चर्चाओं में है। धनबाद के अपराध इतिहास में फहीम खान का नाम सबसे प्रभावशाली गैंगस्टरों में से एक रहा है।

उनकी गिरफ्तारी के बाद इलाके में अपराध पर नियंत्रण हुआ था, लेकिन अब रिहाई के आदेश के बाद प्रशासन सतर्क हो गया है। झारखंड हाईकोर्ट के आदेश के बाद फहीम खान की रिहाई कानूनी और सामाजिक दोनों दृष्टि से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जहां एक ओर यह न्यायपालिका के मानवीय दृष्टिकोण को दर्शाता है, वहीं दूसरी ओर प्रशासन के लिए कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती भी पेश करता है।

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