कांग्रेस और सहयोगी दलों की सरकारें ‘पेपर लीक की फैक्ट्री’ बनीं, युवाओं के भविष्य पर राजनीति बंद करे विपक्ष : डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा
रांची: राज्यसभा सांसद डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों पर पेपर लीक के मुद्दे को लेकर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि जिन राज्यों में कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की सरकारें रहीं, वहां लगातार प्रश्नपत्र लीक, परीक्षाओं के रद्द होने और भर्ती प्रक्रियाओं में अनियमितताओं के मामले सामने आए। उन्होंने विपक्ष से युवाओं के भविष्य पर राजनीति बंद करने की अपील की। यह बयान डॉ. वर्मा की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में दिया गया है।
“कांग्रेस युवाओं को पारदर्शी भर्ती व्यवस्था देने में विफल”
डॉ. वर्मा ने कहा कि कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों की सरकारें युवाओं को निष्पक्ष और पारदर्शी भर्ती व्यवस्था उपलब्ध कराने में असफल रही हैं। उनका आरोप है कि इन सरकारों के कार्यकाल में परीक्षा माफिया, दलालों और भ्रष्ट तंत्र को संरक्षण मिलने के आरोप लगातार सामने आते रहे, जबकि सरकारों ने अपनी प्रशासनिक जिम्मेदारी स्वीकार करने के बजाय राजनीतिक बयानबाजी की। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 2018 से 2026 के बीच कांग्रेस, उसके सहयोगी दलों और अन्य गैर-एनडीए सरकारों वाले कम-से-कम 10 राज्यों में 13 बड़े पेपर लीक या परीक्षा अनियमितता के मामले सामने आए, जिनके कारण कई परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं और लाखों अभ्यर्थी प्रभावित हुए।
झारखंड सरकार पर भी साधा निशाना
डॉ. वर्मा ने झारखंड की झामुमो-कांग्रेस-राजद गठबंधन सरकार पर भी आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि 28 जनवरी 2024 को आयोजित JSSC संयुक्त स्नातक स्तरीय प्रतियोगिता परीक्षा की तीसरी पाली का सामान्य ज्ञान प्रश्नपत्र लीक होने के कारण परीक्षा रद्द करनी पड़ी थी। इसके अलावा उन्होंने कहा कि फरवरी 2025 में झारखंड अधिविद्य परिषद (JAC) की कक्षा 10वीं की हिंदी और विज्ञान परीक्षाओं के प्रश्नपत्र लीक होने के कारण दोनों परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं। उनके अनुसार, यह राज्य सरकार की परीक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
अन्य राज्यों का भी किया उल्लेख
प्रेस विज्ञप्ति में डॉ. वर्मा ने कर्नाटक, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान, पंजाब, महाराष्ट्र, केरल, बिहार, ओडिशा और तेलंगाना का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इन राज्यों में विभिन्न समय पर पेपर लीक या परीक्षा अनियमितताओं के कारण परीक्षाएं रद्द करनी पड़ीं या दोबारा आयोजित करनी पड़ीं। उन्होंने कहा कि इन घटनाओं से लाखों छात्रों को मानसिक, आर्थिक और शैक्षणिक नुकसान हुआ।
“पेपर लीक संगठित अपराध है”
डॉ. वर्मा ने कहा कि पेपर लीक केवल प्रशासनिक लापरवाही नहीं बल्कि युवाओं के भविष्य के साथ किया गया संगठित अपराध है। उन्होंने कहा कि जो सरकारें परीक्षा की गोपनीयता सुनिश्चित नहीं कर सकतीं, उन्हें युवाओं के भविष्य पर बड़ी-बड़ी बातें करने का नैतिक अधिकार नहीं है।
सरकार से की ये मांग
प्रेस विज्ञप्ति में डॉ. वर्मा ने मांग की कि—
- प्रत्येक पेपर लीक मामले की समयबद्ध एवं निष्पक्ष जांच हो।
- दोषी अधिकारियों, परीक्षा एजेंसियों, परीक्षा माफिया और लाभार्थियों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाए।
- दोषियों की संपत्ति जब्त की जाए।
- प्रभावित अभ्यर्थियों को आर्थिक क्षतिपूर्ति दी जाए।
- राज्यों की परीक्षा एजेंसियों का स्वतंत्र सुरक्षा एवं तकनीकी ऑडिट कराया जाए।
विपक्ष से मांगी माफी
डॉ. प्रदीप कुमार वर्मा ने कहा कि कांग्रेस और विपक्षी दलों को पेपर लीक के मुद्दे पर राजनीति करने के बजाय अपने शासनकाल के दौरान हुई घटनाओं पर जवाब देना चाहिए और युवाओं से सार्वजनिक रूप से माफी मांगनी चाहिए।






