JPSC Scam: जांच में बड़ा कदम, 2204 सफल अभ्यर्थियों से CID ने मांगी OMR शीट की कार्बन कॉपी
पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते से पूछताछ भी जारी
रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच कर रही अपराध अनुसंधान विभाग (CID) ने जांच को और तेज कर दिया है। विशेष जांच दल (SIT) ने अब प्रारंभिक परीक्षा में सफल हुए 2,204 अभ्यर्थियों से उनकी OMR शीट की कार्बन कॉपी उपलब्ध कराने की अपील की है। जांच एजेंसी का कहना है कि इस कदम का उद्देश्य अभ्यर्थियों के पास मौजूद OMR शीट और आयोग के रिकॉर्ड में उपलब्ध OMR शीट का मिलान कर किसी संभावित विसंगति या छेड़छाड़ की जांच करना है। CID की इस पहल को जांच का अहम चरण माना जा रहा है, क्योंकि इससे परीक्षा परिणामों से जुड़े दस्तावेजों की तकनीकी और तथ्यात्मक जांच को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
अभ्यर्थियों से PDF या स्पष्ट फोटो भेजने की अपील
विशेष जांच दल (SIT) ने सफल अभ्यर्थियों से अनुरोध किया है कि वे पेपर-1 और पेपर-2 दोनों की OMR शीट की कार्बन कॉपी का PDF तैयार करें या उसकी स्पष्ट तस्वीर लेकर निर्धारित माध्यम से भेजें। CID ने दस्तावेज भेजने के लिए निम्नलिखित संपर्क जारी किए हैं—
व्हाट्सएप नंबर: 9934309058
ईमेल आईडी: Complainjpsc.cid@jhpolice.gov.in
जांच एजेंसी ने कहा है कि अभ्यर्थियों का सहयोग जांच को निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
OMR शीट के मिलान का क्या है उद्देश्य?
CID के अनुसार, जांच का मुख्य उद्देश्य अभ्यर्थियों के पास उपलब्ध OMR शीट की कार्बन कॉपी और आयोग के रिकॉर्ड में सुरक्षित मूल OMR शीट का मिलान करना है। इस प्रक्रिया के माध्यम से यह पता लगाया जाएगा कि दोनों दस्तावेजों में किसी प्रकार का अंतर, बदलाव या कथित छेड़छाड़ तो नहीं हुई है। यदि जांच के दौरान किसी अभ्यर्थी की OMR शीट में कोई विसंगति सामने आती है, तो संबंधित अभ्यर्थी को आगे पूछताछ के लिए बुलाया जा सकता है। हालांकि, CID ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी उपलब्ध दस्तावेजों और तथ्यों का समग्र परीक्षण किया जाएगा।
जांच में लगातार तेजी
JPSC की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित गड़बड़ियों को लेकर CID पिछले कुछ दिनों से लगातार कार्रवाई कर रही है। दस्तावेजों की जांच के साथ-साथ आयोग के अधिकारियों और परीक्षा प्रक्रिया से जुड़े लोगों से भी पूछताछ का सिलसिला जारी है। जांच एजेंसी का प्रयास है कि परीक्षा संचालन, मूल्यांकन प्रक्रिया, OMR प्रबंधन और परिणाम तैयार करने से संबंधित सभी पहलुओं की स्वतंत्र और साक्ष्य-आधारित जांच की जाए।
पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते से लगातार पूछताछ
इसी मामले में JPSC के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते से भी CID लगातार पूछताछ कर रही है। मंगलवार को उनसे लगातार दूसरे दिन CID मुख्यालय में कई घंटों तक पूछताछ की गई। इससे पहले भी उनसे लगभग आठ घंटे तक पूछताछ की जा चुकी है। सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान अधिकारियों ने परीक्षा संचालन, चयन प्रक्रिया, निर्णय लेने की प्रक्रिया और आयोग के प्रशासनिक कार्यों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर सवाल किए। जानकारी के अनुसार, CID ने एल. खियांग्ते को 31 जुलाई को एक बार फिर पूछताछ के लिए बुलाया है और उनसे कुछ आवश्यक दस्तावेज साथ लाने को भी कहा गया है। हालांकि एजेंसी ने आधिकारिक तौर पर यह नहीं बताया है कि किन दस्तावेजों की मांग की गई है।
पहले भी हुई थी कार्रवाई
इससे पहले CID, एल. खियांग्ते के कांके स्थित सरकारी आवास पर भी तलाशी ले चुकी है। वहीं आयोग से जुड़े कई अधिकारियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों से भी पूछताछ की जा चुकी है। जांच एजेंसी लगातार दस्तावेजों, बयानों और तकनीकी साक्ष्यों का मिलान कर रही है।
निष्पक्ष और साक्ष्य-आधारित जांच पर जोर
CID का कहना है कि पूरी जांच तथ्यपरक, निष्पक्ष और साक्ष्य-आधारित तरीके से की जा रही है। किसी भी व्यक्ति या अभ्यर्थी की भूमिका के संबंध में कोई अंतिम निष्कर्ष तभी निकाला जाएगा, जब सभी उपलब्ध दस्तावेजों, बयानों और तकनीकी साक्ष्यों का समग्र परीक्षण पूरा हो जाएगा। जांच एजेंसी का उद्देश्य पूरे मामले की प्रत्येक कड़ी की स्वतंत्र रूप से जांच करना और यदि कहीं कोई अनियमितता हुई है तो उसके वास्तविक तथ्यों को सामने लाना है।
अभ्यर्थियों की निगाहें जांच पर
JPSC की 14वीं सिविल सेवा परीक्षा को लेकर पिछले कई महीनों से विवाद बना हुआ है। बड़ी संख्या में अभ्यर्थी निष्पक्ष जांच और पारदर्शी कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। ऐसे में CID द्वारा OMR शीट की कार्बन कॉपी मंगाने के फैसले को जांच की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब अभ्यर्थियों और राज्यभर के युवाओं की नजर इस बात पर है कि जांच एजेंसी दस्तावेजों के मिलान और पूछताछ के बाद क्या निष्कर्ष निकालती है तथा आगे क्या कार्रवाई की जाती है।






