JPSC-JSSC आंदोलन में बड़ा मोड़: सरकार से वार्ता को तैयार छात्र, 4 मंत्रियों की हाई-लेवल कमेटी करेगी बातचीत
12 दिन के आंदोलन के बाद बनी सहमति
मानसून सत्र में छात्र आंदोलन पर सरकार-विपक्ष आमने-सामने

रांची: झारखंड में JPSC, JSSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर पिछले 12 दिनों से जारी छात्र आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। राज्य सरकार और आंदोलनरत छात्रों के बीच गतिरोध कम होता दिखाई दे रहा है। पहले सरकार के प्रस्ताव को ठुकराने वाले छात्रों ने अब सशर्त बातचीत के लिए सहमति दे दी है। छात्र नेताओं ने स्पष्ट किया है कि वार्ता में कौन-कौन शामिल होगा, बातचीत कब और कहां होगी, इसका अंतिम निर्णय आंदोलनकारियों की बैठक के बाद लिया जाएगा। दूसरी ओर, सरकार ने चार मंत्रियों और एक अपर मुख्य सचिव को शामिल करते हुए उच्च-स्तरीय वार्ता समिति का गठन कर दिया है। इस बीच भाजपा भी खुलकर आंदोलन के समर्थन में उतर आई है, जबकि आगामी विधानसभा मानसून सत्र में यह मुद्दा सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सबसे बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनने जा रहा है।
छात्र बोले- बातचीत करेंगे, लेकिन फैसला सामूहिक होगा
आंदोलनरत छात्रों के प्रवक्ता पीयूष कुमार ने बताया कि सरकार के साथ वार्ता को लेकर आंदोलनकारी सकारात्मक हैं। उन्होंने कहा कि बुधवार रात छात्रों की बैठक होगी, जिसमें यह तय किया जाएगा कि सरकार से बातचीत के लिए प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन शामिल होगा और वार्ता किस स्थान एवं किस समय होगी। पीयूष कुमार ने कहा कि यह आंदोलन किसी एक संगठन का नहीं, बल्कि पूरे राज्य के प्रतियोगी छात्रों का है। इसलिए वार्ता का हर निर्णय सामूहिक रूप से लिया जाएगा।

पहले ठुकराया था प्रस्ताव, अब बनी सहमति
बुधवार दोपहर सरकार की ओर से रांची के एसडीएम और एडीएम (लॉ एंड ऑर्डर) आंदोलन स्थल पहुंचे थे। उन्होंने मुख्यमंत्री की ओर से छात्रों को वार्ता का प्रस्ताव दिया था और प्रतिनिधियों को बातचीत के लिए आमंत्रित किया था। उस समय छात्रों ने आंदोलन स्थल छोड़कर कहीं और जाकर बातचीत करने से साफ इनकार कर दिया था। उनका कहना था कि मुख्यमंत्री स्वयं धरनास्थल पर आकर छात्रों से संवाद करें। हालांकि बाद में आंदोलनकारियों के बीच लंबी चर्चा के बाद सरकार के साथ वार्ता करने पर सहमति बनी।
सरकार ने बनाई हाई-लेवल कमेटी
छात्रों से संवाद के लिए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने उच्च-स्तरीय कमेटी का गठन किया है। इस समिति में विभिन्न सहयोगी दलों के वरिष्ठ मंत्रियों को शामिल किया गया है। कमेटी में शामिल हैं—
- उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू
- ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह
- समाज कल्याण मंत्री चमरा लिंडा
- श्रम मंत्री संजय प्रसाद यादव
- अपर मुख्य सचिव अजय कुमार सिंह
सरकार का कहना है कि यह समिति छात्रों की मांगों को सुनेगी और समाधान की दिशा में आगे बढ़ेगी।

भाजपा भी खुलकर छात्रों के समर्थन में
इसी बीच नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी भी जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम पहुंचे और आंदोलनरत छात्रों से मुलाकात की। उन्होंने भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेता देवेंद्र नाथ महतो का हालचाल जाना और आंदोलन को अपना समर्थन दिया। बाबूलाल मरांडी ने कहा कि छात्रों की मांगें पूरी तरह न्यायसंगत हैं और भारतीय जनता पार्टी उनके साथ खड़ी है। उन्होंने सरकार से भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और छात्रों की मांगों पर शीघ्र निर्णय लेने की अपील की।

मानसून सत्र में गूंजेगा छात्र आंदोलन
इधर, 6 अगस्त से शुरू होने वाले झारखंड विधानसभा के मानसून सत्र से पहले मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में डॉ. श्रीकृष्ण लोक प्रशासन संस्थान (ATI), रांची में सत्ता पक्ष के मंत्रियों और विधायकों की महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक में आगामी विधानसभा सत्र की रणनीति पर विस्तार से चर्चा की गई। इसमें प्रदेश कांग्रेस प्रभारी के. राजू भी विशेष रूप से मौजूद रहे। सूत्रों के अनुसार सत्ता पक्ष ने मानसून सत्र में विपक्ष के छात्र आंदोलन संबंधी आरोपों का मजबूती से जवाब देने की रणनीति तैयार की है।

सरकार की रणनीति क्या होगी?
सूत्रों के मुताबिक सरकार सदन में यह मुद्दा उठाएगी कि प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं के मामले केवल वर्तमान सरकार तक सीमित नहीं हैं। सत्ता पक्ष भाजपा शासनकाल में हुई कथित गड़बड़ियों और वर्षों से लंबित सीबीआई जांच के मामलों को भी सदन में उठाएगा। इसके अलावा केंद्र सरकार द्वारा छात्रवृत्ति की राशि के वितरण में कथित भेदभाव का मुद्दा भी विधानसभा में जोर-शोर से उठाने की तैयारी की गई है। बैठक में सत्ता पक्ष के सभी विधायकों को निर्देश दिया गया है कि वे पूरी तैयारी के साथ सदन में उपस्थित रहें और विपक्ष के हर आरोप का तथ्यात्मक जवाब दें।
राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों मोर्चों पर बढ़ी हलचल
एक ओर सरकार आंदोलनरत छात्रों के साथ बातचीत कर समाधान निकालने की कोशिश कर रही है, वहीं दूसरी ओर विधानसभा के भीतर भी इस मुद्दे पर तीखी राजनीतिक बहस की पूरी संभावना है। भाजपा छात्रों के समर्थन में खुलकर मैदान में उतर चुकी है, जबकि सरकार संवाद और जांच दोनों के जरिए स्थिति संभालने का प्रयास कर रही है। अब सबकी नजर प्रस्तावित वार्ता पर टिकी है। यदि बातचीत सकारात्मक रहती है तो लगभग दो सप्ताह से जारी आंदोलन के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति हो सकती है। वहीं अगर वार्ता विफल रहती है तो यह मुद्दा विधानसभा के मानसून सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच बड़ा राजनीतिक संघर्ष बन सकता है।






