रेलवे में रिश्वतखोरी का बड़ा मामला, CBI ने चीफ हेल्थ इंस्पेक्टर को ₹10 हजार लेते दबोचा
मेडिकल छुट्टी मंजूर करने के लिए मांगी थी ₹25 हजार की घूस
पहली किस्त लेते ही CBI ने किया गिरफ्तार
बोकारो: साउथ ईस्टर्न रेलवे में रिश्वतखोरी के मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने बड़ी कार्रवाई की है। सीबीआई ने भोजुडीह में पदस्थापित चीफ हेल्थ इंस्पेक्टर चंद्रशेखर गुप्ता को एक रेलवे कर्मचारी से 10 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। आरोप है कि मेडिकल छुट्टी स्वीकृत करने के एवज में अधिकारी ने कर्मचारी से 25 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी।
मेडिकल छुट्टी के बदले मांगी थी ₹25 हजार की रिश्वत
मामला साउथ ईस्टर्न रेलवे के बोकारो जिले के भोजुडीह क्षेत्र का बताया जा रहा है। जानकारी के मुताबिक, एक रेलवे कर्मचारी ने सीबीआई से शिकायत की थी कि चीफ हेल्थ इंस्पेक्टर चंद्रशेखर गुप्ता उसकी मेडिकल छुट्टी स्वीकृत करने के बदले 25 हजार रुपये की मांग कर रहे हैं। शिकायत मिलने के बाद सीबीआई ने मामले की प्रारंभिक जांच की। जांच के दौरान शिकायत में लगाए गए रिश्वत मांगने के आरोपों की पुष्टि होने के बाद एजेंसी ने आरोपी अधिकारी को पकड़ने के लिए जाल बिछाया।
पहले ₹10 हजार लेने पर हुआ तैयार
सीबीआई के अनुसार, बातचीत के दौरान चंद्रशेखर गुप्ता ने तत्काल 10 हजार रुपये लेने और मेडिकल छुट्टी स्वीकृत करने पर सहमति जताई। बाकी रकम बाद में लेने की बात तय हुई। इसके बाद सीबीआई ने शिकायतकर्ता के साथ मिलकर पूरी कार्रवाई की योजना बनाई। तय समय और स्थान के अनुसार जैसे ही अधिकारी ने 10 हजार रुपये की रिश्वत स्वीकार की, सीबीआई की टीम ने उसे रंगे हाथ पकड़ लिया।
गिरफ्तारी के बाद घर और कार्यालय में तलाशी
रिश्वत लेते गिरफ्तार किए जाने के बाद सीबीआई ने आरोपी अधिकारी के आवास और कार्यालय की तलाशी भी ली। एजेंसी की कार्रवाई के दौरान कई दस्तावेज और अन्य सामग्री की जांच की गई। फिलहाल सीबीआई की जांच जारी है और यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि रिश्वतखोरी का यह मामला केवल एक कर्मचारी तक सीमित था या इसके पीछे कोई व्यापक नेटवर्क भी काम कर रहा था।
रेलवे में भ्रष्टाचार पर CBI की कार्रवाई
मेडिकल छुट्टी जैसे कर्मचारी से जुड़े नियमित प्रशासनिक काम के बदले कथित तौर पर रिश्वत मांगने का मामला सामने आने के बाद रेलवे महकमे में भी हड़कंप की स्थिति है। सीबीआई अब गिरफ्तार अधिकारी से पूछताछ के साथ मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर सकती है। हालांकि, आरोपी पर लगाए गए आरोप जांच का विषय हैं और अंतिम दोषसिद्धि अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगी।
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