मानवता शर्मसार: 20 हजार रुपये के लिए बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंचा भाई

Odisha Skeleton Bank Case

तीन महीने तक चक्कर काटता रहा, अंत में कब्र से निकाल लाया शव

मुनादी लाइव : ओडिशा के क्योंझर जिले से एक ऐसी घटना सामने आई है, जिसने इंसानियत को झकझोर कर रख दिया है। यहां एक आदिवासी व्यक्ति अपनी मृत बहन के खाते से मात्र 20 हजार रुपये निकालने के लिए उसका कंकाल कंधे पर उठाकर बैंक पहुंच गया। यह मामला केवल एक व्यक्ति की मजबूरी नहीं, बल्कि सिस्टम की संवेदनहीनता और जागरूकता की कमी की भी कहानी बयां करता है।

कौन है यह शख्स, क्या है पूरा मामला
जीतू मुंडा (50) ओडिशा के डियानाली गांव का रहने वाला है। उसकी बड़ी बहन कालरा मुंडा (56) की मौत 26 जनवरी 2026 को हो गई थी। जीतू अपनी बहन के बैंक खाते में जमा करीब 20 हजार रुपये निकालना चाहता था, लेकिन इसके लिए वह पिछले तीन महीनों से लगातार बैंक के चक्कर काट रहा था। उसका कहना है कि बैंक अधिकारियों ने उससे बार-बार खाताधारक को लाने की बात कही।

निरक्षरता और प्रक्रिया की जानकारी का अभाव
जीतू मुंडा निरक्षर है और बैंकिंग प्रक्रियाओं से पूरी तरह अनजान है। उसने कई बार बैंक अधिकारियों को बताया कि उसकी बहन की मौत हो चुकी है, लेकिन वह आवश्यक दस्तावेज और प्रक्रिया को समझ नहीं पाया। आखिरकार, हताश होकर उसने एक ऐसा कदम उठाया, जिसने पूरे देश को स्तब्ध कर दिया।

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कब्र से निकाला शव, कंधे पर रखकर पहुंचा बैंक
बैंक से पैसे निकालने की कोशिश में असफल रहने के बाद जीतू मुंडा ने अपनी बहन के शव को कब्र से निकाल लिया और उसका कंकाल कंधे पर उठाकर ओडिशा ग्रामीण बैंक की मालीपोसी शाखा पहुंच गया। जब वह बैंक पहुंचा, तो वहां मौजूद कर्मचारी और लोग यह दृश्य देखकर स्तब्ध रह गए। इस घटना का वीडियो किसी ने बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।

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बैंक की सफाई: प्रक्रिया का पालन जरूरी
इस मामले में ओडिशा ग्रामीण बैंक ने सफाई देते हुए कहा कि बैंक ने कभी भी मृत व्यक्ति को लाने की मांग नहीं की थी। बैंक के अनुसार, खाताधारक की मृत्यु के बाद राशि निकालने के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र और अन्य दस्तावेज जरूरी होते हैं। बैंक ने यह भी कहा कि जीतू मुंडा को प्रक्रिया समझाने की कोशिश की गई थी, लेकिन जागरूकता की कमी और गलतफहमी के कारण यह घटना हुई।

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प्रशासन और सरकार का रुख
घटना के सामने आने के बाद प्रशासन हरकत में आया। स्थानीय अधिकारियों ने जीतू मुंडा को पूरी प्रक्रिया समझाई और जल्द ही पैसे दिलाने का आश्वासन दिया। ओडिशा सरकार के राजस्व मंत्री सुरेश पुजारी ने भी इस घटना को गंभीरता से लिया और जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने कहा कि इस मामले में अगर किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है, तो संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

फिर से दफनाया गया शव
प्रशासन के हस्तक्षेप के बाद मृतका के शव को दोबारा कब्रिस्तान में दफनाया गया। इस पूरी घटना ने यह दिखा दिया कि कैसे जागरूकता की कमी और सरकारी प्रक्रियाओं की जटिलता आम लोगों के लिए बड़ी परेशानी बन सकती है।

समाज के लिए एक बड़ा सवाल
यह घटना सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक बड़ा सवाल है—क्या हमारी व्यवस्था इतनी जटिल हो गई है कि एक गरीब और अनपढ़ व्यक्ति को अपने हक के पैसे के लिए इस हद तक जाना पड़े? यह मामला यह भी बताता है कि सरकारी योजनाओं और बैंकिंग प्रक्रियाओं को आम लोगों के लिए सरल और सुलभ बनाना कितना जरूरी है।

ओडिशा की यह घटना मानवता को झकझोर देने वाली है। एक भाई का अपनी मृत बहन के प्रति प्रेम और मजबूरी, दोनों इस घटना में साफ नजर आते हैं। अब जरूरत है कि ऐसी घटनाओं से सबक लेकर सिस्टम को और संवेदनशील और सरल बनाया जाए, ताकि भविष्य में किसी को अपने हक के लिए इतनी बड़ी कीमत न चुकानी पड़े।

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