IAS विनय कुमार चौबे को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत, 14 महीने बाद जेल से रिहाई का रास्ता साफ
रांची: झारखंड के चर्चित और निलंबित वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। करीब 14 महीने से जेल में बंद विनय चौबे की जमानत याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने मंजूर कर लिया है। शीर्ष अदालत के इस फैसले के बाद उनके जेल से बाहर आने का रास्ता लगभग साफ हो गया है। यह राहत उन्हें हजारीबाग वन भूमि घोटाला मामले में मिली है, जिसमें वे नवंबर 2025 से न्यायिक हिरासत में थे।
सुप्रीम कोर्ट की दो सदस्यीय पीठ जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम. पंचोली ने मामले की सुनवाई करते हुए उनकी विशेष अनुमति याचिका (SLP) स्वीकार की और जमानत प्रदान कर दी। हालांकि अदालत ने राज्य सरकार को यह स्वतंत्रता भी दी है कि यदि जमानत की शर्तों का उल्लंघन होता है या नए तथ्य सामने आते हैं, तो वह कानूनी प्रक्रिया के तहत जमानत रद्द कराने के लिए पुनः अदालत का दरवाजा खटखटा सकती है।
हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने पर पहुंचे थे सुप्रीम कोर्ट
इससे पहले झारखंड हाईकोर्ट ने विनय कुमार चौबे की जमानत याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी (क्रिमिनल) दाखिल कर राहत की मांग की। सुनवाई के दौरान उनके अधिवक्ताओं ने अदालत को बताया कि वे लंबे समय से न्यायिक हिरासत में हैं और जांच एजेंसियों के साथ सहयोग कर रहे हैं। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें जमानत देने का फैसला सुनाया। इस आदेश के बाद अब उनकी रिहाई की औपचारिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
20 मई 2025 को हुई थी गिरफ्तारी
भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने वरिष्ठ आईएएस अधिकारी विनय कुमार चौबे को 20 मई 2025 को गिरफ्तार किया था। गिरफ्तारी के बाद उन्हें विभिन्न मामलों में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया था। हजारीबाग वन भूमि घोटाले से संबंधित प्राथमिकी संख्या 11/2025 में वे नवंबर 2025 से जेल में थे। इस मामले में उन्हें अब सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली है। लगभग 14 महीने जेल में रहने के बाद अब उनकी रिहाई की संभावना प्रबल हो गई है।
चार प्रमुख मामलों में मिल चुकी है जमानत
विनय कुमार चौबे के अधिवक्ता देवेश अजमानी के अनुसार, उनके खिलाफ एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने कुल चार अलग-अलग मामले दर्ज किए थे। इनमें शामिल हैं—
- हजारीबाग वन भूमि घोटाला
- जमीन ट्रांसफर से जुड़ा मामला
- आय से अधिक संपत्ति (Disproportionate Assets) मामला
- झारखंड शराब घोटाला
अधिवक्ता के मुताबिक, हजारीबाग वन भूमि घोटाला मामले में अब सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिल गई है, जबकि अन्य मामलों में उन्हें पहले ही अदालतों से डिफॉल्ट बेल प्राप्त हो चुकी है।

जगन्नाथपुर थाने का मामला भी दर्ज
विनय कुमार चौबे के खिलाफ जगन्नाथपुर थाना में भी एक मामला दर्ज है। हालांकि अधिवक्ता का कहना है कि इस मामले में पुलिस ने उन्हें कभी रिमांड पर नहीं लिया। अब विभिन्न मामलों में जमानत मिलने के बाद उनकी रिहाई का रास्ता लगभग पूरी तरह साफ माना जा रहा है। हालांकि अंतिम रिहाई संबंधित अदालत की औपचारिकताओं और जेल प्रशासन द्वारा आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही संभव होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने दी राज्य सरकार को छूट
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यदि राज्य सरकार को लगता है कि जमानत की शर्तों का उल्लंघन हुआ है या जांच प्रभावित होने की आशंका है, तो वह कानून के अनुसार जमानत निरस्त कराने के लिए संबंधित अदालत में आवेदन कर सकती है।
इस प्रकार अदालत ने एक ओर आरोपी को राहत दी है, वहीं दूसरी ओर जांच प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए राज्य सरकार के अधिकार भी सुरक्षित रखे हैं।
मामला क्यों है चर्चा में?
हजारीबाग वन भूमि घोटाला झारखंड के चर्चित मामलों में से एक है। इस मामले में सरकारी भूमि के कथित अवैध हस्तांतरण और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में अनियमितताओं के आरोपों की जांच चल रही है। ACB इस मामले में कई पहलुओं की जांच कर रही है और विभिन्न अधिकारियों एवं संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ कर चुकी है। विनय कुमार चौबे की गिरफ्तारी के बाद यह मामला और अधिक चर्चा में आया था। अब सुप्रीम कोर्ट से मिली जमानत के बाद यह प्रकरण एक बार फिर सुर्खियों में है।
आगे क्या होगा?
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद संबंधित निचली अदालत में आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी। जमानत बांड और अन्य औपचारिकताओं के बाद जेल प्रशासन रिहाई की प्रक्रिया पूरी करेगा। वहीं दूसरी ओर ACB की जांच अपने स्तर पर जारी रहेगी।






