दिशोम गुरु शिबू सोरेन को भावभीनी श्रद्धांजलि: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने किया प्रतिमा का अनावरण, 105.2 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं की दी सौगात
नेमरा में 14 फीट ऊंची प्रतिमा का अनावरण, दुमका में भी उमड़ा श्रद्धांजलि देने वालों का सैलाब
क्षेत्र को ₹105.2 करोड़ की विकास योजनाओं की सौगात।
विकास मेला एवं पारितोषिक वितरण कार्यक्रम का आयोजन।
गुरुजी का संघर्ष झारखंड की पहचान: हेमंत सोरेन

रामगढ़/दुमका: झारखंड आंदोलन के प्रणेता, पूर्व मुख्यमंत्री और झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के संस्थापक दिशोम गुरु शिबू सोरेन की पहली पुण्यतिथि पर मंगलवार को पूरे राज्य में श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किए गए। मुख्य कार्यक्रम रामगढ़ जिले के नेमरा स्थित लुकैयाटांड़ में आयोजित हुआ, जहां मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने दिशोम गुरु की 14 फीट ऊंची आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री भावुक नजर आए और उन्होंने कहा कि आज का दिन उनके परिवार, झारखंड और देशभर के आदिवासी, दलित, पिछड़े तथा वंचित समाज के लिए बेहद भावुक और मन को भारी कर देने वाला है। कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने क्षेत्र को ₹105.2 करोड़ की विभिन्न विकास योजनाओं की सौगात भी दी। साथ ही विकास मेला-सह-पारितोषिक वितरण कार्यक्रम में शामिल होकर विभिन्न योजनाओं के लाभुकों को लाभ प्रदान किया।
₹105.2 करोड़ की विकास योजनाओं की सौगात
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने क्षेत्र के लिए ₹105.2 करोड़ की विभिन्न विकास योजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। विकास मेला के माध्यम से विभिन्न विभागों की योजनाओं की जानकारी दी गई तथा लाभुकों के बीच परिसंपत्तियों और प्रमाणपत्रों का वितरण भी किया गया। सरकार का कहना है कि इन योजनाओं से क्षेत्र में आधारभूत संरचना, शिक्षा, पेयजल, सड़क, सामाजिक सुरक्षा और ग्रामीण विकास को गति मिलेगी।


‘दिशोम गुरु केवल नेता नहीं, एक विचार थे’
श्रद्धांजलि सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि दिशोम गुरु शिबू सोरेन केवल एक जननेता नहीं थे, बल्कि आदिवासी समाज की अस्मिता, स्वाभिमान और अधिकारों के सबसे मजबूत प्रतीक थे। उन्होंने अपना पूरा जीवन जल, जंगल, जमीन, आदिवासी-मूलवासी पहचान और सामाजिक न्याय की लड़ाई को समर्पित कर दिया। सीएम ने कहा कि झारखंड राज्य का निर्माण केवल एक राजनीतिक उपलब्धि नहीं, बल्कि दशकों तक चले जनसंघर्ष का परिणाम था, जिसका नेतृत्व दिशोम गुरु ने किया। उन्होंने कहा कि गुरुजी ने हमेशा समाज के अंतिम व्यक्ति की आवाज को बुलंद किया और शोषित, वंचित, किसान तथा मजदूरों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया।
शहीद सोबरन मांझी को भी किया याद
मुख्यमंत्री ने अपने दादा एवं झारखंड आंदोलन के प्रेरणास्रोत अमर शहीद सोबरन मांझी को भी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि सोबरन मांझी ने शिक्षक के रूप में समाज को शिक्षित करने का कार्य किया और सामाजिक बदलाव के लिए संघर्ष करते हुए अपने प्राणों का बलिदान दिया।

झामुमो को जनआंदोलन का स्वरूप दिया
हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना कर गुरुजी ने झारखंड की आवाज को राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया। उन्होंने आदिवासी और मूलवासी समाज को संगठित कर सामाजिक न्याय और लोकतांत्रिक अधिकारों की लड़ाई को नई दिशा दी। उन्होंने कहा कि शिक्षा, सामाजिक जागरूकता, सम्मानजनक जीवन और समावेशी विकास के लिए गुरुजी का योगदान हमेशा याद रखा जाएगा। उनका संघर्ष केवल झारखंड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि पूरे देश में सामाजिक न्याय की राजनीति के लिए प्रेरणा बना।

‘सदियों तक प्रेरित करेगा गुरुजी का संघर्ष’
मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्वभर में आदिवासी समुदायों के अधिकार, प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय लोगों की भागीदारी और जनआंदोलनों की चर्चा जब भी होगी, दिशोम गुरु शिबू सोरेन का नाम सम्मान के साथ लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पद्म भूषण से सम्मानित शिबू सोरेन का संघर्ष आने वाली कई पीढ़ियों को प्रेरित करता रहेगा। मुख्यमंत्री ने उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि झारखंड सरकार उनके सपनों का राज्य बनाने की दिशा में निरंतर काम कर रही है।

नेमरा में प्रतिमा का हुआ अनावरण
कार्यक्रम के दौरान सोना-सोबरन प्लस-टू विद्यालय परिसर में स्थापित दिशोम गुरु शिबू सोरेन की 14 फीट ऊंची प्रतिमा का विधिवत अनावरण किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में झामुमो कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि, सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि और आम लोग मौजूद रहे। पूरे परिसर में गुरुजी के नारों और श्रद्धांजलि गीतों के बीच भावुक माहौल देखने को मिला।


दुमका में भी उमड़ा श्रद्धांजलि देने वालों का सैलाब
इधर, दिशोम गुरु की कर्मभूमि दुमका में भी उनकी पहली पुण्यतिथि पर विशेष श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। खिजुरिया स्थित उनके पैतृक आवास पर सुबह से ही कार्यकर्ताओं और समर्थकों की भीड़ जुटने लगी। कार्यक्रम में दुमका विधायक बसंत सोरेन, जामा विधायक डॉ. लुईस मरांडी सहित झामुमो के कई वरिष्ठ नेताओं ने गुरुजी के चित्र पर पुष्पांजलि अर्पित की। श्रद्धांजलि सभा में मौजूद लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिशोम गुरु को श्रद्धांजलि दी। पूरे आयोजन के दौरान वातावरण भावुक बना रहा और बड़ी संख्या में लोगों ने उनके संघर्ष को याद किया।

‘जल, जंगल, जमीन’ की लड़ाई को किया याद
सभा को संबोधित करते हुए नेताओं ने कहा कि शिबू सोरेन ने अपना पूरा जीवन जल, जंगल और जमीन की रक्षा तथा झारखंडी अस्मिता के सम्मान के लिए समर्पित कर दिया। अलग झारखंड राज्य के निर्माण में उनका योगदान ऐतिहासिक और अविस्मरणीय है। दुमका विधायक बसंत सोरेन ने कहा कि गुरुजी की शारीरिक अनुपस्थिति हमेशा महसूस होगी, लेकिन उनके आदर्श, संघर्ष और विचार हमेशा मार्गदर्शन करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गुरुजी के सपनों के अनुरूप समृद्ध, आत्मनिर्भर और खुशहाल झारखंड के निर्माण के लिए लगातार काम कर रही है।

गांव-गांव तक पहुंचाने का लिया संकल्प
श्रद्धांजलि कार्यक्रम में शामिल कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने दिशोम गुरु के विचारों, सिद्धांतों और संघर्ष को गांव-गांव तक पहुंचाने का संकल्प लिया। उन्होंने कहा कि झारखंड की अस्मिता, सामाजिक न्याय और आदिवासी-मूलवासी अधिकारों की रक्षा के लिए गुरुजी के दिखाए रास्ते पर आगे बढ़ना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
परिवार के साथ दी श्रद्धांजलि
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी माता रूपी सोरेन, पत्नी एवं विधायक कल्पना सोरेन, भाई बसंत सोरेन तथा परिवार के अन्य सदस्यों के साथ दिशोम गुरु को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने एक पुत्र के रूप में अपने पिता को नमन करते हुए कहा कि उनका जीवन सामाजिक न्याय, आदिवासी अधिकारों और अलग झारखंड राज्य के संघर्ष को समर्पित रहा।

कई मंत्री, सांसद और विधायक रहे मौजूद
कार्यक्रम में राज्य के मंत्री राधाकृष्ण किशोर, संजय प्रसाद यादव, दीपिका पांडेय सिंह, योगेंद्र प्रसाद, शिल्पी नेहा तिर्की, राज्यसभा सांसद महुआ माजी, विधायक उमाकांत रजक, कुमार जयमंगल सिंह, अमित महतो, ममता देवी, पूर्व मंत्री बेबी देवी, मुख्य सचिव अविनाश कुमार सहित राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी, जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में आम लोग उपस्थित रहे।






