झारखंड के कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा का जामताड़ा में पुलिस एनकाउंटर,अमन साहू के बाद दूसरा बड़ा गैंगस्टर मुठभेड़ में ढेर
जेल शिफ्टिंग के दौरान जवान का हथियार छीनकर फायरिंग की कोशिश की।
साहिबगंज एसपी अमित सिंह और जामताड़ा एसपी शंभू सिंह ने घटना की पुष्टि की।
हत्या, रंगदारी और संगठित अपराध के कई मामलों में आरोपी था सुजीत सिन्हा।
अमन साहू के बाद पुलिस मुठभेड़ में मारा जाने वाला दूसरा बड़ा गैंगस्टर।
रांची/जामताड़ा: झारखंड के संगठित अपराध जगत को बड़ा झटका देते हुए कुख्यात गैंगस्टर सुजीत सिन्हा की रविवार देर रात जामताड़ा जिले में पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में मौत हो गई। पुलिस के अनुसार, सुजीत सिन्हा को साहिबगंज मंडल कारा से धनबाद जेल स्थानांतरित किया जा रहा था। इसी दौरान रास्ते में पुलिस वाहन खराब होने के बाद उसे दूसरी गाड़ी में बैठाने की प्रक्रिया चल रही थी, तभी उसने कथित तौर पर एक पुलिसकर्मी का हथियार छीनकर फायरिंग करने का प्रयास किया। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में उसकी मौत हो गई। घटना की पुष्टि साहिबगंज के पुलिस अधीक्षक अमित सिंह और जामताड़ा के पुलिस अधीक्षक शंभू सिंह ने की है।
जेल शिफ्टिंग के दौरान क्या हुआ?
पुलिस के अनुसार, सुरक्षा कारणों से सुजीत सिन्हा को साहिबगंज जेल से धनबाद जेल स्थानांतरित करने का आदेश जारी किया गया था। कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच उसे जेल से धनबाद ले जाया जा रहा था। रास्ते में जामताड़ा क्षेत्र में पुलिस वाहन का टायर पंचर (या वाहन में तकनीकी खराबी) हो गई। इसके बाद पुलिस उसे दूसरी गाड़ी में स्थानांतरित कर रही थी। इसी दौरान पुलिस का दावा है कि सुजीत सिन्हा ने मौके का फायदा उठाकर एक जवान की सर्विस राइफल छीन ली और पुलिस पर गोली चलाने की कोशिश की। जवाब में पुलिस ने आत्मरक्षा में फायरिंग की, जिसमें वह घायल हो गया। बाद में उसकी मौत हो गई।
झारखंड का कुख्यात अपराधी था सुजीत सिन्हा
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, सुजीत सिन्हा झारखंड के सबसे कुख्यात अपराधियों में शामिल था। उसके खिलाफ हत्या, रंगदारी, फायरिंग, आर्म्स एक्ट और संगठित अपराध से जुड़े कई मामले दर्ज थे। जांच एजेंसियों का आरोप रहा है कि जेल में बंद रहने के बावजूद वह मोबाइल और अपने सहयोगियों के माध्यम से रंगदारी और अन्य आपराधिक गतिविधियों का संचालन करता था। उसका प्रभाव धनबाद, बोकारो, रामगढ़, रांची और आसपास के कई जिलों तक फैला हुआ बताया जाता है।
अमन साहू के बाद दूसरा बड़ा गैंगस्टर
सुजीत सिन्हा की मौत को झारखंड में संगठित अपराध के खिलाफ चल रही कार्रवाई का बड़ा घटनाक्रम माना जा रहा है। इससे पहले 11 मार्च 2025 को कुख्यात गैंगस्टर अमन साहू भी पुलिस मुठभेड़ में मारा गया था। पुलिस के अनुसार, उस समय अमन साहू को छत्तीसगढ़ से रिमांड पर पूछताछ के बाद रांची लाया जा रहा था। पलामू क्षेत्र में उसके सहयोगियों द्वारा कथित तौर पर छुड़ाने की कोशिश के दौरान हुई मुठभेड़ में उसकी मौत हो गई थी। इस तरह अमन साहू और सुजीत सिन्हा दोनों की मौत पुलिस हिरासत या जेल ट्रांजिट के दौरान हुई मुठभेड़ों में हुई।
कभी एक ही गिरोह का हिस्सा थे अमन और सुजीत
पुलिस सूत्रों के अनुसार, अमन साहू और सुजीत सिन्हा कभी झारखंड के एक ही आपराधिक नेटवर्क का हिस्सा माने जाते थे। शुरुआती दौर में दोनों पर मिलकर रंगदारी, ठेकेदारी और संगठित अपराध से जुड़े मामलों को अंजाम देने के आरोप लगे। बाद में दोनों के बीच मतभेद होने पर उन्होंने अलग-अलग गिरोह बना लिए। अमन साहू की मौत के बाद उसके गिरोह की कमान कथित तौर पर राहुल सिंह ने संभाली, जबकि सुजीत सिन्हा का नाम प्रिंस खान गिरोह के साथ जुड़ने की बात जांच एजेंसियां कहती रही हैं।
पत्नी की भी हो चुकी है गिरफ्तारी
इसी वर्ष रांची पुलिस ने सुजीत सिन्हा की पत्नी रिया सिन्हा को भी गिरफ्तार किया था। पुलिस का आरोप था कि वह गिरोह की गतिविधियों में सहयोग करने और नेटवर्क के संचालन में भूमिका निभा रही थीं। इस मामले की जांच भी जारी है।

संगठित अपराध के खिलाफ अभियान जारी
झारखंड पुलिस का कहना है कि राज्य में संगठित अपराध, रंगदारी और आपराधिक गिरोहों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। सुजीत सिन्हा की मौत के बाद उसके नेटवर्क और सहयोगियों की गतिविधियों की भी जांच की जा रही है।
सुजीत सिन्हा की मौत झारखंड में संगठित अपराध के खिलाफ पुलिस अभियान का एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम मानी जा रही है। हालांकि, घटना को लेकर पुलिस का पक्ष सामने आया है। यदि इस मुठभेड़ की न्यायिक या स्वतंत्र जांच होती है अथवा मामले में कोई नया आधिकारिक तथ्य सामने आता है, तो उससे इस पूरे घटनाक्रम की तस्वीर और स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल पुलिस उसके आपराधिक नेटवर्क






