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JPSC Scam: हजारीबाग में CID की बड़ी कार्रवाई, दो भाइयों के नेटवर्क पर शिकंजा; ब्लैंक चेक और एडमिट कार्ड बरामद

Exam Fraud

प्रदीप यादव और लालू यादव की भूमिका जांच के घेरे में, दस्तावेजों से खुल सकते हैं परीक्षा सिंडिकेट के बड़े राज

रांची/हजारीबाग: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 14वीं सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच अब एक बड़े नेटवर्क की ओर इशारा कर रही है। हजारीबाग में सोमवार को CID की कार्रवाई के दौरान मिले दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों ने जांच को नई दिशा दे दी है। जांच एजेंसी को संदेह है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित सेटिंग कराने वाला एक संगठित नेटवर्क सक्रिय था, जिसका संचालन दो भाइयों प्रदीप यादव और लालू यादव के इर्द-गिर्द होता था।

सूत्रों के अनुसार, बरामद दस्तावेजों और प्रारंभिक जांच के आधार पर अब इस पूरे नेटवर्क की परतें खंगाली जा रही हैं। हालांकि, जांच अभी जारी है और एजेंसी ने अब तक इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष घोषित नहीं किया है।

सुबह छह बजे शुरू हुई कार्रवाई, पांच घंटे तक चली तलाशी
सोमवार सुबह करीब 6 बजे CID की विशेष टीम ने हजारीबाग के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के पौता गांव स्थित एक मकान पर छापेमारी की। इस दौरान स्थानीय पुलिस की कई टीमें भी सुरक्षा व्यवस्था में तैनात रहीं। पूरे इलाके की घेराबंदी कर करीब पांच घंटे तक सघन तलाशी अभियान चलाया गया। जांच अधिकारियों ने घर के विभिन्न कमरों, अलमारियों और लॉकरों की बारीकी से जांच की। परिजनों से भी पूछताछ की गई। इसके बाद जांच का दायरा बढ़ाते हुए टीम ने बड़कागांव क्षेत्र में भी कई स्थानों पर छापेमारी की, जो देर रात तक जारी रही।

दो भाइयों की भूमिका पर CID का फोकस
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि पूरे नेटवर्क का संचालन कथित रूप से दो भाइयों प्रदीप यादव और लालू यादव के इर्द-गिर्द केंद्रित था। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी इस पहलू की पड़ताल कर रही है कि एक भाई ने JPSC जैसी प्रतिष्ठित परीक्षा में सफलता हासिल कर समाज में अपनी विश्वसनीय पहचान बनाई, जबकि दूसरा भाई कथित तौर पर प्रतियोगी परीक्षाओं में सेटिंग कराने वाले नेटवर्क को संचालित करता था। CID यह भी जांच कर रही है कि क्या इसी सामाजिक भरोसे का इस्तेमाल अभ्यर्थियों को प्रभावित करने और कथित आर्थिक लेन-देन के लिए किया गया।

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ब्लैंक चेक, एडमिट कार्ड और वित्तीय दस्तावेज मिले
छापेमारी के दौरान CID को कई महत्वपूर्ण दस्तावेज मिले हैं। सूत्रों के अनुसार, इनमें बड़ी संख्या में हस्ताक्षरित और ब्लैंक बैंक चेक, उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा से जुड़े अभ्यर्थियों के मूल एडमिट कार्ड तथा अन्य वित्तीय दस्तावेज शामिल हैं। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या नौकरी दिलाने के नाम पर अभ्यर्थियों या उनके परिजनों से कथित रूप से धन लिया गया था। बरामद बैंक दस्तावेजों और वित्तीय रिकॉर्ड का भी विस्तृत विश्लेषण किया जा रहा है।

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कई लोगों से पूछताछ जारी
सूत्रों के अनुसार, इस मामले में कई लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पूछताछ एक गोपनीय स्थान पर चल रही है। जांच अधिकारी जब्त किए गए एडमिट कार्ड, रोल नंबर, बैंक दस्तावेज और अन्य रिकॉर्ड का मिलान कर यह पता लगाने का प्रयास कर रहे हैं कि इस कथित नेटवर्क से किन-किन लोगों को लाभ पहुंचा। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि इस पूरे मामले में किन लोगों की प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष भूमिका रही।

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बढ़ सकता है जांच का दायरा
CID का मानना है कि दस्तावेजों की फॉरेंसिक जांच और पूछताछ के बाद इस नेटवर्क से जुड़े अन्य बिचौलियों, सहयोगियों और संभावित प्रभावशाली लोगों की भूमिका भी सामने आ सकती है। फिलहाल एजेंसी पूरे मामले की विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। JPSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं की जांच लगातार व्यापक होती जा रही है। पहले ही इस मामले में कई अधिकारियों, निजी एजेंसी से जुड़े लोगों और अभ्यर्थियों पर कार्रवाई हो चुकी है। अब हजारीबाग में हुई यह कार्रवाई इस बात का संकेत मानी जा रही है कि जांच एजेंसियां कथित नेटवर्क की पूरी श्रृंखला तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं।

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