JPSC विवाद पर कल्पना सोरेन का बड़ा बयान, बोलीं- छात्रों के मुद्दे पर आज अधिकारियों से बात कर सकते हैं CM
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन छात्रों के भविष्य को लेकर गंभीर, सरकार जल्द निकाल सकती है समाधान
रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और झारखंड कर्मचारी चयन आयोग (JSSC) की विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर राजधानी रांची में जारी छात्र आंदोलन के बीच झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) की विधायक कल्पना सोरेन का बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन छात्रों के भविष्य को लेकर पूरी तरह संवेदनशील हैं और सरकार इस पूरे मामले पर गंभीरता से विचार कर रही है। उन्होंने संकेत दिए कि मुख्यमंत्री मंगलवार को इस मुद्दे पर वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर सकते हैं और छात्रों की मांगों पर चर्चा के बाद आगे का रास्ता तय किया जाएगा।
छात्रों का भविष्य सरकार की प्राथमिकता
मीडिया से बातचीत करते हुए कल्पना सोरेन ने कहा कि JPSC और JSSC परीक्षाओं से जुड़े विवाद को सरकार हल्के में नहीं ले रही है। यह हजारों युवाओं के करियर और भविष्य से जुड़ा मामला है, इसलिए सरकार प्रत्येक पहलू पर गंभीरता से विचार कर रही है। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन हमेशा छात्रों और युवाओं के हितों को प्राथमिकता देते रहे हैं और इस बार भी सरकार उनकी चिंताओं को समझते हुए समाधान निकालने का प्रयास कर रही है।
उन्होंने कहा कि छात्रों की समस्याओं को केवल आंदोलन के रूप में नहीं देखा जा सकता, बल्कि इसे उनके भविष्य और रोजगार से जुड़े एक संवेदनशील मुद्दे के रूप में समझने की आवश्यकता है।
आज अधिकारियों के साथ हो सकती है अहम बैठक
कल्पना सोरेन ने बताया कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन आज इस पूरे मामले को लेकर संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ चर्चा कर सकते हैं। बैठक में JPSC परीक्षा से जुड़े घटनाक्रम, CID की जांच की प्रगति, छात्रों की प्रमुख मांगों और सरकार के संभावित कदमों पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि बैठक के बाद कोई औपचारिक घोषणा की जाएगी या नहीं, लेकिन उन्होंने उम्मीद जताई कि छात्रों के हित में जल्द कोई सकारात्मक निर्णय सामने आ सकता है।
रांची में जारी है छात्रों का आंदोलन
गौरतलब है कि पिछले कई दिनों से राजधानी रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में JPSC और JSSC अभ्यर्थी अनिश्चितकालीन धरना और सत्याग्रह पर बैठे हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा सहित कई भर्ती परीक्षाओं में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं, जिनकी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। छात्रों की प्रमुख मांगों में परीक्षा प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच, दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और भर्ती प्रक्रिया में सुधार शामिल हैं। आंदोलन के दौरान छात्र मशाल जुलूस, धरना और विभिन्न शांतिपूर्ण विरोध कार्यक्रम भी आयोजित कर चुके हैं।
सरकार और छात्रों के बीच वार्ता की संभावना
सूत्रों के अनुसार, राज्य सरकार छात्रों से बातचीत के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने पर भी विचार कर रही है। प्रस्तावित समिति में मंत्रियों, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और विभिन्न पक्षों के प्रतिनिधियों को शामिल किए जाने की संभावना है। इस समिति का उद्देश्य छात्रों की मांगों को सुनना और बातचीत के माध्यम से आंदोलन का समाधान निकालना होगा। यदि मुख्यमंत्री की बैठक में इस प्रस्ताव पर सहमति बनती है, तो सरकार और आंदोलनरत छात्रों के बीच जल्द औपचारिक वार्ता शुरू हो सकती है।

CID जांच के बीच बढ़ी सरकार की सक्रियता
इधर, JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी की जांच भी लगातार आगे बढ़ रही है। CID अब तक कई अधिकारियों, निजी एजेंसी से जुड़े लोगों और अभ्यर्थियों को गिरफ्तार कर चुकी है। आयोग के पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते से भी कई दौर की पूछताछ हो चुकी है। लगातार हो रही छापेमारी और जांच के कारण यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। ऐसे में सरकार पर छात्रों की चिंताओं का समाधान निकालने और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने का दबाव भी बढ़ता जा रहा है।
छात्रों की नजर अब सरकार के फैसले पर
कल्पना सोरेन के बयान के बाद आंदोलनरत छात्रों की निगाहें अब मुख्यमंत्री और सरकार की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि सरकार बातचीत की पहल करती है और छात्रों की मांगों पर ठोस आश्वासन देती है, तो लंबे समय से जारी आंदोलन के समाधान की दिशा में सकारात्मक प्रगति हो सकती है। हालांकि, छात्र संगठनों का कहना है कि जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर स्पष्ट निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। ऐसे में आने वाले कुछ दिन JPSC विवाद और छात्र आंदोलन के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं।






