JPSC-JSSC छात्र आंदोलन को राहुल गांधी का समर्थन, सरकार से वार्ता के लिए 11 सदस्यीय कमेटी तैयार; सियासत भी तेज

Rahul Gandhi JPSC

राहुल गांधी ने आंदोलनकारी छात्रों से फोन पर की बात, सरकार बोली- दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा, योग्य अभ्यर्थियों के हित सुरक्षित रहेंगे

रांची: झारखंड में JPSC, JSSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं के खिलाफ रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में जारी छात्र आंदोलन अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचता दिख रहा है। आंदोलन के 13वें दिन एक ओर जहां छात्रों ने सरकार से वार्ता के लिए अपना 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल गठित कर दिया, वहीं दूसरी ओर कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आंदोलनकारी छात्रों से फोन पर बातचीत कर उनके आंदोलन का समर्थन जताया। उधर, विधानसभा के मानसून सत्र में सरकार के मंत्रियों ने साफ किया कि सरकार मामले को गंभीरता से ले रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई जारी रहेगी।

सरकार से वार्ता के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल तैयार
गुरुवार दोपहर आंदोलनरत छात्रों ने सरकार के साथ प्रस्तावित वार्ता के लिए 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल की सूची जारी कर दी। यह सूची रांची सदर एसडीओ को सौंप दी गई है। प्रतिनिधिमंडल में आठ छात्र प्रतिनिधि, दो वरिष्ठ पत्रकार और एक कानूनविद शामिल हैं। छात्र प्रतिनिधियों में पीयूष कुमार सिंह, रवींद्र पासवान, राजेश प्रसाद, नीतू कुजूर, कार्तिक सोरेन, रवींद्र कुमार रवि, अंकित कुमार और शालू सिंह शामिल हैं। वहीं, पत्रकार प्रतिनिधि के रूप में शंभूनाथ चौधरी और विकास वर्मा, जबकि कानूनविद के रूप में झारखंड के पूर्व महाधिवक्ता अजीत कुमार को शामिल किया गया है।

हालांकि छात्रों ने स्पष्ट किया है कि सरकार के साथ होने वाली वार्ता में केवल छात्र प्रतिनिधि ही अपनी मांगें और तथ्य रखेंगे। पत्रकार और कानूनविद केवल पर्यवेक्षक एवं अभिभावक की भूमिका निभाएंगे।

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प्रशासन ने मांगे थे पांच नाम
जानकारी के अनुसार जिला प्रशासन ने वार्ता के लिए छात्रों से पांच प्रतिनिधियों के नाम मांगे थे। प्रशासन का कहना है कि बातचीत केवल छात्रों से होगी। देर शाम तक वार्ता के समय और स्थान को लेकर कोई अंतिम निर्णय नहीं हो सका। शाम को रांची सदर एसडीओ कुमार रजत और एडीएम लॉ एंड ऑर्डर धनंजय कुमार आंदोलन स्थल पहुंचे और छात्रों का हालचाल जाना। अधिकारियों ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल की अंतिम सूची मिलने के बाद आगे की प्रक्रिया तय की जाएगी। दूसरी ओर छात्रों का दावा है कि सूची पहले ही प्रशासन को सौंप दी गई है।

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राहुल गांधी ने फोन पर जाना छात्रों का पक्ष
आंदोलन के बीच बड़ा राजनीतिक घटनाक्रम तब सामने आया जब झारखंड कांग्रेस महानगर अध्यक्ष कुमार राजा की पहल पर लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने आंदोलनकारी छात्र प्रतिनिधियों पीयूष कुमार सिंह और रवींद्र से फोन पर बातचीत की। राहुल गांधी ने छात्रों की मांगें सुनीं और कहा कि शिक्षा व्यवस्था एवं भर्ती प्रणाली में व्यापक सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि छात्रों का आंदोलन केवल झारखंड तक सीमित नहीं है, बल्कि देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने आंदोलनकारियों से कहा कि उनकी मांगों को लिखित रूप में लिया जाएगा और पार्टी स्तर पर संबंधित मंचों पर उठाया जाएगा।

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छात्रों ने कांग्रेस से भी पूछे सवाल
फोन पर बातचीत के दौरान छात्र प्रतिनिधियों ने राहुल गांधी से कहा कि कांग्रेस झारखंड सरकार का हिस्सा है, इसलिए उनसे अधिक उम्मीदें हैं। उन्होंने सवाल किया कि यदि राज्य सरकार उनकी मांगें नहीं मानती है, तो क्या कांग्रेस सरकार से अपना समर्थन वापस लेने पर विचार करेगी? इस पर राहुल गांधी ने कहा कि फिलहाल संवाद का रास्ता खुला हुआ है और समाधान बातचीत के जरिए निकालने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि कांग्रेस विद्यार्थियों के हितों के साथ खड़ी है।

सरकार का दावा- कार्रवाई पहले ही शुरू हो चुकी है
विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान सरकार के कई मंत्रियों ने छात्र आंदोलन पर अपनी प्रतिक्रिया दी। नगर विकास मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संवेदनशीलता दिखाते हुए चार मंत्रियों की समिति बनाई है। शिकायत मिलते ही सरकार ने CID जांच, छापेमारी और गिरफ्तारियों की कार्रवाई शुरू कर दी थी।कल्याण मंत्री चमरा लिंडा ने कहा कि पेपर लीक केवल झारखंड नहीं बल्कि पूरे देश की गंभीर चुनौती बन चुका है। उन्होंने कहा कि केवल सरकार को दोष देने से समाधान नहीं निकलेगा।

स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि सरकार छात्रों की समस्याओं को लेकर गंभीर है और बातचीत के जरिए समाधान निकाला जाएगा। उन्होंने बताया कि मामले में तत्काल कार्रवाई करते हुए आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष का इस्तीफा लिया गया और कई लोगों को जेल भेजा जा चुका है। ग्रामीण विकास मंत्री दीपिका पांडेय सिंह ने कहा कि दोषी किसी भी कीमत पर नहीं बचेंगे। साथ ही उन्होंने भरोसा दिलाया कि जिन अभ्यर्थियों ने अपनी योग्यता के आधार पर सफलता हासिल की है, उनके हितों की भी पूरी रक्षा की जाएगी।

क्या हैं छात्रों की प्रमुख मांगें?
आंदोलनकारी छात्रों ने सरकार के सामने चार प्रमुख मांगें रखी हैं—

  • TDPL द्वारा आयोजित JPSC की सभी विवादित परीक्षाओं को रद्द किया जाए।
  • जिन परीक्षाओं में कथित रूप से अभय तिवारी की संलिप्तता रही है, उन्हें भी निरस्त किया जाए।
  • पूरे मामले की CBI और ED से जांच कराई जाए।
  • प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए सख्त कानून बनाया जाए।

अब वार्ता पर टिकी हैं निगाहें
छात्र आंदोलन अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गया है जहां एक तरफ सरकार ने वार्ता के संकेत दिए हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष और कांग्रेस दोनों इस मुद्दे पर सक्रिय दिखाई दे रहे हैं। छात्र भी बातचीत के लिए तैयार हैं, लेकिन वे अपनी मांगों पर किसी तरह का समझौता करने के पक्ष में नहीं हैं। अब पूरे राज्य की निगाहें सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच होने वाली पहली औपचारिक वार्ता पर टिकी हैं। माना जा रहा है कि आने वाले कुछ दिन इस आंदोलन की दिशा और झारखंड की राजनीति दोनों के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।

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