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झारखंड छात्र आंदोलन का आज बड़ा इम्तिहान, AISA समेत वाम छात्र संगठनों का विधानसभा मार्च; रांची पुलिस हाई अलर्ट पर

Vidhan Sabha March

नेहा बोरा भी होंगी मार्च में शामिल, आंदोलनरत छात्रों ने बनाई दूरी; सरकार-छात्र वार्ता पर अब भी संशय

रांची: झारखंड में JPSC, JSSC और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच 7 अगस्त का दिन बेहद अहम माना जा रहा है। आंदोलन के समर्थन में AISA (ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन) समेत वामपंथी छात्र संगठनों और कई सामाजिक संगठनों ने आज झारखंड विधानसभा मार्च का आह्वान किया है। इस मार्च को लेकर राजधानी रांची में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। मार्च में AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा के शामिल होने की घोषणा के बाद आंदोलन को लेकर सियासी सरगर्मी और बढ़ गई है। इसे देखते हुए रांची पुलिस और जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है। विधानसभा और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है, ताकि कानून-व्यवस्था की स्थिति बनी रहे।

आंदोलनकारी छात्रों ने बनाई दूरी
हालांकि, जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में पिछले कई दिनों से धरना दे रहे आंदोलनरत छात्रों ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि वे इस विधानसभा मार्च का हिस्सा नहीं बनेंगे। छात्र नेताओं का कहना है कि उनका आंदोलन पूरी तरह स्वतंत्र और शांतिपूर्ण है तथा वे अपनी निर्धारित रणनीति के अनुसार ही आगे बढ़ेंगे। उनका फोकस सरकार के साथ प्रस्तावित वार्ता और अपनी मांगों पर बना हुआ है। ऐसे में अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि विधानसभा मार्च में छात्र संगठनों और सामाजिक संगठनों की कितनी भागीदारी होती है और इसका आंदोलन पर क्या प्रभाव पड़ता है।

बारिश बन सकती है बड़ी चुनौती
विधानसभा मार्च के सामने मौसम भी बड़ी चुनौती बन सकता है। मौसम विभाग के अनुसार रांची में बारिश की संभावना बनी हुई है। यदि दिन के दौरान तेज बारिश होती है, तो मार्च में शामिल होने वाले लोगों की संख्या और पूरे कार्यक्रम पर इसका असर पड़ सकता है।
प्रशासन भी मौसम और संभावित भीड़ दोनों को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा व्यवस्था की लगातार समीक्षा कर रहा है।

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रांची पुलिस हाई अलर्ट पर
विधानसभा मार्च को देखते हुए राजधानी रांची में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। विधानसभा परिसर, प्रमुख चौक-चौराहों और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। पुलिस अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि कानून-व्यवस्था बनाए रखते हुए प्रदर्शनकारियों के साथ संयमित व्यवहार किया जाए। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने आवश्यक तैयारियां पूरी कर ली हैं।

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सरकार-छात्र वार्ता अब भी अधर में
छात्र आंदोलन के बीच सरकार और आंदोलनकारियों के बीच प्रस्तावित वार्ता अब तक शुरू नहीं हो सकी है। 6 अगस्त को सरकार की ओर से गठित मंत्रिस्तरीय समिति और छात्रों के प्रतिनिधिमंडल के बीच बैठक होने की संभावना जताई गई थी। देर शाम तक स्टेट गेस्ट हाउस में वार्ता को लेकर चर्चाएं चलती रहीं, लेकिन कोई अंतिम सहमति नहीं बन सकी और बातचीत टल गई। इससे पहले आंदोलनरत छात्रों ने सरकार से बातचीत के लिए अपना 11 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल गठित कर सरकार को सूची सौंप दी थी। दूसरी ओर सरकार भी चार मंत्रियों और एक वरिष्ठ अधिकारी वाली उच्चस्तरीय समिति का गठन कर चुकी है।

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आज के घटनाक्रम पर टिकी निगाहें
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आज का विधानसभा मार्च और सरकार-छात्र वार्ता को लेकर आगे होने वाला घटनाक्रम आंदोलन की दिशा तय कर सकता है। यदि जल्द बातचीत शुरू नहीं होती है, तो आंदोलन और व्यापक रूप ले सकता है। फिलहाल पूरे राज्य की नजर दो अहम घटनाओं पर है—एक तरफ विधानसभा मार्च और दूसरी तरफ सरकार तथा आंदोलनरत छात्रों के बीच संभावित वार्ता। आने वाले घंटों में होने वाले घटनाक्रम से यह स्पष्ट होगा कि छात्र आंदोलन समाधान की दिशा में बढ़ता है या संघर्ष और तेज होता है।

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