झारखंड में राशन कार्ड पर बड़ी कार्रवाई: 6.29 लाख अपात्र लाभुकों के कार्ड रद्द करने का आदेश

Jharkhand ration card cancellation

31 अगस्त तक कार्रवाई नहीं हुई तो राज्य का अनाज कोटा प्रभावित होने की आशंका

रांची: झारखंड में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को पारदर्शी और प्रभावी बनाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है। राज्य सरकार ने 6.29 लाख से अधिक अपात्र राशन कार्ड धारकों की पहचान कर उनके राशन कार्ड रद्द करने की प्रक्रिया तेज कर दी है। यह कार्रवाई केंद्र सरकार के निर्देशों के अनुरूप की जा रही है। सूत्रों के अनुसार, 31 अगस्त 2026 तक अपात्र लाभुकों के राशन कार्ड निरस्त नहीं किए गए तो केंद्र सरकार राज्य के खाद्यान्न आवंटन (अनाज कोटा) की समीक्षा या उस पर प्रभाव डाल सकती है।

अपात्र लाभुकों की सूची तैयार
सरकारी स्तर पर किए गए सत्यापन के दौरान ऐसे लाखों राशन कार्ड चिन्हित किए गए हैं, जो पात्रता मानकों पर खरे नहीं उतरते। इनमें कथित रूप से आर्थिक रूप से सक्षम परिवार, सरकारी कर्मचारी और अन्य अपात्र श्रेणी के लाभुक शामिल हैं। सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा योजना (NFSA) और अन्य योजनाओं का लाभ केवल वास्तविक जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचे।

क्यों हो रही है कार्रवाई?
खाद्य सुरक्षा योजनाओं में पारदर्शिता लाने और फर्जी या अपात्र लाभुकों को सूची से हटाने के लिए केंद्र सरकार समय-समय पर राज्यों को राशन कार्डों का सत्यापन करने के निर्देश देती रही है। झारखंड में भी इसी प्रक्रिया के तहत अपात्र लाभुकों की पहचान कर उनके कार्ड रद्द करने की कार्रवाई शुरू की गई है।

Adiwasi Mahotsav

जरूरतमंदों को मिलेगा लाभ
सरकार का मानना है कि अपात्र कार्ड हटने से पात्र और वंचित परिवारों को खाद्यान्न वितरण व्यवस्था का बेहतर लाभ मिलेगा। इससे सरकारी अनाज की बर्बादी और अनियमितताओं पर भी रोक लगाने में मदद मिलेगी।

happy Teacher Day
happy Teacher Day

पात्र लाभुक क्या करें?
खाद्य आपूर्ति विभाग की ओर से अपील की गई है कि यदि कोई लाभुक स्वयं को पात्र मानता है और उसका नाम सत्यापन सूची में शामिल हो गया है, तो वह संबंधित प्रखंड, अंचल कार्यालय या जन वितरण प्रणाली से जुड़े अधिकारियों से संपर्क कर आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत कर सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *