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चंद्रशेखरन फिर बने रहेंगे Tata Sons के चेयरमैन, 5 साल बढ़ा कार्यकाल

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बोर्ड ने बहुमत से पुनर्नियुक्ति को मंजूरी दी, नोएल टाटा ने किया विरोध

अगस्त में चंद्रशेखरन ने कार्यकाल पूरा होने के बाद हटने की घोषणा की थी

मुंबई: टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी Tata Sons में चेयरमैन पद को लेकर चल रही खींचतान के बीच बड़ा फैसला हुआ है। कंपनी के बोर्ड ने गुरुवार को एन. चंद्रशेखरन के कार्यकारी चेयरमैन के रूप में कार्यकाल को पांच साल और बढ़ाने को मंजूरी दे दी।हालांकि, टाटा ट्रस्ट्स के चेयरमैन नोएल टाटा ने इस प्रस्ताव का विरोध किया। अब चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति को वार्षिक आम बैठक (AGM) में शेयरधारकों की मंजूरी भी लेनी होगी। यह फैसला इसलिए भी अहम है क्योंकि करीब एक महीने पहले, 12 अगस्त 2026 को चंद्रशेखरन ने घोषणा की थी कि वह मौजूदा कार्यकाल खत्म होने के बाद तीसरे कार्यकाल के लिए अपना नाम पेश नहीं करेंगे। उनका मौजूदा कार्यकाल 20 फरवरी 2027 को समाप्त होना था।

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अचानक बदला फैसला
चंद्रशेखरन ने अगस्त में कहा था कि फरवरी 2026 में उनके पांच साल के अगले कार्यकाल का प्रस्ताव बोर्ड में सर्वसम्मत समर्थन हासिल नहीं कर पाया था। इसके बाद करीब छह महीने तक उनकी पुनर्नियुक्ति पर कोई अंतिम फैसला नहीं हो सका। उन्होंने नेतृत्व को लेकर जारी अनिश्चितता के बीच खुद को दोबारा चेयरमैन पद के लिए पेश नहीं करने का फैसला किया था। उस समय रिपोर्टों में टाटा ट्रस्ट्स और टाटा संस के बीच गवर्नेंस, पूंजी आवंटन और कंपनी की संभावित लिस्टिंग समेत कई मुद्दों पर मतभेद का जिक्र किया गया था। अब 17 सितंबर की बोर्ड बैठक में स्थिति बदल गई और चंद्रशेखरन की पांच साल की नई अवधि को बहुमत से मंजूरी दे दी गई।

नोएल टाटा ने किया विरोध
बोर्ड के फैसले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नोएल टाटा ने चंद्रशेखरन की पुनर्नियुक्ति का विरोध किया। नोएल टाटा का तर्क है कि चंद्रशेखरन ने अगस्त में खुद तीसरे कार्यकाल के लिए उपलब्ध नहीं होने का फैसला किया था और टाटा ट्रस्ट्स ने उसी आधार पर उत्तराधिकारी की प्रक्रिया शुरू करने की दिशा में कदम उठाया था। नोएल टाटा ने यह सवाल भी उठाया है कि जब चंद्रशेखरन के Tata Sons के निदेशक पद से जुड़े मामले को लेकर AGM की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई है, तब चेयरमैन के रूप में उनकी पुनर्नियुक्ति का फैसला कैसे आगे बढ़ सकता है।

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अंतिम फैसला अभी बाकी
बोर्ड की मंजूरी के बावजूद चंद्रशेखरन का नया कार्यकाल अभी पूरी तरह अंतिम नहीं हुआ है। उनकी पुनर्नियुक्ति को Tata Sons की AGM में शेयरधारकों की मंजूरी की जरूरत होगी। Tata Trusts के पास Tata Sons की करीब 66 प्रतिशत हिस्सेदारी है। ऐसे में AGM में ट्रस्ट्स की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। यानी बोर्ड के फैसले के बाद भी चंद्रशेखरन के अगले पांच साल को लेकर अंतिम स्थिति शेयरधारकों की मंजूरी पर निर्भर करेगी।

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Tata Sons की लिस्टिंग पर भी बड़ा फैसला
गुरुवार की बोर्ड बैठक में केवल चेयरमैन पद का मामला ही महत्वपूर्ण नहीं रहा। बोर्ड ने Tata Sons को शेयर बाजार में सूचीबद्ध करने की दिशा में जरूरी कदम उठाने पर भी फैसला किया है। यह घटनाक्रम RBI की ओर से Tata Sons की उस अर्जी को खारिज किए जाने के बाद आया है, जिसमें कंपनी ने अपनी Core Investment Company के रूप में पंजीकरण की स्थिति बदलने की मांग की थी। Tata Sons की लिस्टिंग को लेकर भी टाटा ट्रस्ट्स के भीतर और बोर्ड स्तर पर अलग-अलग राय सामने आई हैं।

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आखिर क्यों हुआ था चंद्रशेखरन का पिछला फैसला?
अगस्त में चंद्रशेखरन के पद छोड़ने की घोषणा को केवल नोएल टाटा के साथ व्यक्तिगत मतभेद के तौर पर देखना पूरी तरह सटीक नहीं होगा। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, उनकी पुनर्नियुक्ति को लेकर कई महीनों से बोर्ड में अनिश्चितता थी। इसके अलावा Tata Sons की लिस्टिंग, नई कंपनियों में पूंजी निवेश, घाटे वाले कारोबार और Tata Trusts की भूमिका जैसे मुद्दों पर भी मतभेदों की रिपोर्ट सामने आई थी। चंद्रशेखरन ने उस समय नेतृत्व में स्पष्टता की जरूरत को अपने फैसले का प्रमुख कारण बताया था।

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अब पांच साल के नए कार्यकाल को बोर्ड की मंजूरी मिलने के बाद Tata Sons में नेतृत्व का मुद्दा फिर से AGM के केंद्र में आ गया है। आने वाले समय में शेयरधारकों की बैठक और टाटा ट्रस्ट्स का रुख इस फैसले की अंतिम दिशा तय करने में महत्वपूर्ण होगा।

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