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चांडिल कोर्ट में नोटरी की फर्जी मोहर से दस्तावेज तैयार करने का सनसनीखेज मामला, पुलिस जांच में जुटी; न्यायिक व्यवस्था की विश्वसनीयता पर उठे सवाल

Chandil Court fake notary seal

सोशल मीडिया पर मिले दस्तावेज से हुआ फर्जीवाड़े का खुलासा।

फर्जी मोहर का उपयोग किन दस्तावेजों में हुआ, इसकी जांच जारी।

बार एसोसिएशन ने घटना को न्यायिक व्यवस्था के लिए गंभीर बताया।

चांडिल: सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल व्यवहार न्यायालय परिसर से नोटरी पब्लिक की कथित फर्जी मोहर बनाकर दस्तावेज तैयार किए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। मामले के उजागर होने के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है। यह मामला केवल दस्तावेजों की जालसाजी तक सीमित नहीं माना जा रहा, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की विश्वसनीयता और आम नागरिकों के भरोसे से भी जुड़ा एक गंभीर विषय बन गया है।

मामले की शिकायत चांडिल व्यवहार न्यायालय के वरिष्ठ अधिवक्ता एवं भारत सरकार से लाइसेंस प्राप्त नोटरी पब्लिक अशोक कुमार झा ने की है। शिकायत के बाद पुलिस विभिन्न पहलुओं से जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फर्जी मोहर किसने तैयार की और उसका उपयोग किन-किन दस्तावेजों में किया गया।

सोशल मीडिया से मिली जानकारी, जांच में सामने आई फर्जी मोहर
वरिष्ठ अधिवक्ता अशोक कुमार झा ने बताया कि 29 जुलाई 2026 को उन्हें सोशल मीडिया के माध्यम से एक दस्तावेज प्राप्त हुआ। पहली नजर में उस पर उनके नाम की नोटरी मोहर दिखाई दी, लेकिन गहन जांच करने पर पता चला कि वह उनकी अधिकृत मोहर नहीं थी, बल्कि उसकी हूबहू नकली प्रति तैयार की गई थी। उन्होंने बताया कि दस्तावेज पर उनके हस्ताक्षर भी मौजूद नहीं थे, जिससे स्पष्ट हुआ कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उनकी पहचान और पद का दुरुपयोग करते हुए फर्जी दस्तावेज तैयार किया है।

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वर्षों से नोटरी सेवाएं दे रहे हैं अधिवक्ता
अशोक कुमार झा ने कहा कि वे कई वर्षों से चांडिल व्यवहार न्यायालय में अधिकृत नोटरी पब्लिक के रूप में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उनकी अधिकृत मोहर का उपयोग दस्तावेजों के सत्यापन और प्रमाणीकरण के लिए किया जाता है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि उनकी नकली मोहर का इस्तेमाल कर दस्तावेज तैयार किए जा रहे हैं, तो इससे उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंच सकता है। साथ ही आम नागरिकों के साथ धोखाधड़ी और न्यायिक प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।

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प्रशासन और न्यायालय को दी लिखित शिकायत
मामले की गंभीरता को देखते हुए अधिवक्ता ने अनुमंडल पदाधिकारी (SDO), अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO), चांडिल थाना, व्यवहार न्यायालय तथा चांडिल बार एसोसिएशन के अध्यक्ष और सचिव को इसकी जानकारी दी। उन्होंने SDO को लिखित शिकायत सौंपते हुए अपनी वास्तविक नोटरी मोहर का नमूना तथा संदिग्ध दस्तावेज की प्रति भी उपलब्ध कराई, ताकि जांच में आसानी हो सके।

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पुलिस ने शुरू की जांच
शिकायत मिलने के बाद चांडिल थाना के एएसआई सुरेंद्र कुमार न्यायालय परिसर पहुंचे और मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने संदिग्ध दस्तावेज को साक्ष्य के रूप में जब्त कर लिया है। जांच के दौरान बार एसोसिएशन के अधिवक्ताओं तथा नोटरी कार्य से जुड़े कर्मियों से भी पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि फर्जी मोहर किसने तैयार की, उसका उपयोग कितने दस्तावेजों में किया गया और क्या इसके पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय है।

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बार एसोसिएशन ने जताई चिंता
चांडिल बार एसोसिएशन ने भी इस घटना को बेहद गंभीर बताते हुए चिंता व्यक्त की है। अधिवक्ताओं का कहना है कि नोटरी पब्लिक की फर्जी मोहर बनाकर दस्तावेज तैयार करना केवल एक व्यक्ति की प्रतिष्ठा पर हमला नहीं, बल्कि न्यायिक व्यवस्था और आम नागरिकों के विश्वास को कमजोर करने वाला गंभीर अपराध है। बार एसोसिएशन ने दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि ऐसे मामलों पर सख्ती नहीं बरती गई तो भविष्य में दस्तावेजों की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लग सकता है।

जांच जारी, पुलिस को कई पहलुओं की पड़ताल
पुलिस फिलहाल मामले की हर पहलू से जांच कर रही है। अधिकारी यह भी पता लगाने में जुटे हैं कि फर्जी दस्तावेजों का उपयोग किसी संपत्ति विवाद, बैंकिंग प्रक्रिया, न्यायालयी कार्यवाही या अन्य कानूनी मामलों में तो नहीं किया गया। जांच पूरी होने के बाद ही पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकेगी।

चांडिल व्यवहार न्यायालय में नोटरी की कथित फर्जी मोहर का मामला न्यायिक प्रणाली की सुरक्षा और दस्तावेजों की विश्वसनीयता से जुड़ा गंभीर विषय बन गया है। पुलिस जांच के बाद यह स्पष्ट होगा कि इस फर्जीवाड़े के पीछे कौन लोग शामिल हैं और इसका दायरा कितना व्यापक है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के खिलाफ जालसाजी और अन्य संबंधित धाराओं के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

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