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बक्सर में इंसानियत को झकझोर देने वाला वीडियो वायरल, शव को घसीटकर पोस्टमार्टम रूम ले जाने पर मचा हंगामा

Buxar body dragging video

स्ट्रेचर तक नहीं मिला तो शव को 15-20 मीटर घसीटने का दावा

पूर्व विधायक मुन्ना तिवारी ने सिविल सर्जन और डीएम की व्यवस्था पर दागे तीखे सवाल

बक्सर: बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं। अस्पतालों में बेहतर सुविधाओं की बात होती है, मरीजों को सम्मानजनक इलाज देने का दावा किया जाता है। लेकिन बक्सर से सामने आया एक वायरल वीडियो इन तमाम दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक कर्मी कथित तौर पर एक शव को करीब 15 से 20 मीटर तक घसीटते हुए पोस्टमार्टम रूम के अंदर ले जाता दिखाई दे रहा है। दावा है कि पोस्टमार्टम हाउस में शव को ले जाने के लिए जरूरी संसाधन, यहां तक कि स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं था। अगर यह दावा सही है तो सवाल सिर्फ एक स्ट्रेचर का नहीं है। सवाल उस व्यवस्था का है, जहां जिंदा मरीजों के इलाज से पहले और मृत व्यक्ति के सम्मान के बाद भी सिस्टम की जिम्मेदारी खत्म होती नजर आ रही है। वायरल वीडियो ने बक्सर के पुराने सदर अस्पताल परिसर स्थित सरकारी पोस्टमार्टम हाउस की व्यवस्था को कटघरे में खड़ा कर दिया है।

शव को घसीटा गया… और सिस्टम देखता रहा?
वायरल वीडियो में जो तस्वीर दिखाई दे रही है, वह बेहद परेशान करने वाली है। एक कर्मचारी शव को पोस्टमार्टम कक्ष तक ले जाने के लिए उसे फर्श पर घसीटता नजर आ रहा है। बताया जा रहा है कि शव को करीब 15-20 मीटर तक घसीटकर पोस्टमार्टम रूम के भीतर ले जाया गया।

अब सवाल है—आखिर स्ट्रेचर कहां था?
क्या पोस्टमार्टम हाउस में शव को ले जाने की बुनियादी सुविधा भी उपलब्ध नहीं है? अगर स्ट्रेचर नहीं था, तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? और अगर स्ट्रेचर उपलब्ध था, तो उसका इस्तेमाल क्यों नहीं हुआ? इन सवालों का जवाब अब बक्सर प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को देना होगा। हालांकि, वायरल वीडियो के आधार पर घटना की पूरी परिस्थितियों और उस समय उपलब्ध संसाधनों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।

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मुन्ना तिवारी का तीखा हमला
इस मामले पर बक्सर के पूर्व सदर विधायक मुन्ना तिवारी ने बेहद तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम हाउस की तस्वीर देखकर उनका सिर शर्म से झुक गया। मुन्ना तिवारी ने सिविल सर्जन और जिलाधिकारी की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक तरफ सरकार सुशासन और बेहतर स्वास्थ्य व्यवस्था का दावा करती है, लेकिन दूसरी तरफ सदर अस्पताल में एक स्ट्रेचर तक उपलब्ध नहीं होने की बात सामने आ रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर किसी मृत व्यक्ति के शव के साथ भी सम्मानजनक व्यवहार सुनिश्चित नहीं किया जा सकता, तो फिर सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों का क्या मतलब रह जाता है? पूर्व विधायक ने जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की है।

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‘यह सिर्फ वीडियो नहीं, व्यवस्था पर सवाल है’
इस पूरे घटनाक्रम ने सोशल मीडिया पर भी लोगों को नाराज कर दिया है। वीडियो सामने आने के बाद लोग सवाल पूछ रहे हैं कि आखिर सरकारी अस्पतालों और पोस्टमार्टम हाउस में बुनियादी सुविधाओं की निगरानी कौन करता है? पोस्टमार्टम हाउस कोई सामान्य जगह नहीं होती। यहां आने वाला हर शव किसी परिवार के लिए किसी अपने की आखिरी निशानी होता है। ऐसे में शव को सम्मानपूर्वक पोस्टमार्टम कक्ष तक पहुंचाने की व्यवस्था होना बुनियादी आवश्यकता है। लेकिन वायरल वीडियो में दिखाई दे रही तस्वीर ने इस व्यवस्था पर ही सवाल खड़ा कर दिया है।

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पुराने सदर अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस पर पहले से सवाल
बताया जा रहा है कि बक्सर के पुराने सदर अस्पताल परिसर स्थित सरकारी पोस्टमार्टम हाउस में लंबे समय से संसाधनों की कमी की चर्चा होती रही है। कर्मचारियों की कमी और बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी सवाल उठाए जाते रहे हैं। अब शव को कथित तौर पर घसीटकर ले जाने का वीडियो सामने आने के बाद यह मुद्दा और गरमा गया है। सवाल यह भी है कि अगर वहां संसाधनों की कमी थी, तो संबंधित अधिकारियों को इसकी जानकारी क्यों नहीं थी? यदि जानकारी थी, तो अब तक व्यवस्था में सुधार क्यों नहीं किया गया?

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प्रशासन से सीधे सवाल
अब बक्सर जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के सामने कई सवाल हैं—क्या पोस्टमार्टम हाउस में स्ट्रेचर उपलब्ध है? अगर नहीं है, तो इतने समय से इसकी व्यवस्था क्यों नहीं की गई? वीडियो में शव को घसीटकर ले जाने की नौबत क्यों आई? क्या इस घटना की जांच होगी? अगर लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी? इन सारे सवालों का जवाब प्रशासन की ओर से आना बाकी है। फिलहाल वायरल वीडियो ने बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था के दावों के बीच एक ऐसा सवाल खड़ा कर दिया है, जिसे नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा। क्योंकि अस्पताल की व्यवस्था का पैमाना सिर्फ यह नहीं होना चाहिए कि वहां मरीजों को कितनी सुविधाएं मिलती हैं, बल्कि यह भी होना चाहिए कि किसी इंसान की मौत के बाद उसके शव के साथ कितनी गरिमा और सम्मान से व्यवहार किया जाता है।

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