रांची में बस्ती पर बुलडोजर कार्रवाई पर हाईकोर्ट की रोक, प्रभावित लोगों को फिलहाल राहत
रांची: राजधानी रांची में पिछले चार-पांच दिनों से चल रही बस्ती खाली कराने की बुलडोजर कार्रवाई पर फिलहाल झारखंड हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। कार्रवाई के दौरान कई मकानों को ध्वस्त किए जाने की बात सामने आई थी। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया था कि उन्हें पर्याप्त सूचना और समय दिए बिना उनके मकानों को तोड़ा जा रहा है। मामले को लेकर बस्ती बचाओ संघर्ष समिति और स्थानीय लोगों की ओर से लगातार विरोध किया जा रहा था। समिति और प्रभावित लोगों का कहना है कि संबंधित बस्ती में कई परिवार 60 वर्षों से भी अधिक समय से रह रहे हैं। बताया गया कि जमीन HEC की है और जमीन खाली कराने के लिए कार्रवाई की जा रही थी। लगातार बुलडोजर कार्रवाई के कारण बड़ी संख्या में परिवार प्रभावित हुए थे।
कई मकान तोड़े जाने का दावा
स्थानीय लोगों के अनुसार, पिछले दिनों कार्रवाई के दौरान कई मकानों को ध्वस्त किया गया। प्रभावित परिवारों ने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में उन्हें अपने घरों से सामान निकालने के लिए पर्याप्त समय भी नहीं दिया गया। कार्रवाई के विरोध में बस्ती बचाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में लगातार प्रदर्शन किया जा रहा था। स्थानीय लोगों की ओर से मकान तोड़े जाने की कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए राहत और पुनर्वास की मांग भी की गई। प्रभावित लोगों का कहना था कि लंबे समय से बस्ती में रहने के बावजूद उन्हें अचानक हटाने की कार्रवाई से परिवारों के सामने आवास की समस्या खड़ी हो गई है।
हाईकोर्ट पहुंचा मामला
मामले को लेकर बस्ती बचाओ संघर्ष समिति और स्थानीय लोगों की ओर से हाईकोर्ट का रुख किया गया। इसके बाद अदालत में मामले की सुनवाई हुई। वार्ड 41 की पार्षद नीलम चौधरी के अनुसार, समिति और स्थानीय लोगों की पहल पर मामले को हाईकोर्ट के समक्ष रखा गया। उन्होंने बताया कि अधिवक्ता इंद्रजीत समेत दो अधिवक्ताओं ने प्रभावित लोगों की ओर से बिना फीस लिए अदालत में पक्ष रखा। सुनवाई के बाद फिलहाल बस्ती खाली कराने की कार्रवाई पर रोक लगाए जाने की जानकारी सामने आई है।
दिसंबर 2026 तक कार्रवाई पर रोक का दावा
वार्ड पार्षद नीलम चौधरी के मुताबिक, हाईकोर्ट ने फिलहाल दिसंबर 2026 तक बस्ती खाली कराने की कार्रवाई पर रोक लगाई है। उन्होंने बताया कि इस अवधि में प्रभावित लोगों को अपने मकान खाली करने की व्यवस्था करनी होगी। हालांकि, हाईकोर्ट के आदेश की विस्तृत शर्तें और उसमें दिए गए सभी निर्देशों की जानकारी आधिकारिक आदेश के अध्ययन के बाद ही स्पष्ट होगी।
बस्ती बचाओ संघर्ष समिति ने जताया आभार
हाईकोर्ट से राहत मिलने के बाद बस्ती बचाओ संघर्ष समिति ने अदालत के प्रति आभार जताया है। समिति के संरक्षक मिंटू पासवान ने इस मामले में मीडिया की भूमिका के लिए भी धन्यवाद दिया। समिति का कहना है कि लंबे समय से बस्ती में रह रहे लोगों को फिलहाल अदालत से राहत मिली है। समिति प्रभावित परिवारों के लिए वैकल्पिक आवास और सम्मानजनक पुनर्वास की मांग कर रही है। मिंटू पासवान के अनुसार, समिति की मांग केवल बस्ती में मकानों को बचाने तक सीमित नहीं है। प्रभावित परिवारों को यदि स्थानांतरित किया जाता है तो उनके लिए उचित पुनर्वास और आवास की व्यवस्था भी की जानी चाहिए।
जमीन HEC की होने का दावा
पूरे विवाद के केंद्र में जमीन का स्वामित्व भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, संबंधित जमीन HEC की बताई जा रही है और इसी आधार पर जमीन खाली कराने की कार्रवाई की जा रही थी। वहीं, बस्ती में लंबे समय से रह रहे परिवार कार्रवाई का विरोध कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे कई दशकों से यहां रह रहे हैं और अचानक मकान हटाए जाने से उनके सामने गंभीर आवासीय संकट पैदा हो सकता है। मामले में जमीन के अधिकार, बस्ती में रहने वाले परिवारों की स्थिति और पुनर्वास से जुड़े पहलुओं पर आगे की कानूनी प्रक्रिया महत्वपूर्ण होगी।
अब पुनर्वास की मांग पर नजर
हाईकोर्ट की रोक के बाद फिलहाल बुलडोजर कार्रवाई पर विराम लगा है। अब प्रभावित परिवारों और बस्ती बचाओ संघर्ष समिति की नजर पुनर्वास और वैकल्पिक आवास की व्यवस्था पर है। समिति ने स्पष्ट किया है कि वह प्रभावित परिवारों के लिए सम्मानजनक पुनर्वास की मांग को आगे भी उठाती रहेगी। वहीं, हाईकोर्ट के आदेश के बाद संबंधित पक्षों को आगे की कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा। मामले में अदालत के विस्तृत आदेश और आगे की सुनवाई के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी। फिलहाल रांची में बस्ती खाली कराने की कार्रवाई पर हाईकोर्ट की रोक के बाद प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत मिली है। अब मामला केवल मकान खाली कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और वैकल्पिक आवास की व्यवस्था भी महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।
- झारखंड में HPV वैक्सीनेशन पर अभी फैसला नहीं, CM हेमंत सोरेन ने सर्वे और विशेषज्ञ समिति के दिए निर्देशसर्वाइकल कैंसर की जांच व्यवस्था होगी मजबूत, RIMS में 319 मेडिकल शिक्षकों के पदों का होगा पुनर्गठन रांची: झारखंड की किशोरियों को सर्वाइकल कैंसर से सुरक्षित रखने के लिए प्रस्तावित HPV टीकाकरण को लेकर राज्य सरकार जल्दबाजी में कोई फैसला नहीं लेगी। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने स्पष्ट किया है कि टीकाकरण लागू करने से पहले…
- झारखंड राज्य भाषा शिक्षा नीति के प्रारूप पर CM हेमंत सोरेन ने की बैठकझारखंड की भाषाई विविधता पर रहेगी नजर रांची: झारखंड मंत्रालय में आज स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, झारखंड सरकार की ओर से तैयार ‘झारखंड राज्य भाषा शिक्षा नीति’ के प्रारूप को लेकर महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने की। बैठक में राज्य में भाषा शिक्षा को लेकर तैयार किए गए नीति…
- अग्निवीरों के लिए बड़ा फैसला! अब 6 साल तक सेवा, परमानेंट नौकरी का भी मिलेगा मौका75 फीसदी अग्निवीरों को मिलेगा दो साल का अतिरिक्त मौका नई दिल्ली: अग्निपथ योजना के तहत भर्ती होने वाले अग्निवीरों के लिए केंद्र सरकार ने बड़ा बदलाव किया है। अब शुरुआती चार साल की सेवा पूरी करने के बाद बाहर होने वाले 75 फीसदी अग्निवीरों को दो साल का अतिरिक्त सर्विस पीरियड दिया जाएगा। इस…
- तुषार कपूर और आयुष्मान खुराना को धमकी देने वाला गिरफ्तार, बेंगलुरु से वैभव मिश्रा दबोचाबेंगलुरु से मुंबई लाया जा रहा आरोपी, कई बॉलीवुड हस्तियों को धमकी देने का आरोप मुंबई: बॉलीवुड अभिनेता तुषार कपूर और आयुष्मान खुराना को धमकी और कथित तौर पर जबरन वसूली के संदेश भेजने के मामले में मुंबई क्राइम ब्रांच ने बड़ी कार्रवाई की है। क्राइम ब्रांच ने बेंगलुरु से 30 वर्षीय आईटी प्रोफेशनल वैभव…
- 2 से ज्यादा बच्चे होने पर चुनाव लड़ने की पाबंदी? सुप्रीम कोर्ट ने कहा- कानूनों की प्रासंगिकता खत्म2003 में TFR 3, अब घटकर 1.9, कोर्ट ने कहा- बदलते हालात में कानूनों की समीक्षा जरूरी नई दिल्ली: भारत में घटती प्रजनन दर के बीच सुप्रीम कोर्ट ने दो से अधिक बच्चे होने पर स्थानीय निकाय चुनाव लड़ने से अयोग्य ठहराने वाले कानूनों को लेकर बुधवार को अहम टिप्पणी की। कोर्ट ने कहा कि…








